जानिए कैसे मौसम की मार से पीड़ित किसानों की किस्मत में मिठास भर रहे हैं आम

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5:21 pm 9 Sep, 2016


देश का किसान मानसून की विफलता, सूखा, कीमतों में वृद्धि, ऋण का अत्यधिक बोझ आदि परिस्तिथियों, समस्याओं के एक चक्र में फंस कर रह जाता है। ऐसे में एक संस्था ने इन लाचार किसानों की मदद के लिए आगे हाथ बढ़ाया है।

‘से ट्रीस’ नामक बेंगलुरू की एक संस्था आंध्र प्रदेश के ग्रामीण इलाक़ों में किसानों की ज़िंदगी ख़ास बनाने के लिए कुछ इस तरह से प्रयासरत है।

आंध्र प्रदेश से अनंतपुर जिले में रहने वाले मेदा मल्लइया पेशे से किसान हैं। उनके पास खेती के लिए आठ एकड़ जमीन है, जिस पर वह बाजरा, मूंगफली, दाल आदि जैसे मानसून आधारित फसलों की खेती करते हैं, लेकिन हर साल वर्षा के स्तर में आ रही गिरावट की वजह से उनके खेत बंजर हो गए। ऐसे में मेदा आजीविका व रोजगार के लिए बेंगलुरू की तरफ पलायन को बाध्य हो गए। बाद में, जब इस क्षेत्र में बारिश हुई, तब वह अनंतपुर में लौटे और अपनी जमीन पर और अन्य फसलों के साथ आम के पौधे भी लगाना शुरू कर दिए। आज वह आम बेचते हैं, जिससे उनकी ज़िंदग़ी खुशहाल हो गई है।

मेदा की ही तरह इस क्षेत्र के कई अन्य किसानों ने अपनी ज़मीन पर आम के पौधे लगाने शुरू कर दिए हैं।

‘से ट्रीस’ के संस्थापक कपिल शर्मा कहते हैंः

“भारत में किसानों को वित्तीय सहायता और जलवायु परिवर्तन की कमी जैसे विभिन्न मुद्दों की वजह से बहुत पीड़ित होना पड़ता है। अगर हम उन लोगों के साथ फलों के पेड़ लगाना शुरू करते हैं, तो यह न केवल उनके लिए आय का एक वैकल्पिक स्रोत बनेगा, बल्कि इससे इन क्षेत्रों में हरीयाली भी बढ़ेगी और जल स्तर में भी सुधार होगा।”

कपिल ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित ‘वर्ल्ड फॉरेस्ट्री कॉंग्रेस’ में भाग लिया है। जहां उन्होंने विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से अग्रोफॉरेस्ट्री के बारे में सुना जो कि मूल रूप से किसानों के साथ फलों के पेड़ रोपण के बारे में था। इसके बाद उन्होंने यह विचार भारत में लागू करने की सोची। पिछले साल शुरू हुई इस परियोजना के शुरुआती दौर में ‘से ट्रीस’ ने 11 किसानों को 4,000 पौधे प्रदान किए और साथ ही इन पेड़ों की देखभाल करने के लिए उन्हें प्रशिक्षित भी किया गया। इन पौधों पर मई तक नज़र भी रखी गया। शुरुआती सफलता के बारे में कपिल बताते हैंः 


“हमने पाया है कि  90% पौधे सुरक्षित थे। इस मॉडल के सफलता पूर्वक काम करने के बाद हमने और अधिक किसानों और पेड़ों को विस्तार करने का निर्णय लिया है।”

इस साल ‘से ट्रीस’ ने 13 किसानों के साथ 5,000 पौधे लगाए है और अगले दो हफ्तों में वे 10 किसानों के साथ 6,000 से अधिक पौधे लगाने की योजना बना चुके हैं, जिसमें औसतन, एक किसान से 300 पौधे लगवाए जाने का विचार है

इस संस्था की टीम किसानों के दृष्टिकोण, इसके काम करने के तरीके और इस मॉडल के लाभ के बारे में उनसे बातचीत करती है। इस योजना में रूचि रखने वाले किसानों को पौधे दिए जाते हैं।

मेदा मल्लइया से प्रभावित होकर कई किसान अपनी आजीविका को बेहतर करने के लिए इस संस्था से जुड़ रहे हैं।

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