बेफिक्र हो शन्नो चलाती है दिल्ली की सड़कों पर टैक्सी, साथ में कर रही है 12वीं की पढ़ाई।

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11:31 am 3 Jan, 2016

जहां एक तरफ दिल्ली महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज़ से सुरक्षित नहीं मानी जाती, वहीं दूसरी ओर दिल्ली की एक महिला इन सब बातों से बेफिक्र होकर हाथों में स्टीयरिंग संभाले रोज़ अपनी टैक्सी में दर्जनों यात्रियों को उनकी मंज़िल तक पहुंचाती है।

38 साल की शन्नो, जब अपनी टैक्सी लिए सड़कों पर निकलती है तो लोग उसे अचंभित होकर देखते हैं। हमारे समाज में कई ऐसे रूढ़िवादी हैं जो महिलाओं के इस तरह काम करने को सही नहीं मानते। इसी सोच को दरकिनार कर शन्नो ने बिना किसी की फिक्र किए अपने इस काम को जारी रखा है।

जहां आस-पास के टैक्सी ड्राइवर्स और अन्य रिक्शा चालक उन्हें हैरानी के साथ देखते हैं, तो वहीं कई उनके इस कदम की सराहना भी करते है। खास बात यह है कि शन्नो टैक्सी तो चला ही रही हैं, इसके साथ ही साथ 12वीं की पढ़ाई भी कर रही हैं। वह अपने तीन बच्चों की शिक्षा को लेकर भी सचेत हैं।


करीब 10 साल पहले शन्नो के पति का देहान्त हो गया था। इसके बाद घर की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई, लेकिन शन्नो टूटने वालों में से नहीं थी। परिवार का खर्च उठाने, अपने तीन बच्चों की अच्छी परवरिश और शिक्षा के लिए शन्नो ने सबसे पहले आज़ाद फाउंडेशन से ड्राइविंग सीखी और फिर इसी फाउंडेशन के साथ तीन सालों तक काम किया। अब शन्नो पिछले 6 महीनों से ओला के लिए दिल्ली-एनसीआर में कैब चला रही है।

दिल्ली में टैक्सी चलाते हुए शन्नो को करीब 4 साल हो गए हैं और वह अपने इस काम से खुश है। अब वह अपने परिवार की मूल आवश्यकताओ को पूरा करने में सक्षम है। आपको बता दें कि शन्नो आमिर खान के लोकप्रिय कार्यक्रम सत्यमेव जयते में भी नज़र आ चुकी हैं। भारत में महिला ड्राइवर्स की संख्या न के बराबर है, लेकिन पिछले कुछ सालो में यह तस्वीर बदली है। कुछ  टैक्सी कंपनियों जैसे ओला, सखा, वीरा, प्रियदर्शनी ने इस पहल को एक मजबूत शुरुआत दी है।

अगर हम पूरी दुनिया में महिला ड्राइवर की संख्या पर नज़र डालें तो यह आकंड़ा कम ही नज़र आता है। अमेरिका के आकंड़ों पर गौर करें तो वहां केवल 2 प्रतिशत ही महिला ड्राइवर्स हैं। वहीं न्यूयॉर्क, लंदन,  बीजिंग में कैब बुक कराने पर पुरुष ड्राइवर ही आता है। न्यूयॉर्क में महिला ड्राइवरों का अनुपात 50,000 टैक्सी ड्राइवरों में से केवल 1 प्रतिशत का है।

कंपनियों द्वारा उठाया गया यह कदम वाकई काबिलेतारीफ है, लेकिन इसके साथ-साथ जिन कंपनियों ने इस अनूठी पहल की शुरुआत की है, उन्हें इन महिला ड्राइवर्स की सुरक्षा को लेकर भी कड़े इंतज़ाम करने ज़रूरी हैं।

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