करवाचौथ के दिन शहीदों की पत्नियों ने कहा- वो हमेशा अमर रहेंगे


“पति ने देश के लिए कुर्बानी दी है और शहीद अमर होते हैं। भले ही वे आज दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके पति अमर हैं और उनकी याद में वह हमेशा करवाचौथ का व्रत रखती हैं।”

दिलीप थाकन की वीरांगना सुनीता किसी सुहागन की तरह जब सज-संवर कर अपने शहीद हुए पति के लिए यह पवित्र प्रेम का व्रत रखती तो इस पवित्र अहसास के त्योहार में चार चांद लग जाता है।

दिलीप थाकन की वीरांगना सुनीता करवा चौथ की पूजा करते हुए। dainikbhaskar

दिलीप थाकन की वीरांगना पत्नी सुनीता करवा चौथ की पूजा करते हुए। dainikbhaskar

देश को सर्वाधिक शहीद देने वाली राजस्थान के झुंझुनूं जिले की पावन धरती पर करवाचौथ मनाने के एक अलग ही परंपरा है। यहां देश के लिए अपनी जान दे देने वाले सैनिकों की पत्नियां भी बहुत उल्लास से करवाचौथ का त्योहार मनाती हैं।

झुंझुनूं जिले में ऐसी सैकडों वीरांगनाएं मिल जाएंगी, जिन्होंने अपने पति को देश के लिए कुर्बान कर दिया, लेकिन आज भी उनके लिए उनके शहीद पति जिंदा हैं।

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चौथ पूजा की तैयारी करते हुए सुनीता। dainikbhaskar


झुंझुनूं के अणगासर के शहीद दिलीप थाकन की वीरांगना सुनीता हो, विजय पाल ढाका की वीरांगना हो या फिर शहीद धर्मपाल की वीरांगना कमलेश। सभी अपने शहीद पति की याद मे करवा चौथ का व्रत रखती हैं। इस बार भी सभी ने पूरी शिद्दत के साथ प्रेम पवित्र का यह अटूट व्रत निभाया।

ऐसे करती हैं करवा चौथ की पूजा

सभी वीरांगनाएं सबसे पहले अपने पति के तस्‍वीर की पूजा आस्था से करती हैं और करवा चौथ की कहानी सुनती हैं। रात में छलनी से चांद के बाद पति के तस्‍वीर का दीदार करती हैं। सुहाग को देश के लिए कुर्बान करने वाली वीरांगनाओं ने करवा चौथ का व्रत रखकर एक नई मिसाल पेश की है।

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