निःस्वार्थ सेवा कर रहे हैं मोहित; लावारिस शवों का कराते हैं अंतिम संस्कार, गरीबों के हैं हमदर्द

5:52 pm 18 Oct, 2016


आज के समय में इंसानियत शब्द कहीं न कहीं विलुप्त होता नजर आ रहा है। गैरों की तो  छोड़िए, अपनों तक के साथ लोग गैरों की तरह बर्ताव करते हैं। हाल ही के दिनों हमने कितने किस्से सुने कि किस तरह एक बेटा अपनी मां को पीटता है। किस तरह से एक बहु अपनी सास को जान से मारने की कोशिश करती है या कैसे एक मरे हुए इंसान को कन्धा देने के लिए कोई नहीं होता। तो किसी को शमशान तक ले जाने के लिए एक एम्बुलेंस की व्यवस्था तक उपलब्ध नहीं होती। ये सब घटनाएं मानवता को शर्मसार करती हैं।  लेकिन आज भी कई ऐसे  हैं जो मानवता की लौ जलाए हुए निस्वार्थ भाव से अपने नेक कार्यों में लगे हुए हैं।

इसी कड़ी में हम यहां जिस शख्स की बात कर रहे हैं, उनका नाम है मोहित नरेन्द्र पठानिया। उन्हें गरीबों का मसीहा कहना गलत नहीं होगा।

हिमाचल प्रदेश के छोटे से जिले चम्बा से आने वाले मोहित ने समाज सेवा को परम कर्तव्य मानते हुए करीब साल भर पहले गरीब तबके के लोगों के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाए।

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अपने इस नेक कार्य की शुरुआत उन्होंने कार्यक्षेत्र जिला अस्पताल से की, जहां वह हर रविवार को मरीजों और उनके परिजनों को चाय-बिस्कुट दिया करते।

being chambyal

इस तरह से उनके एक प्रयास से कई लोग प्रभावित हुए, और उनके इन्ही नेक कामों में अपना भी विशेष योगदान देने के लिए आगे आते गए।

मोहित बताते हैंः

“मेरे पिता कहा करते थे कि सभी लोग अपने लिए जीया करते हैं, लेकिन दूसरों के लिए जीना एक कला है, जिसे भगवान के आशीर्वाद से निभाया जा सकता है। इसी दृढ़ सोच के साथ करीब साल भर पहले मैनें समाज सेवा के नेक काम को शुरू किया था।”

मोहित का प्रयास अब एक विस्तृत रूप ले चूका है। आज मोहित का बीइंग चंबयाल नामक संगठन है, जिसका मकसद गरीब लोगों की हरसंभव सहायता करना है। इनका यह संगठन गरीबों को न केवल आर्थिक मदद देता हैं, बल्कि लावारिस लाशों का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार भी करते हैं।

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गरीबों की मदद हेतु मोहित का संगठन तत्पर तो है ही साथ ही मोहित अब चंबा जिले की संस्कृति व कला से जुड़े स्थानीय लोगों को दुनिया  के समक्ष लाने की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि स्थानीय कलाकार, उनकी संस्कृति दुनिया तक पहुंच सके।

साभार: SUNO

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