1963 तक बंगाल के आश्रम में थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस, नाम था के. के. भंडारी ?

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2:05 pm 30 May, 2016


केन्द्र सरकार द्वारा जारी फाइलों से संकेत मिलता है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस वर्ष 1963 तक उत्तर बंगाल के एक आश्रम में के.के. भंडारी के छद्म नाम से रहते थे।

इस फाइलों से पता चलता है कि इस संबंध में शीर्ष स्तर पर बातचीत होती रही है।

हालांकि, नेताजी की मौत के रहस्य से पर्दा उठाने के लिए बनाए गए मुखर्जी आयोग ने इस बात को नहीं माना था कि भंडारी ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि मामले की शुरुआत शालमुरी आश्रम के सचिव रमानी रंजन दास के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को चिट्ठी लिखने से हुई।

इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय के टॉप सीक्रेट नोट में भी भंडारी के नाम का जिक्र हुआ। कई चिट्ठियों का आदान-प्रदान भी हुआ। हालांकि, यह साफ नहीं हो सका है कि आखिर किन वजहों से नेताजी से जुड़ी जांच के मामले में बार-बार भंडारी का नाम लिया जाता रहा।

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वर्ष 2000 में मुखर्जी आयोग के दबाव के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने भंडारी के मुद्दे से जुड़ी फाइलें मुखर्जी कमीशन को सौंपी थी।

उस दौर में जब लोगों को पता चला कि वर्ष 1963 में नेताजी कथित तौर पर शालमुरी आश्रम में रह रहे थे, तब हचलल मची थी। हालांकि, मुखर्जी आयोग का कहना था कि भंडारी नेताजी नहीं थे।

इसके बावजूद लोगों का मानना था कि के.के. भंडारी ही नेताजी थे।

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