पैरों से लाचार मां को पीठ पर लादकर 10-10 किलोमीटर सफ़र करता है यह बेटा

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9:38 pm 2 Jul, 2016


समाज के कुछ हिस्सों में बूढ़े माता-पिता को अपनी ही संतान पर बोझ समझा जाता है। इसी वजह से अक्सर ही हमें उनपर अत्याचार की ख़बरे मिलती ही रहती हैं, लेकिन उत्तरप्रदेश के एक बेटे की नेक-नीयत से जब आप रूबरू होंगे तो आपका भी दिल भर आएगा।

35 वर्षीय कमलेश मूलतः ग्वालियर के रहने वाले हैं और अक्सर ही वहां की सड़कों पर उन्हें अपनी लाचार मां को पीठ पर लादकर सफ़र करने का मार्मिक दृश्य देखने को मिल जाता है।

मां के लिए बेटे का यह प्यार जो भी देखता है वह भावुक हो जाता है। कमलेश की 70 वर्षीय मां विमला को घुटने में दर्द की शिकायत है। इस वजह से वह चल-फिर नहीं सकतीं।

यह बूढ़ी मां अपनी ज़िंदगी के आख़िरी पड़ाव में लाचारी झेल रही है। उनकी कमज़ोर होती आंखों की तकलीफ़ कमलेश से देखी नहीं गई। फिर उन्होने यह निर्णय लिया कि वह अपनी मां को कभी अकेला और बेबस महसूस नही होने देंगे।

कमलेश का अपनी मां के प्रति इस तरह का समर्पण आज मिसाल बन गया है।

मेहनत-मजदूरी करने वाले कमलेश के पिता का निधन बहुत पहले हो चुका है। कमलेश कहते हैं कि उनकी मां बिल्कुल अकेली पड़ गई थीं। आज चाहे कमलेश को अपने किसी रिश्तेदारी में जाना हो या मां के इलाज के लिए अस्पताल जाना हो, वह किसी गाड़ी का सहारा नहीं लेते। लगातार चार घंटे तक वह अपनी मां को पीठ पर लादकर 10 किलोमीटर का सफर तय कर लेते हैं।


कमलेश बताते हैं कि झांसी के सीपरी बाजार में उनकी रिश्तेदारी है। उन लोगों की सलाह पर मां का इलाज झांसी के मेडिकल कॉलेज में कराया जा रहा है।

यहां इलाज के लिए आने पर मां का रिश्तेदारों से भी मिलना हो जाता है। कमलेश के अनुसार, दूर का सफर वह बस या ट्रेन में बैठकर तय करते हैं। लेकिन पैसों की कमी की वजह से शहर में वह ऑटो या टैक्सी के बजाए मां को पीठ पर लेकर ही घूमते हैं। कमलेश गले में एक प्लास्टिक की क्रेट भी लटकाए रहते हैं। इसमें वह पान-मसाला रखते हैं, जिसे बेचकर वह कुछ आमदनी भी कर लेते हैं।

ऐसी संतान को मेरा सत्-सत् नमन।

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