कश्मीर मे ‘देशभक्त’ इंजीनियरिंग छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज कितना जायज़ ?

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10:42 pm 6 Apr, 2016


 सबसे पहले इस तस्वीर को देखिए।

 

मार खाते साथियों की पीड़ा, जो चेहरे पर साफ झलक रही है। आंखों से बहते बेबसी के आंसू कई सवाल उठा रहे हैं। माथे पर पड़ी दहशत की लकीरों के पीछे क्या दास्तान है?

अगर आप सोच रहे हैं कि यह चेहरा याचना का है, तो ग़लत हैं आप। यह चेहरा उस कमज़ोर हिन्दुस्तान का है, जिसमें ‘भारत माता की जय’ बोलने पर डराया जाता है। यह चेहरा उस लाचार हिन्दुस्तान का है, जो भारत विरोधी नारे लगाने वालों के खिलाफ आवाज़ उठाने पर दबा दिया जाता है। और यह चेहरा है उस हिन्दुस्तान का है, जो शासन-प्रशासन के हाथों बर्बरता से पिटने के बाद, प्रश्नबोध से लज़्ज़ित है, की क्या वाकई भारत माता की जय बोलना सज़ा है?

यह तस्वीर सामने आई है, जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के NIT कैंपस से। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, ‘भारत-समर्थक’ चेहरा के नाम से।

NIT कैंपस जहां 31 मार्च को भारत-वेस्टइंडीज क्रिकेट मैच के बाद हुए पाकिस्तान ज़िंदाबाद नारे को लेकर, कश्मीरी और गैर-कश्मीरी छात्रों की झड़प हुई। पाकिस्तान जिन्दाबाज के विरोध में जब गैर-कश्मीरी छात्र शांतिपूर्वक धरना दे रहे थे, तभी पुलिस ने बर्बरता से लाठीचार्ज किया। इस घटना में 125 से अधिक छात्र बुरी तरह जख्मी हो गए।


सवाल यह नही है कि क्या यह तस्वीर भारतीय लोकतंत्र की वो तस्वीर पेश कर रहा है, जो महत्वाकांक्षी राजनैतिक बीमारी के कारण विकलांग हो गई है? सवाल यह है कि जो छात्र भारत के समर्थन में ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहे थे, वे उपद्रवी कैसे हो सकते हैं।

मान लेते हैं कि वो आवेश में होंगे, परंतु देश-विरोधी नारे लगाने वालों के प्रति पुलिस का दोगला रवैया क्या बताया है?

सवाल यह है कि जब वह तिरंगा लेकर शांति-पूर्वक धरना दे रहे थे, तब उनपर लाठी-चार्ज कर ध्वज क्यों छीना गया? सवाल यह है की JNU प्रकरण पर छाई रहने वाली मीडिया को सांप क्यों सूंघ गया है?

सवाल यह नहीं है कि यह चेहरा किसका है? सवाल यह है क्या वाकई इस देश में हिन्दुस्तानी बने रहना इतना मुस्किल है? यह चेहरा आपका मेरा या फिर उस हर इंसान का हो सकता है, जो हिन्दुस्तान से प्रेम करता है। फिर क्या सवाल यह है कि क्या यही चेहरा हिन्दुस्तान का है?

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