रॉ (RAW) जासूसों के इन खुफिया कारनामों के आगे जेम्स बॉन्ड भी फेल है

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6:41 pm 30 Dec, 2015

बॉन्ड!… मैं हूँ जेम्स बॉन्ड! जब बॉन्ड अपना परिचय इस रोबीले अन्दाज में कराता है, तो जी करता है, काश! हमारी भी ज़िंदगी इतनी ही रोबदार होती। हर कदम पर अंज़ान पहेलियों की गुत्थियां, आश्चर्य से भरा सफ़र, रफ्तार, जोखिम और हर जोखिम से लड़ कर पहेलियों को सुलझा लेने का ज़ज़्बा।

खैर ये बात तो हो गई बचपन के सपने की और हमारे सपनों को हवा देने वाले फ़िल्मों की। पर आज मैं जिसकी बात करने जा रहा हूं, यह वे कारनामें हैं, जिनको भारत के रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) ने मुश्किल परिस्थितियों में भी कर दिखाया और दुनिया का एक विश्वनीय खुफिया एजेंसी बन गया। आइए एक नज़र डालते हैं, रॉ के बेहद खुफिया कारनामों पर ।

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ऑपरेशन लीच

वर्ष 1998 में भारत- बर्मा सीमा रॉ की मदद से एक सशस्त्र ऑपरेशन शुरू किया गया। इसका नाम दिया गया, ऑपरेशन लीच। दक्षिण एशिया में प्रमुख देश के रूप में उभर रहे भारत हमेशा से लोकतंत्र को बढ़ावा देने की कवायद करता रहा है। इसी कड़ी में रॉ ने बर्मा में मौजूद विद्रोही समूहों को सहायता प्रदान करने का काम किया। इन विद्रोही समूहों में काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी (केआइए) सबसे अधिक सक्रिय था। शुरू के दिनों में भारत ने परोक्ष रूप से केआइए को अनुमति दी की वह भारतीय सीमा में व्यापार बढ़ा सकता है। इस गुट को संभवतः हथियार भी प्रदान किए गए थे।

लेकिन समय बीतने के साथ ही भारत और बर्मा के संबंधों में सुधार हुआ। वहीं दूसरी तरफ केआइए पूर्वोत्तर में भारत-विरोधी गतिविधियों में लिप्त हो गया। इसी क्रम में भारत ने बर्मा की मदद से ऑपरेशन लीच की शुरुआत की और विद्रोहियों का सफाया कर दिया।

 

स्नैच ऑपरेशन


रॉ के इस ऑपरेशन के बारे में दुनिया को पता भी नहीं चलता, अगर खोजी पत्रिका ‘दी वीक’ ने इसके बारे में प्रकाशित नहीं किया होता। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत के दो शीर्ष खुफिया संस्थान रॉ और आईबी ने नेपाल, भूटान और बांग्लादेश में चार सौ से अधिक ठिकानों पर दबिश देकर लश्कर के कई आतंकवादियों का खात्मा किया था। रिक महमूद और शेख अब्दुल ख्वाजा जैसे ये आतंकवादी मुम्बई हमलों में शामिल बताए गए थे।

 

स्माइलिंग बुद्धा

1974 में रॉ ने भारत के पहले परमाणु परीक्षण की गोपनीयता बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह वास्तव में बेहद खुफिया और गुप्त मिशन था। यहां तक चीन और अमेरिका जैसे देशों की खुफिया एजेंसियों को भी भारत में चल रहे इस परीक्षण के बारे में पचा नहीं चल सका था।

 

ऑपरेशन सिक्किम

भारत की आजादी के बाद भी सिक्किम इससे अलग था। 1972 में इंदिरा गांधी ने रॉ को इस बात की जिम्मेदारी दी कि सिक्किम अधिकृत रूप से भारतीय लोकतंत्र का हिस्सा बन जाए। यह रॉ का ही प्रयास था कि इसके ठीक तीन साल बाद 26 अप्रैल 1975 को सिक्किम भारतीय संघ का 22वां राज्य बन गया।

ऑपरेशन चाणक्य

ऑपरेशन चाणक्य रॉ द्वारा कश्मीर में किया गया बहुत ही महत्वपूर्ण मिशन था। यह ऑपरेशन विभिन्न आईएसआई समर्थित कश्मीरी अलगाववादी समूहों के घुसपैठ पर पकड़ बनाने और कश्मीर घाटी में शांति बहाल करने के लिए किया गया था।

रॉ ने ही घुसपैठ की खुफिया जानकारी एकत्र की थी। इसके अलावा रॉ ने यह भी साबित किया था की आईएसआई द्वारा कश्मीरी अलगाववादी समूहों को प्रशिक्षण और धन मुहैया कराया जा रहा है। रॉ आईएसआई और अलगाववादी समूहों के बीच संबंधों को उजागर करने में ही नहीं, बल्कि कश्मीर घाटी में हो रहे घुसपैठ और आतंकवाद को निष्क्रिय करने में भी सफल रहा था।

रॉ को कश्मीर घाटी में पनप रहे हिज्ब -उल-मुजाहिदीन में दरार पैदा करने के लिए भी श्रेय दिया जाता है।

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