6 हजार साल पुरानी सभ्यता है काशी नगरी, IIT के अध्ययन में दावा

author image
7:24 pm 3 Mar, 2016

भगवान विश्वनाथ की नगरी काशी के बारे में आमतौर पर कहा जाता है कि इसे सदियों पहले बसाया गया था। अब एक विस्तृत अध्ययन में भी यह बात सामने आई है।

आईआईटी खड़गपुर ने अपने अध्ययन में दावा किया है कि वाराणसी का इतिहास करीब 6 हजार साल पुराना है। दुनिया की प्राचीन सभ्यताओं में एक सिन्धु घाटी की सभ्यता को इतना ही पुराना माना जाता है।

यह परियोजना पर आईआईटी के सात अलग-अलग विभाग एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। फिलहाल वैज्ञानिकों की टीम काशी में मानव सभ्यता के जन्म, विकास और इसके अलग-अलग कालखंडों का अध्ययन कर रही है।

टाइम्स ऑफ इन्डिया में प्रकाशित इस रिपोर्ट के मुताबिक, अध्ययनकर्ताओं की टीम ने वाराणसी शहर के अलग-अलग हिस्सों में करीब 100 मीटर की खुदाई की। इसके परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे।

खोजकर्ताओं की टीम को प्रमाण मिले हैं कि काशी में ईसा से 2 हजार साल पहले भी एक विकसित सभ्यता का वास था। खोजकर्ता मान रहे हैं कि यहां जो सूचनाएं मिल रही हैं, उसके मुताबिक, काशी का इतिहास ईसा से करीब 4500 पहले का हो सकता है। यहां के गोमती संगम इलाके को इस सभ्यता का सबसे पुराना हिस्सा माना जा रहा है।

बताया गया है कि आईआईटी खड़गपुर जल्द ही इस मामले में चौंका देने वाली घोषणा कर सकती है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, इस परियोजना को केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय मदद मुहैया करवा रहा है। यही नहीं, इस पर खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भी नजर टिकी हुई है। इस परियोजना में भूगर्भीय जांच में ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे की मदद भी ली जा रही है।

ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे ने वेदों और स्कन्दपुराण में वर्णित नैमिशारण्य (जंगल) का अस्तित्व स्वीकार किया है।


इस परियोजना के प्रमुख जॉय सेन कहते हैंः

“हम रोज कई आश्चर्यों का सामना कर रहे हैं। हम जिसे अब तक मिथक समझते थे, वह इतिहास के रूप में प्रतिष्ठित हो रहा है। यह हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।”

इस मामले में विस्तृत अध्ययन के लिए विशेषज्ञ कोलकाता – वाराणसी – प्रयाग तक गंदा नदी में एक जलमार्ग बना रहे हैं।

प्राचीन काल में लोग आवागमन के लिए इस रूट का इस्तेमाल करते थे, लेकिन सड़क और रेल यातायात की सुविधा होने के बाद इस जलमार्ग को भुला दिया गया।

Discussions



TY News