पठानकोट में शहीद हुए निरंजन का मकान तोड़ेगा बेंगलुरु नगर निगम, परिवार ने कहा ‘शर्म की बात’

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12:54 pm 11 Aug, 2016

पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के दौरान शहीद हुए लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन कुमार के घर को बेंगलुरू का स्थानीय प्रशासन गिराने जा रहा है। नगर निगम ने 1100 मकानों की एक सूची बनाई थी।

बताया जा रहा है कि इन मकानों की वजह से बारिश का पानी सड़क पर जमा हो जाता है। इस सूची में शहीद निरंजन का मकान भी शामिल है। इन मकानो को तोड़ा जाने वाला है। शहीद के परिवार ने इस फ़ैसले का विरोध किया है।

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निरंजन 2 जनवरी को बम डिफ्यूज करते वक्त शहीद हुए थे। उनके परिवार में वाइफ डॉ. राधिका और डेढ़ साल की बेटी विस्मया हैं। dainikbhaskar

स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, पिछले तीन साल में यहां 100 से अधिक अवैध ढ़ांचों को साफ किया जा चुका है। जल जमाव की समस्या से निजात पाने के लिए अभी 1100 मकानों को और तोड़ा जाना बाकी है।

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निरंजन का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था। dainikbhaskar

क्या कहना है परिवार का?

नगर निगम के इस फ़ैसले से शहीद निरंजन का परिवार हैरान है। शहीद के भाई शशांक ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए कहा है:


“मैं इसे रोकने की गुजारिश करता हूं। पठानकोट हमले में हमने अपने भाई को खोया हैं। यह सहन करना हमारे लिए काफी मुश्किल है। निरंजन ने देश के लिए जान दी थी और अगर उनका ही मकान गिराया जाता है, तो यह शर्म की बात है।”

 

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निरंजन की बेटी विस्मया को दुलारते शहीद के पिता। dainikbhaskar

वहीं, दूसरी तरफ अधिकारियों का कहना है कि इन मकानों को गिराने के अलावा उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है। निगम कमिश्नर ने कहा हमारी हमदर्दी निरंजन के परिवार के साथ हैं। लेकिन हम व्यक्तिगत मामलों की बजाय जन सरोकार को देखते हैं।

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पत्नी राधिका और बेटी के विस्मया के साथ निरंजन। dainikbhaskar

34 साल के निरंजन एनएसजी के बम डिस्पोजल स्क्वायड में थे। 2 जनवरी को जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने पठानकोट एयरबेस पर हमला किया था। हमले के बाद एक आईईडी को डिफ्यूज करते वक्त निरंजन शहीद हो गए थे।

वैसे निरंजन मूलतः केरल के पलक्कड़ जिले के रहने वाले थे लेकिन कई सालों से वो अपने परिवार के साथ बेंगलुरु में ही रह रहे थे। उनके परिवार में पत्नी डॉक्टर राधिका और डेढ़ साल की बेटी विस्मया रह गई हैं। एनएसजी दिल्ली में वह एक साल 10 महीने तक रहे। एनएसजी में जाने से पहले उनकी नियुक्ति सेना के मद्रास इंजीनियरिंग ग्रुप में थी।

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