लकवाग्रस्त जसकरण सिंह की ये कहानी देश के युवाओं के लिए है मिसाल

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3:51 pm 14 Apr, 2016

इरादे अगर बुलंद हों तो किसी भी रुकावट को पार कर सकते हैं। जसकरण सिंह ने उन युवाओं के समक्ष एक ऐसी मिसाल पेश की है जो मुश्किल आने पर हिम्मत हार जाते हैं।

जसकरण सिंह का शरीर गर्दन से नीचे लकवा से ग्रस्त है, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी मेहनत के बलबूते पर देश के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट-बैंगलोर (IIM-B) में दाखिला लिया है।

दरअसल, वर्ष 2011 में एक दुर्घटना की चपेट में आकर जसकरण के गर्दन से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था। उस समय वह IT-BHU के छात्र थे।

वह करीब 6 महीने तक अस्पताल में भर्ती रहे थे। उनकी कुछ उंगलियों में ही मूवमेंट बचा था।

वर्तमान में जसकरण असिस्टेंट मैनेजर के तौर पर एक्सपीरियन डेवेलपर्स प्राइवेट लिमिटेड में कार्यरत हैं। वह काम के दौरान कस्टम मेड वायरलेस कीपैड का उपयोग करते हैं।

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जसकरण सिंह इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर की दिव्या पराशर के साथ facebook

शारीरिक अक्षमता के बावजूद, जसकरण को अपने-आप पर पूरा भरोसा था कि वह CAT परीक्षा को पास कर सकते हैं।

फिर क्या था, जसकरण ने देश की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में से एक माने जाने वाली परीक्षा स्क्राइब (लेखक) की मदद से दी।

इस परीक्षा का नतीजा चौंकाने वाला रहा। जसकरण को CAT प्रवेश परीक्षा में 99.04 प्रतिशत अंक हासिल हुए।

जसकरण को ख़ासा सहयोग मिला दिव्या पराशर से जो कि इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर में क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक पद पर है। उन्होंने जसकरण की दुर्घटना के सदमे से उबरने में खासतौर पर मदद की।

जसकरण की सफलता को सरहाते हुए स्पाइनल फाउंडेशन के वैद्यनाथन सिंगरारमन ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि “जसकरण ऐसे पहले व्यक्ति बने जिन्हें सर्वाइकल स्तर पर गर्दन से नीचे के हिस्से तक लकवाग्रस्त होने के बावजूद IIM में बिज़नेस मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा में दाखिला मिला हो।”


वैद्यनाथन अपने साथ हुई ऐसी ही घटना को याद करते हुए कहते है कि 1990 में इसी संस्था ने उन्हें रीढ़ की हड्डी में चोट की वजह से दाखिला देने से इंकार कर दिया था। वहीं जसकरण की यह उपलब्धि एक बदलाव की ओर बढ़ता कदम है।

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वैद्यनाथन सिंगरारमन (बाएं तस्वीर में), सिंगरारमन डॉ. सुरंजन भट्टाचार्जी के साथ (दाएं तस्वीर में) facebook

IIM बैंगलोर ने ऐसे बदला अपना फैसला या कहे नियम

इसका श्रेय वैद्यनाथन सिंगरारमन ने क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के शारीरिक चिकित्सा और पुनर्वास के पूर्व प्रमुख रहे डॉ. सुरंजन भट्टाचार्जी को दिया है, जिनके प्रयासों के चलते ऐसा संभव हो पाया।

सच में हार न मानने वाले जसकरण के जज़्बे को हम दिल से सलाम करते है।

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