यह मुसलमान चलाता है बूढी-बीमार गायों की गोशाला, करता है गोवंश की सेवा

6:27 pm 9 Mar, 2016

बीकानेर में रहने वाले हाजी मुहम्मद अतीक बूढ़ी और बीमार गायों के लिए गोशाला चलाते हैं। पेशे से शिक्षक हाजी अतीक की गोशाला में 200 से अधिक गायें हैं, जिनमें अधिकतर वृद्ध और बीमार हैं।

गोशाला में जानवरों के डॉक्टर की एक टीम इन गायों का बराबर ख्याल रखती है। यही नहीं, पिछले 8 साल से चल रही इस गोशाला के लिए कभी प्रचार नहीं किया गया।

हाजी अतीक कहते हैंः

गायों का ध्यान रखना मेरे लिए ऐसा ही है, जैसे अपनी मां का ख्याल रखना। गाय हिन्दुस्तान की साझा हिन्दू-मुस्लिम संस्कृति का प्रतीक है।


हाजी अतीक, जो मुस्लिम एजुकेशनल ऐंड वेलफेयर सोसायटी के महासचिव भी हैं, ने बताया कि गोशाला में रहने वाली गायों के लिए जोधपुर के लूनी तहसील से हर दिन ट्रक में भरकर हरा चारा लाया जाता है। यहां अधिकतर वे गायें हैं, जिन्होंने दूध देना बंद कर दिया है। ऐसी गायों को जब बेसहारा छोड़ दिया जाता है, तो गोशाला की टीम उन्हें यहां ले आती है। टीम के सदस्य शहर में अलग-अलग जगह हैं, जहां वे बेसहारा, बीमार और बूढ़ी गायों पर नजर रखते हैं।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, हाजी अतीक दोपहर की नमाज पढ़ने के बाद खुद गोशाला आते हैं और गायों को चारा खिलाते हैं।

यही नहीं, मुस्लिम एजुकेशनल ऐंड वेलफेयर सोसायटी नामक यह संस्था गायों को टीका लगाने और उनके इलाज में मदद करने का काम भी कर रही है। मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी परिसर के एक हिस्से में 56 एकड़ जमीन पर स्थित इस गोशाला के साथ-साथ हाजी अतीक यहां एक गाय शोध केंद्र भी विकसित करना चाहते हैं।

गोशाला को इस स्तर तक पहुंचाने में हाजी अली को बेहद मुश्किलों से गुजरना पड़ा है। मुस्लिम समुदाय के ही कुछ लोगों ने गोशाला खोलने पर आपत्ति दर्ज की थी। वहीं कुछ लोगों का आरोप था कि गोशाला के नाम पर गोमांस का व्यापार किया जा रहा है।

धीरे-धीरे लोगों की समझ में आया कि हाजी अतीक का यह निर्णय काबिले-तारीफ है।

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