मदरसा छात्रों से ‘जन-गण-मन’ गाने को कहा तो कट्टरपंथियों ने लोहे के रॉड से पीटा

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11:37 am 8 Jan, 2016

पश्चिम बंगाल में तालपुकुर आरा हाई मदरसा के हेडमास्टर काजी मासूम अख्तर न्याय की आस में अब भी दर-दर भटक रहे हैं। दरअसल, उन्होंने सरकारी मदद प्राप्त मदरसा के छात्रों को वर्ष 2015 में गणतंत्र दिवस के अवसर राष्ट्रगान गाने के लिए प्रेरित किया था। जब स्थानीय मौलवियों को इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने लोहे के रॉड से मासूम की पिटाई कर दी। वह मदरसा में सुधार और आधुनिकीकरण के हिमायती रहे हैं।

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मौलवियों का मानना है कि छात्रों को राष्ट्रगान सिखाकर काजी मासूम अख्तर ने धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाने की कोशिश की है। वे राष्ट्रगान को अपवित्र करने वाला और हिन्दूवादी बताते हैं। यह घटना अप्रैल 2015 की है।

इस घटना के बाद से लेकर अब तक अख्तर न्याय की आस में भटक रहे हैं। उन्होंने ममता बनर्जी की सकरार, अल्पसंख्यक आयोग, पुलिस और पश्चिम बंगाल मदरसा बोर्ड को कई चिट्ठियां लिखी हैं, लेकिन उन्हें अब तक न तो सुरक्षा मिली है और न ही इसका आश्वासन। मौलवियों ने धमकी दी है कि अगर उन्हें मदरसा में दाखिल होना है तो इस्लामी पोशाक कुर्ता, टखनों तक पायजामा और दाढ़ी में आना होगा। फिलहाल, मासूम शिक्षा के विभाग के एक दफ्तर में जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं, ताकि उन्हें सैलरी समय पर मिल सके।

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इस घटना के बाद कट्टरपंथियों ने अख्तर के खिलाफ फतवा जारी कर दिया। उन्हें इस बात की हिदायत दी गई कि वह प्रत्येक सप्ताह अपनी दाढ़ी की फोटो खींच कर रखें और इसे मौलवियों के सामने पेश करें। इससे यह पता चल सकेगा कि उनकी दाढ़ी सच में बढ़ रही है। न्यू इन्डियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ये कट्टरपंथी इस्लामिक स्टेट की तर्ज पर काम करना चाहते हैं।

काजी मासूम अख्तर मदरसा में पुरजोर आधुनिकीकरण के समर्थक रहे हैं। वह मदरसा में लड़कियों को शिक्षित करने के हिमायती रहे हैं। यही नहीं, उन्होंने छात्राओं के माता-पिता को इस बात के लिए भी तैयार किया है कि लड़कियों के बाल-विवाह पर रोक लगे। कम उम्र की लड़कियों का विवाह बुजुर्गों से न हो और वे अपनी पढ़ाई जारी रखें।

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यही वजह है कि मदरसा मैनेजिंग कमेटी ने उनका नाम राज्य सरकार के शिक्षा रत्न अवार्ड (राज्य में सबसे अव्वल शिक्षक) के लिए नामित किया है। हालांकि उन पर हुए हमले के बाद कमेटी ने पूरे मसले से अपना पल्ला झाड़ लिया।

मदरसा मैनेजिंग कमेटी सचिव सिराजुल इस्लाम मंडल मासूम के आरोपों को सिरे से नकार देते हैं। वह कहते हैं कि काजी मासूम की इस इलाके में उपस्थिति से शांति भंग हो सकती है। यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा।

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