इन 12 कारणों से दुनिया आज भी याद करती है महात्मा गांधी को

5:21 pm 8 Apr, 2016


आज की दुनिया रफ़्तार और इन्टरनेट की दुनिया है, लेकिन महात्मा गांधी के वचन आज भी उसी तरह सचाई की कसौटी पर खरे उतर रहे हैं जैसे कि उनके जीवनकाल में। 68 साल पहले लिखी गई वे बातें आज 2016 में भी उतनी ही सच हैंं।

हम यकीन के साथ कह सकते हैं कि गांधी जी आज भी कही दूर स्वर्ग में बैठे कोई न कोई नया प्रयोग जरूर कर रहे होंगे। किसी ने सच ही कहा है कि महान व्यक्ति समाज को एक नई दिशा दिखाने के लिए ही पैदा होते हैं और गांधी जी उनमें से एक हैं।

1. खुद वह बदलाव बनिए, जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।

आज की इस दुनिया में सबकुछ डिजिटल है और बदलाव लाने की ताक़त केवल एक क्लिक दूर है। सालों से हम जहां एक-दूसरे पर दोष लगाने के अादी हो चुके थे, अब हर कोई वह बदलाव बन सकता है, जो वह दुनिया में देखना चाहता है।

1

2. जियो जैसे कि तुम कल मरने वाले हो। ऐसे सीखो कि तुम हमेशा के लिए जीने वाले हो।

महात्मा गांधी की यह बात तो शायद सबसे ज़्यादा हमारे युवाओं पर असर कर रही है। हमारी जेनरेशन यह खूब अच्छी तरह से जानती है कि जीवन के हर पल को इस तरह जीना है जैसे कि हर दिन जिन्दगी का आखिरी दिन हो।

अपने कंधों पर बैग लिए दुनिया के कोने-कोने को जानने का जज़्बा लिए आज हर एक युवा अपनी मंज़िल की तलाश में यात्रा करता मुसाफिर है। भले ही पैसे की कमी, इन बढ़ते कदमों को रोकने की कोशिश करती है, लेकिन अनुभवों के सामने और किसी चीज का मोल नहीं।

3. मै किसी को गंदे पैरों के साथ अपने दिमाग से नही गुजरने दूंगा।

जैसा की गांधी जी ने कहा था कि भले ही इस कलयुग में असत्य बातें सुनाई पड़े, लेकिन हमारे चारों ओर सकरात्मक सोच और ऊर्जा हमेशा मौजूद रहती है।

नकारात्मक और बुरे विचारों को दूर रखना बहुत ज़रूरी है। हमारा दिमाग वह भूमि है, जहां विचारों के बीच कर्म-फल के रूप में पनपते हैं, इसलिए अपने दिमाग को हमेशा सुंदर और अच्छे विचारों से ही सींचना चाहिए।

4. आंख के बदले आंख से केवल पूरी दुनिया में अंधे रह जाएंगे।

बदले की भावना केवल और केवल आतंक और लड़ाई को ही जन्म देती है। हम खून का बदला खून से और नफ़रत का बदला नफ़रत से ही लेते हैं। अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान पर आतंकवाद के विरोध में जो हमला किया, उसका परिणाम सामूहिक विनाश नहीं तो और क्या था।

इन सब से आखिरकार क्या हासिल हुआ? कुछ राजनीतिक लाभ के कारण हमनें मानवता को ही खतरे में डाल दिया है। चाहे वह अमेरिका का हो, या अफगानिस्तान का, इन्सान आखिर इन्सान ही होता है।

5. जब मै दुःखी होता हूं, तो इस बात को याद करता हूं कि सच्चाई और प्रेम की हमेशा ही जीत हुई है।

दुनिया में न जाने कितने ही तानाशाह और खूनी पैदा हुए, जो उस समय अजेय लगते थे, लेकिन समय के साथ आखिरकार उनका भी पतन हो गया। हिटलर भी अजेय लगता था, लेकिन उसका भी पतन हुआ। जॉर्ज बुश अपने समय में सबसे अधिक कट्टर अमेरिकी राष्ट्रपति थे, लेकिन उनको बराक ओबामा ने पीछे हटाया।

कोई भी न हमेशा के लिए टिका है और न टिकेगा। सत्य यही है और इस सत्य को ध्यान में रखते हुए दुःखी होना व्यर्थ है। शांति अपना रास्ता तलाश कर ही लेती है।

6. व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है, वह जो सोचता है वही बन जाता है।

युद्ध, ग्लोबल वार्मिंग और दुनिया का अंत जैसे अनेकों और खतरे हमारे ऊपर मंडरा रहे है। लेकिन फिर भी सब कुछ ठीक लगता है, क्योंकि हमारे विचार हर घड़ी इन खतरों से लड़ने के लिए कुछ न कुछ समाधान निकालते ही रहते हैं।

वह समय भी था, जब हम इन चीज़ों के बारे में जानते तक नहीं थे, लेकिन आज हम इनसे लड़ने के लिए भी तैयार हैं। हमारा दिमाग उसमे दौड़ते करोड़ों विचारों के साथ इस दुनिया को बेहतर बनाने के लिए हमेशा काम कर रहा है।

7. एक देश की महानता और नैतिक प्रगति को इस बात से आंका जा सकता है कि वहां जानवरों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है।

उस राष्ट्र में जहां गाय को पूजा जाता हो, यह बर्दाश्त करना मुश्किल है कि वहां भारी संख्या में गायों का कत्ल किया जाता है। एक अतुल्य भारत का निर्माण तब तक संभव नहीं है, जब तक हम नैतिक मूल्यों को मजबूत नहीं करते। नैतिकता ही देश और मनुष्य का आधार है।


8. पृथ्वी सभी मनुष्यों की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराती है। लालच पूरा करने के लिए नहीं।

तेजी से बदलते वातावरण ने सबके लिए खतरे की घंटी बजा दी है। अब हमें एक संतुलित विकास की जरूरत है।

एक युग था, जब बड़े-बड़े कारखानों ने धरती के गर्भ से सभी खनिज और अन्य मूल्यवान चीजों को निकाल बाहर फेंका था। उस युग में धरती का जो नुकसान हुआ, उसकी वजह से आने वाली पीढ़ियां खतरे में पड़ सकती हैं। इसलिए हमेशा लालच से नहीं, जरूरत से चलें।

9. दुनिया में बहुत लोग हैं, जो इतने भूखे हैं कि भगवान उनके सामने केवल खाने के रूप में ही आ सकते हैं।

भारत का धर्म से बड़ा गहरा रिश्ता है। धर्म लोगों को एक स्थाई पहचान देता है। कम्युनिस्ट दौर में लोगों को जब तक खाना मिलता रहता था, उन्हें इस बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ता था कि कोई हिन्दू है या मुस्लमान।

इस बात को समझने की जरूरत है कि धार्मिक तनाव का कारण कहीं न कहीं गरीबी और भुखमरी से जुड़ा है। धर्म एक निजी वस्तु होता, अगर लोगो का अस्तित्व उसपर निर्भर नहीं होता।

10. अगर मुझमें मज़ाक करने की ख़ासियत नहीं होती, तो मैंने कब की आत्महत्या कर ली होती।

इस दुनिया में एक तो हर चीज पर, हर व्यक्ति पर प्रतिबंध लगा दिया जा रहा है। लोग बड़ी जल्दी ही खिन्न हो जाते हैं। किसी ने सच ही कहा है कि सबसे बढ़िया तरीका अगर कोई है, इस दुनिया की दिक्कतों को हल करने का, तो वह है, उन दिक्कतों को एक मजाकिया लहजे में उजागर करना।

अगर कोई अपने समय का सबसे प्रगतिशील राजनेता ऐसा बोलता है, तो हमारे आज के राजनेताओं को इस बात पर खास ध्यान देना चाहिए।

11. मानव के रूप में हमारी महानता दुनिया को बनाने से कहीं ज्यादा स्वयं अपने आप को बनाने में है।

सदियों से चले आ रहे इस कथन में कि हमें दुनिया को बदलने की जरूरत है, ज्यादा दम नहीं नजर आता। खासकर जब मीडिया ने हमारे सामने ज्ञान का एक समुन्दर खोल दिया है, ताकि उस ज्ञान के समुन्दर में डूबकर हम अपना पुर्ननिर्माण कर सकें।

हम सदियों से उन विचारों के गुलाम रह चुके हैं। अब गांधी के इन वचनों का महत्व समझते हुए, असल अर्थ को हासिल करना अनिवार्य है।

12. किसी भी चीज का प्रचार मत करो।

गुलाब को यह जरूरत नहीं है कि वह अपनी खुशबू का प्रचार करे। वह बस खुशबू देने का काम करता है। और लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं। केवल जीवन जीएं और लोग खुद आपके जीवन का श्रोत खोजते हुए आपके पास आएंगे।

गांधी जी केवल एक नेता थे, प्रचारक नहीं। आज की इस दुनिया में जहां इन्सान अपने आप से इतना प्रेम करता है कि हज़ारो सेल्फी खींच डालता है और प्रसिद्ध होने के तमाम साधन है, जैसे की ट्विटर (Twitter), सेलेब ब्लॉग (Celeb blog), स्नैपचैट (Snapchat) आदि।

हमें हमेशा धरती से जुड़ कर चलना चाहिए। खाली भाषण और हवाबाजी (शायद आपको इस से किसी की याद आई होगी) आपको अधिक समय तक हवा में नहीं रख सकती। वह जो सशक्त है, उसे प्रचार की कोई जरूरत नहीं है।

Popular on the Web

Discussions