अब सुप्रीम कोर्ट के जजों की बौद्धिक क्षमता पर सवाल उठाए जस्टिस काटजू ने

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2:32 pm 19 Sep, 2016


सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त जज जस्टिस मार्कन्डेय काटजू ने वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय के जजों की बौद्धिक क्षमता पर सवाल खड़े किए हैं।

अपने एक फेसबुक पोस्ट में जस्टिस काटजू ने कहा है कि वर्तमान समय में सुप्रीम कोर्ट के अधिकतर जजों का बौद्धिक स्तर बेहद कम है। अपने पोस्ट के माध्यम से काटजू ने आरोप लगाया कि अधिकतर जज अपनी योग्यता के कारण नहीं, बल्कि वरिष्ठता के नियम के चलते इतने ऊंचे पदों पर पहुंचे हैं।

अपने फेसबुक पोस्ट की शुरुआत कर जस्टिस काटजू लिखते हैं कि अब समय आ गया है जब भारतीयों को सर्वोच्च न्यायालय के अधिकतर जजों के बौद्धिक स्तर व बैकग्राउन्ड के बारे में बताया जाए।

जस्टिस काटजू लिखते हैंः

“जस्टिस चेलमेश्वर व जस्टिस नरिमन जैसे कुछ जज हैं जो अपने बौद्धिक स्तर व चरित्र दोनों ही मामलों में बहुत ऊपर हैं। लेकिन इनके अलावा सुप्रीम कोर्ट के अधिकतर जजों का बौद्धिक स्तर बेहद कम है। मैं ऐसा इसलिए कह सकता हूं क्योंकि मैं खुद साढ़े पांच साल तक सुप्रीम कोर्ट में जज था और इस दौरान मैं लगातार अपने सहकर्मियों से बातचीत किया करता था।”

काटजू लिखते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के जज अधिकतर क्रिकेट व मौसम के बारे में बातें किया करते थे। इन जजों के बातचीत में कभी बौद्धिक मसलों का जिक्र नहीं आता था।

काटजू लिखते हैंः

“मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के अधिकतर जजों को न्यायशास्त्र से जुड़े बड़े-बड़े नामों की जानकारी भी नहीं होगी। उन्हें यह भी नहीं पता होगा कि दुनिया भर में न्यायशास्त्रियों का क्या योगदान रहा है।”


अपने आरोपों को मजबूत करते हुए जस्टिस काटजू ने लिखा है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने के लिए कतार में खड़े जस्टिस दीपक मिश्रा बेहद कम उम्र में ओडिसा उच्च न्यायालय के जज बन गए थे। ऐसा उनके रिश्तेदार और भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंगनाथ मिश्रा की वजह से हो सका था।

यही नहीं, काटजू लिखते हैं कि रंगनाथ मिश्रा भारत के भ्रष्ट जजों में से एक थे। दूसरी तरफ उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने के लिए कतार में खड़े जस्टिस रमण की बात भी की।

उन्होंने लिखा है कि जस्टिस रमण अपने राजनैतिक संपर्कों के कारण आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जज बन गए। बाद में वह सुप्रीम कोर्ट के जज बन गए। ऐसा उनकी योग्यता के कारण नहीं, बल्कि वरिष्ठता के कारण हुआ था।

ये रहा जस्टिस काटजू का फेसबुक पोस्टः

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