मिलिए 97 साल के ‘मार्शल अर्जन सिंह’ से, जिनके दम पर भारतीय वायुसेना को कोई हरा नहीं सका

author image
11:37 am 23 Apr, 2016


पाकिस्तान के साथ 1965 की लड़ाई में वायुसेना का नेतृत्व करने वाले भारतीय वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह 97 वर्ष के हो चुके हैं। वह इस समय देश के इकलौते फाइव-स्टार सैन्य अधिकारी हैं।

न जाने कितने ही युद्ध देख चुके अर्जन सिंह की आंखें आज भी वैसे ही चमकती हैं, जैसे पहला युद्ध लड़ रहे किसी जवान का। जब अधिकारियों, साथियों और अन्य लोगों से मिलते हैं तो वही गर्मजोशी और आत्मविश्वास रहता है, जैसे अभी भी रगों में दुश्मन के छक्के छुड़ा देने का हौसला नस-नस में भरा हो।

मार्शल अर्जन सिंह अजेय रहे। उनकी कूटनीति और रणनीति से वायुसेना को कभी हार का मुंह नही देखना पड़ा। किसान-पुत्र होने के कारण उनको देश की मिट्टी से यह प्रेम ही था, जो मात्र 19 वर्ष की उम्र में उन्हें आरएएफ क्रैनवेल में एम्पायर पायलट प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के लिए चुन लिया गया। और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नही देखा। उन्होंने अपनी उड़ान के साथ भारतीय वायुसेना को उस शिखर पर पहुंचाया की आज वह नौजवानो के लिए मिसाल बन चुके हैं।

देश में पांच स्टार वाले तीन सैन्य अधिकारी रहे हैं, जिनमें से फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और फील्ड मार्शल के एम करियप्पा अब जीवित नहीं हैं। भारतीय सेनाओं के ग्रैंड-ओल्ड मैन कहे जाने वाले और मार्शल ऑफ एयरफोर्स, अर्जन सिंह के सम्मान में पश्चिम बंगाल के पानागढ़ एयरबेस को ‘अर्जन सिंह एयरबेस’ नाम दिया गया है।

अनुशासन को अपना अंग मानने वाले मार्शल अर्जन सिंह खुद के चार सिद्धांत हैं। उनका मानना है कि इनको अमल कर के एक आदर्श व्यक्ति बना जा सकता है। अर्जन सिंह कहते हैंः

“अपने पेशे के प्रति ईमानदार रहो अपने कार्य का निवर्हन इस तरह करो कि सभी उससे संतुष्ट हों, साथ में अपने अधीनस्थ पर विश्वास रखो और आख़िरी लक्ष्य हासिल करने के लिए ईमानदार और गंभीर प्रयास करो। अगर इन सिद्धांतों पर आप चलते हैं तो आप कभी भी ज़िंदगी में गलती नहीं कर सकते।”

मार्शल अर्जन सिंह का जन्म 15 अप्रैल 1919 को लायलपुर (अभी फैसलाबाद,पाकिस्तान) में हुआ था और उन्होंने अपनी शिक्षा मोंटगोमरी (अभी साहिवाल, पाकिस्तान) में पूरी की। वह 19 वर्ष की उम्र में पायलट ट्रेनिंग कोर्स के लिए चुने गए। वर्ष 1944 में उन्होंने अराकन अभियान और इमफाल अभियान में स्कवाड्रन लीडर के तौर पर अपने स्कवाड्रन का नेतृत्व किया। उनके कुशल नेतृत्व के लिए उन्हें विशिष्ट फ्लाइंग क्रॉस से सम्मानित किया गया। आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को मार्शल ने वायु सेना के सौ से भी अधिक विमानों के लाल किले के उपर से फ्लाई -पास्ट का भी नेतृत्व किया।

newsbharati

newsbharati


वायु सेना प्रमुख बनाए जाने के समय उनकी उम्र बमुश्किल 44 साल थी और आजादी के बाद पहली बार लडाई में उतरी भारतीय वायुसेना की कमान उनके ही हाथ में थी। अपने कुशल नेतृत्व और दृढता के साथ स्थिति का सामना करते हुए भारत की विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मार्शल की प्रशंसा करते हुए तत्कालीन रक्षा मंत्री वाई बी चव्हाण ने कहा थाः

“एयर मार्शल अर्जन सिंह हीरा हैं, वह अपने काम में दक्ष और दृढ़ होने के साथ सक्षम नेतृत्व के धनी हैं।“

indiastrategic

तत्कालीन रक्षा मंत्री वाई बी चव्हाण के साथ मार्शल अर्जन सिंह indiastrategic

विंग कमांडर बनने के बाद वह रॉयल स्टाफ कॉलेज ब्रिटेन में प्रशिक्षण के लिए गए। ग्रुप कैप्टन के तौर पर उन्होंने अंबाला क्षेत्र की कमान संभाली। एयर कमोडोर बनने के बाद उन्हें एक संचालन बेस का प्रमुख बनाया गया, जो बाद में पश्चिमी वायु कमान के नाम से जाना गया। चीन के साथ 1962 की लडाई के बाद 1963 में उन्हें वायु सेना उप प्रमुख बनाया गया।

एक अगस्त 1964 को जब वायु सेना अपने आप को नई चुनौतियों के लिए तैयार कर रही थी, उस समय एयर मार्शल के रूप में अर्जन सिंह को इसकी कमान सौंपी गई। वह पहले ऐसे वायु सेना प्रमुख हैं, जिन्होंने इस पद पर पहुंचने तक विमान उड़ाना नहीं छोड़ा था और अपने कार्यकाल के अंत तक वह विमान उड़ाते रहे। अपने कई दशकों के करियर में उन्होंने 60 प्रकार के विमान उड़ाए, जिनमें द्वितीय विश्व युद्ध से पहले के तथा बाद में समसामयिक विमानों के साथ-साथ परिवहन विमान भी शामिल हैं।

पाकिस्तान के खिलाफ लडाई में उनकी भूमिका के बाद वायु सेना प्रमुख के रैंक को बढाकर पहली बार एयर चीफ मार्शल किया गया। उन्हें नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया। सेवानिवृत होने पर उन्हें स्विटजरलैंड का राजदूत बनाया गया। वायु सेना में उनकी सेवाओं के लिए सरकार ने उन्हें जनवरी 2002 में वायु सेना के मार्शल के रैंक से नवाजा। यह उपलब्धि पाने वाले वह वायु सेना के एक मात्र अधिकारी हैं।

टॉपयप्स की टीम उन्हें सैल्यूट करती है। उनके आने वाले शानदार जीवन के लिए शुभकामनाएं। जय हिंद!

Popular on the Web

Discussions



  • Viral Stories

TY News