फ़ौज़ी पिता से मिलने 2500 किमी का सफर तय कर शिलांग से दिल्ली आई ये बच्चियां!

3:45 pm 9 Aug, 2016


बेटियां! सच ही कहा गया है कि ‘पिता के आँखों का तारा होती हैं’। जी हाँ, पापा की परियां होती हैं बेटियां। बेटा दिल है, तो जान होती हैं बेटियां। ऐसा ही एक वाक़या देखने को मिला जब दो बच्चियां अपने फौजी पिता से मिलने 2500 किलोमीटर का सफर तय कर के शिलांग से दिल्ली पहुंची। हालांकि, मेघालय की राजधानी शिलांग से पाकिस्तान बॉर्डर तक ढाई हजार किलोमीटर लंबे सफर में बच्चियां जब दिल्ली पहुंचीं, तो आरपीएफ जवान मामले को भांप गए और बच्चियों को बीएसएफ हेडक्वार्टर भिजवा दिया।

इनमें से एक के पिता पंजाब स्थित पाक बॉर्डर और दूसरे के पिता छत्तीसगढ़ के नक्सल इलाके में बतौर बीएसएफ जवान तैनात हैं।

आपको बता दें इन दो बच्चियों में से एक का नाम अनीषा है, जबकि दूसरे का नाम पेमा शेरपा है। 9 साल की अनीषा के पिता सुभाष चंद की तैनाती पंजाब बॉर्डर पर है, लेकिन इन दिनों उनकी ड्यूटी कश्मीर में है। ये दोनों ही बच्चियां कक्षा तीन की छात्र हैं।

यह दोनो 4अगस्त को अपने पिता की तैनाती की जगह, प्लाटून नंबर व एड्रेस लेकर घर से निकली थीं। सबसे पहले दोनों शिलांग से गुवाहाटी टाटा सूमो से पहुंची। फिर गुवाहाटी स्टेशन से ये बच्चियां बिना टिकट ट्रेन में बैठी और 6 अगस्त को दिल्ली पहुंच गई। हालांकि, दोनो बच्चियों की मंज़िल पाक बॉर्डर था जिसके लिए वहाँ तक जाने वाली ट्रेन के संबंध में पूछताछ कर रही थी, लेकिन भाषा के रोड़ा बनने के कारण ये दोनो भटक गईं।

इसी दौरान आरपीएफ अधिकारी सुनील चौबे और नितिन मेहरा ने अनीषा व पेमा को स्टेशन पर अकेले घूमते देख और उनसे बात की। इसके बाद इन दोनों बच्चियों से जो जवाब मिला उसे सुनकर दोनों सुरक्षाकर्मी सकते में आ गए।

हम अपने पापा से मिलने पाकिस्तान बॉर्डर जा रहे हैं, रोकोगे तब भी नही रुकेंगे।

पूछताछ के दौरान सुरक्षाकर्मियों को जब इनके सफ़र की जानकारी मिली तो उनके दिल भी पसीज गए। बच्चियों ने बड़े भोलेपन से बताया कि वो पापा से मिलने पाकिस्तान बॉर्डर जा रही हैं और रोकने से रुकेंगी नहीं।


इसके बाद आरपीएफ जवानों ने सूझबूझ दिखाते हुए बच्चों को बातों में फुसलाया और चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स दिलवाई। पाक बॉर्डर जाने वाली ट्रेन में बिठाने के बहाने से उन्हे थाने ले आए। इन बच्चों से बातों के दौरान पता चला कि दोनों का घर शिलांग में है और दोनों के पिता बीएसएफ में हेड कांस्टेबल हैं। थाना इंचार्ज ने पूरी बात बीएसएफ मुख्यालय और शिलांग पुलिस को बताई। मामले की गंभीरता देखते हुए डीजी स्तर के अधिकारी इस चर्चा में शामिल हुए। जिसके बाद देर रात यह फ़ैसला लिया गया कि जब तक इन दोनो बच्चों को इनके परिवार को सुपुर्द नही कर दिया जाता तब तक यह बच्चियां बीएसएफ कैंप स्थित महिला बटालियन के देखरेख में रहेंगी।

पहले ही हो चुकी थी गुमशुदगी दर्ज़। क्राइम ब्रांच कर रही थी जांच।

शिलांग के रिंजहा थाने में दोनों बच्चियों के परिवार ने अपहरण का मुदकमा दर्ज कराया था। स्थानीय लोग इस बच्चियों के लापता होने से गुस्से में थे और थाने का घेराव भी कर चुके थे। इसके बाद स्थानीय सरकार ने एसपी क्राइम बांच को मामले की जांच सौंपी थी। अब वहीं बच्ची की सलामती की जानकारी मिलने के बाद परिजनो के जान में जान आई।

सुखद अंत: पिताओं को प्लेन से बुलाया और एक महीने की छुट्टी दी।

बीएसएफ कमांडेंड शुभेंदु भारद्वाज के मुताबिक दोनों जवानों के लिए फ्लाइट की व्यवस्था कर उन्हे बच्चों से मिलाया गया है। अनीषा के पिता फिलहाल कश्मीर में ड्यूटी कर रहे थे। जवानों की एक महीने की विशेष छुट्टी मंजूर कर उन्हें परिवार के साथ बिताने का अवसर दिया गया है।

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