निराशा से भरी इस दुनिया में इन 12 कारणों की वजह से मैं आशावादी हूं।

author image
3:45 pm 13 Sep, 2015

लोगों को अकेले रहने की आदत सी हो गई है। कुछ तो टूट चुके हैं। और ज़िन्दगी में मानों लगभग हर बात को लेकर उदासीनता सी पसरी है। मैं इस बात से इन्कार नहीं करती कि वास्तविक में जीवन में उतार-चढ़ाव होते है, लेकिन उसका क्या जब हम खुद ही हर बात को, हर राह को जलेबी की तरह टेढ़ी-मेढ़ी बना देते हैं

जब भी मैं किसी से मिलती हूँ तो आमतौर पर लोग अपने काम की शिकायत करते है कि उनका काम कितना अरुचिकर है, उनके प्रेमी कितने उदंड है, या कैसे वह इस दुनिया से व्यथित होकर सब कुछ छोड़ देना चाहते है। सम्वेदना के परिपेक्ष्य से, मैं भी सहानुभूति व्यक्त करती और यहीं बातें कहती। लेकिन इन बातों के साथ मसला यह है कि आप उदास होने का स्वांग करते हैं, तो आप उदास महसूस करने लगते है।

आज मैंने निर्णय लिया है कि अब मैं किसी तरह का स्वांग या दिखावा नहीं करुँगी। जो हूँ, जैसी हूँ, वैसी ही रहूंगी। अब से मैं अपनी ज़िन्दगी को निराशावादी करार नहीं दूंगी। मैं आपको बताउंगी कि क्यों मुझे कहने से डर नहीं लगता कि मैं खुश और प्रसन्न-चित्त हूँ। क्यूंकि, यह मेरी पसंद और मेरा फैसला है।

1. मैं अपने काम से ऊबी नहीं हूँ क्योंकि यह मुझे पसन्द है।

मैं इतनी भाग्यशाली नहीं थी कि हर चीज़ मुझे आसानी या संयोग से मिल जाए। मैं महात्वाकांतक्षी थी और मैनें इसके लिए कड़ा संघर्ष किया है। मेरी तरह आपकी भी महत्वकांक्षाएं और अपनी पसंद होगी।

2. मैं दिल के टूटने से विचलित नहीं हूँ क्योंकि मैंने इससे बहुत कुछ सीखा है।

मैनें एक चीज सीखा है कि लोग बुरे नहीं होते। इसके लिए परिस्थितियां जिम्मेदार होती हैं। ज़रुरत है तो बस उन परिस्थितियों से कुछ सीखने की और आगे बढ़ने की। अपने अतीत को लेकर रोना और उन ज़ख़्मों को सहने का कोई मतलब नहीं है।

3. मैं स्वयं के लिए सहानभूति नहीं रखती क्योंकि मैं क्या हूँ और क्या कर सकती हूँ, मुझे पता है।

एक वक़्त ऐसा भी था जब मैं सोचती थी कि तमाम अस्वीकृतियों और बहिष्कार के लिए एकमात्र जिम्मेदार मैं ही हूँ। लेकिन अब और नहीं। मुझे पता है कि मैं क्या हूँ और किस लायक हूँ। इसलिए अब खुद पर दया करने जैसी कोई चीज नहीं है।

4. मैं दुनिया में हो रही बुरी घटनाओं से विकल नहीं होती क्योंकि मुझे अच्छाई देखना पसन्द है।

यह सच है कि इस दुनिया में कई स्थान रहने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। लेकिन मैं हर कड़ी के उज्जवल सिरे को देखने में विश्वास रखती हूँ।यहाँ बुरे लोग हो सकते हैं, लेकिन यहाँ लाखों की तादाद में अच्छे लोग भी मौजूद है। यहाँ विमान दुर्घटनाग्रस्त होते हैं, लेकिन हज़ारों विमान सुरक्षित भी उतरते हैं।

5. मैं बुरी खबरों की अनदेखी कर रहीं हूँ इसलिए नहीं कि मुझे कोई परवाह नहीं है।


मैं खबरें नहीं देखती और न ही नकारत्मक बातों पर ध्यान देती हूँ। इसका मतलब यह नहीं कि मैं समाज में हो रही घटनाओं से अनभिज्ञ हूँ। मुझे लगता है कि परिवर्तन नकारात्मक विचारों से नहीं, बल्कि अच्छाई से लाया जा सकता है। एक सकारात्मक रवैया बहुत कुछ बदल सकता है।

6. मुझे दूसरों से कोई ईर्ष्या नहीं है क्योंकि उन्हें प्रेरित करना मुझे पसन्द है।

हम सब यहाँ किसी न किसी उद्देश्य से हैं। मैं विश्वास रखती हूँ कि ईर्ष्या करना या एक दूसरे को नीचा दिखाना, इससे किसी का अच्छा नहीं होगा। अतः मुझे लोगों को सपने देखने और उन्हें पूरा करने का प्रोत्साहन देना अच्छा लगता है।

7. मैं लोगों के छोड़कर जाने के बारे में नहीं सोचती क्योंकि मैंने उन्हें अपने साथ बने रहने के कई कारण दिए हैं।

आप लोगों को अपनी ज़िन्दगी में, बिना पर्याप्त कुछ दिए स्थिर रूप से बने रहने की उम्मीद नहीं कर सकते। इसका मतलब यह नहीं आप पूरी तरह से खुद को उन्हें सौप दें। इसका तात्पर्य यह है कि अपने व्यक्तित्व का वो हिस्सा दे जो किसी को न दिया हो।

8. मैं अपनी ज़िन्दगी में निराशावादी लोगों का अफसोस नहीं करती क्योंकि लोगों को चुनते समय मैं एहतियात रखती हूँ।

जिन्हें आप अपनी ज़िंदगी में आने की अनुमति देते है, उनके चयन को लेकर शतर्क रहें। यह ज़रूरी है। हमारे आस-पास किस तरह के लोग हैं, यह हम पर बेहद प्रभाव डालता है। ये उनमें से होते हैं, जिनका सीधा असर हमारे दृष्टिकोण पर पड़ता है।

9. सोशल मीडिया वेबसाइट्स से मुझे असुरक्षा महसूस नहीं होती, क्योंकि मैं उन्हें उस तरह से नहीं देखती।

जब मैं सोशल मीडिया वेबसाइट्स पर पोस्ट करती हूँ, मैं उसके पीछे लगी नहीं रहती। सोशल वेबसाइट्स को लेकर मेरी सोच मात्र मेरे तक ही सीमित नहीं है। मैं पोस्ट करती हूँ, क्योंकि वह मुझे पसंद है, न की पोस्ट पर बड़ी संख्या में लाइक्स पाने के लिए।

10. मैं शर्मिंदा नहीं होती क्योंकि मैं अंगीकार करती हूँ।

मेरे पास वर्ष 2000 की कोई पुरानी तस्वीर हो सकती है, जिसे मैं अपने पास एक अच्छी और सुनहरी याद के रूप में सहेज कर रखूंगी। मैं तस्वीर लोगों को दिखाऊंगी भी। उन यादों को समेटकर कभी चेहरे पर मुस्कान भी आ जाया करेगी। मैंने अपनी कामयाबियों के साथ-साथ अपनी खामियों को भी स्वीकार कर लिया है।

11. मैं खुश हूँ क्योंकि मुझमें अहंकार नहीं है।

देखिये, मैं कोई भी चीज़ 50 बार लिख कर नहीं दे सकती, क्योंकि यह अत्यधिक हास्यास्पद है। सामने वाला अभिमानी हो जाएगा यह सोच कर मैं किसी की तारीफ़ करने से पहले दो बार नहीं सोचती। उनकी तारीफ़ करना उन्हें अच्छा लगता है और यहीं मेरे लिए पर्याप्त है।

12. मैं अपनी समस्याओं को लेकर चिंतित नहीं होती क्योंकि मैं समस्या मुक्त हूं।

मेरे मुताबिक चिन्ता केवल अराजकता को बढ़ावा देती है। मैं यह नहीं कह रही कि मैंने कभी इसका सामना ही नहीं किया है, लेकिन मैंने ज़िन्दगी के दूसरे छोर का चयन किया है। मैं अपनी समस्याओं को सुलझाने का काम करती हूँ। आशावादी, सकारात्मक पहलूओं पर बात करके खुद को प्रोत्साहित करती हूँ। निराशा आपको नीचे की ओर धकेलती है, जहाँ सिर्फ और सिर्फ असफलता हाथ लगती है।

Discussions



TY News