पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार की वापसी के मायने

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11:56 am 19 May, 2016


पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजे आ चुके हैं। इसके साथ ही यह भी साफ हो गया है कि यहां ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस दोबारा सरकार बनाने जा रही है।

हम यहां उन 7 बड़ी वजह का जिक्र करने जा रहे हैं, जिनसे ममता की सत्ता में वापसी का रास्ता साफ हो सका है।

1. माओवादियों का खात्मा

वर्ष 2011 में पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद ममता बनर्जी ने माओवादियों और नक्सली गतिविधियों को पूरी तरह खत्म करने पर ध्यान दिया।

ममता बनर्जी के नेतृत्व में लालगढ़ और सिंगूर में चलने वाले आंदोलनों के दौरान उन पर आरोप लगाए गए थे कि उन्हें माओवादियों का समर्थन मिल रहा है, लेकिन सत्ता में आने के तुरंत बाद, ममता ने नक्सलियों को जड़ से उखाड़ फेंका।

मुठभेड़ में माओवादी नेता किशनजी की मौत से माओवादियों को यह संदेश गया कि बंगाल में अब उनके दिन लद गए हैं।

2. जंगलमहल में विकास

वामपंथियों के 35 सालों के शासन के दौरान पश्चिम बंगाल के जंगलमहल इलाके को विकास से पूरी तरह मरहूम रखा गया था। इस इलाके में न तो सड़क का नामोनिशान था, पेयजल की व्यवस्था।

यही वजह है कि यहां माओवादियों को अपनी पैठ बनाने का मौका मिला। ममता बनर्जी ने यहां न केवल सड़कें बनवाईं, बल्कि अस्पताल और स्कूल शुरू करने पर भी ध्यान दिया।

अब जंगलमहल के तीन जिलों पुरुलिया, मेदिनीपुर बांकुड़ा में हर ब्लॉक सड़क से जुड़ गया है। इस क्षेत्र में नए डिग्री कालेज खुले हैं।

हर ब्लॉक में छात्रावास बने हैं। माध्यमिक, उच्चतर माध्यमिक की सैकड़ों आदिवासी छात्राओं को साइकिल उपलब्ध कराई गईं और हजारों आदिवासी नौजवानों की जूनियर पुलिस के रूप में भर्ती की गई।

3. गोरखालैंड की समस्या का समाधान

पिछले कई दशक से गोरखालैंड का मसला केन्द्र और राज्य की सरकारों के लिए सिरदर्द बना हुआ था। वायदे के मुताबिक, सरकार में आने के सिर्फ 100 दिनों के भीतर ममता ने इस समस्या का निदान कर दिया।

ममता किसी भी स्थिति में दार्जिलिंग, कर्सियांग और कलिम्पोंग के पहाड़ों को बंगाल से अलग नहीं होने देना चाहतीं थीं। उन्होंने बीच का रास्ता निकाला।

अलग राज्य के लिए आन्दोलन कर रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा को अधिक अधिकार दिए और मिलजुलकर इस इलाके में विकास की बयार बहाने का वायदा किया।

यही वजह है कि अब यह इलाका पूरी तरह शांत है और एक बार फिर यहां पर्यटन उद्योग विकास की तरफ अग्रसर है।


4. कन्याश्री योजना की व्यापक सफलता

पश्चिम बंगाल में करीब 27 लाख लड़कियों का पंजीकरण ममता बनर्जी की महात्वाकांक्षी कन्याश्री योजना के तहत करवाया गया है।

वर्ष 2012 में शुरू की गई इस योजना के तहत स्कूल और कॉलेज जाने वाली लड़कियों को राज्य सरकार आर्थिक मदद देती है। उन्हें प्रमाणपत्र दिए जाते हैं, जिससे भविष्य में नौकरी या रोजगार हासिल करने में सुविधा होती है।

5. उद्योग जगत का विकास

सिंगूर से टाटा के विदा लेने के बाद कहा जा रहा था कि ममता बनर्जी की सरकार उद्योग विरोधी होगी। लेकिन सरकार में आने के बाद तृणमूल ने राज्य में उद्योगों के विकास के लिए बड़े पैमाने पर योजनाएं बनाईं।

यह कहना अतिश्योक्ति नहीं है कि बंगाल में उद्योग को लेकर निराशा वाम शासनकाल में अधिक थी। ममता बनर्जी इस निराशा को एक हद तक दूर करने में कामयाब रही हैं।

जी समूह से लेकर जिन्दल तक पश्चिम बंगाल में निवेश की संभावना तलाश रहे हैं। बंगाल सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, करीब 50 हजार करोड़ रुपए से अधिक का निवेश इसी साल उत्तरार्ध तक होने की संभावना है।

6. स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार

वर्ष 2011 में ममता बनर्जी ने जिस दिन मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किया, उसी दिन उन्होंने कोलकाता शहर में करीब 10 से अधिक सरकारी अस्पताओं का औचक निरीक्षण भी किया।

सरकार में आने के 100 दिनों के भीतर ममता ने सरकारी अस्पतालों का हुलिया बदल दिया। हालांकि सुधार की गुंजाइश अब भी है। पिछले पांच साल में राज्य के अलग-अलग इलाकों में करीब 25 से अधिक सरकारी मल्टीस्पेसलिटी अस्पताल खोले गए हैं।

7. अल्पसंख्यकों का कल्याण

वाममोर्चा के आखिरी कार्यकाल के मुकाबले, ममता बनर्जी की सरकार के कार्यकाल के दौरान अल्पसंख्यक मामलों के बजट आवंटन में पांच गुना से अधिक बढोत्तरी की गई।

वित्त वर्ष 2016-17 के बजट में राज्य के वित्तमंत्री अमित मित्रा ने माइनरिटी अफेयर्स डिपार्टमेन्ट के लिए 2500 करोड़ रुपए का प्रस्ताव रखा।

यही नहीं, 97 फीसदी से अधिक मुस्लिम आबादी को अन्य पिछड़ा वर्ग के रूप में मान्यता दी गई है। उन्हें न केवल उच्च शिक्षा, बल्कि सरकार नौकरियों में भी आरक्षण मिल रहा है।

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