हिमाचल के लोग भी हैं अनजान शिमला के इन 38 दिलचस्प पहलूओं से

9:50 pm 4 Apr, 2016


शिमला को हम दो शब्दों में बयां कर सकते हैं – आकर्षक और उदार। आकर्षक इसलिए क्योंकि यह आज भी अपने सौंदर्य से लाखों सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है और अपनी खूबसूरती से सम्मोहित कर देता है। उदार इसलिए क्योंकि यहां तरह-तरह की संस्कृति के लोग आकर बस गए हैं और इसने उन सभी को स्वीकार कर लिया है।

हर शहर की अपनी विशेषता होती है, जो उसे दूसरे शहरों से अलग पहचान देती है। शिमला के आज तक के संघर्ष की कहानी भी दिल को छू जाने वाली है। हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं, शिमला के कुछ अनछुए पहलुओं को।

1. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज़- IIAS में वर्ष 1888 से ही बिजली की व्यवस्था है।

यह पहले Lord Dufferin का आवास था, पर अब यह IIAS संस्थान बन चुका है।

2. इस जगह नाथूराम गोडसे का मुकदमा चला था, आज यह Peterhoff होटल के नाम से प्रसिद्ध है।

इस जगह पर पहले सात वायसराय रह चुके हैं और किसी समय पंजाब हाई कोर्ट भी यहीं था।

3. अंग्रेज़ों के राज से पहले, शिमला में नेपालियों की हुकूमत थी।

शिमला नेपाल के राजा पृथ्वी नारायण शाह के साम्राज्य का हिस्सा था। इसे वर्ष 1864 में भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया।

4. शिमला 7 पहाड़ियों पर बसा हुआ है।

ये 7 पहाड़ियां हैंः प्रॉस्पेक्ट हिल, ऑब्जर्वेटरी हिल, समर हिल, इन्वरआर्म हिल, बैनटोनी हिल, जाखू हिल, एलीसियम हिल।

5. शिमला भारत के नौजवानों का शहर है।

यहां 16-55 आयु वर्ग के लोगों की आबादी 55% है और बाकी आबादी का 28 फीसदी हिस्सा 15 साल से कम उम्र के बच्चों का है।

6. MTB हिमालय।

यह दक्षिण-पूर्व एशिया के पहाड़ों पर होने वाली सबसे बड़ी बाइक रेस है। यह आयोजन शिमला में ही किया जाता है।

7. UNESCO ने कालका-शिमला रेलवे लाइन को विश्व की महान विरासतों में स्थान दिया है।

इस रेलवे लाइन में लगभग 806 पुल एवं 103 सुरंगें पड़ती है।

8. मुख्य रूप से शिमला के दो हिस्से हैं- छोटा शिमला और नया शिमला।

इसके अलावा यहां पर टू-टू और टूटी-कंडी भी हैं।

9. वाइसरीगल लॉज के आसपास एक विशेष प्रकार का पौधा पाया जाता है, जिसका नाम येरो है।

यहां कई पुराने घरों का समूह है, जो किसी ज़माने में मोहम्मद अली जिन्ना के पास थे।

10. यहां आज भी हाथों के बने चाइनीज़ जूते आर्डर किए जा सकते हैं।

चाइनीज़ जूते खरीदने के लिए आप टातुंग, होप्सन्स या फुक चुंग पर अपना आर्डर दे सकते हैं।

11. त्रिशूल बेकरी पर आपको बहुत स्वादिष्ट स्पूनीज़ और जापानी बेकरी की चीज़ें मिल जाती हैं।

प्रीति ज़िंटा और अनुपम खेर भी इनके स्वादिष्ट व्यंजनों के दीवाने हैं।

12. शिमला में दक्षिण एशिया का एकमात्र प्राकृतिक बर्फ का मैदान है, जिसपर स्केटिंग की जाती है।

13. प्रसिद्ध डुरंड फुटबॉल टूर्नामेंट सन् 1888 में यहां के अन्नानडेल ग्राउंड में खेला गया था।

14. लॉर्ड कॉम्बरमयर भारतीय सेना के सबसे पहले कमांडर इन चीफ़ थे, जो वर्ष 1828 में यहां आए।

15. इंडियन नेशनल कांग्रेस के संस्थापक भी शिमला के ‘रोथने कैसल’ में रहा करते थे।

जी हां, ए.ओ. ह्यूम यहीं रहा करते थे।

16. टाउन हॉल सन् 1888 में बनाया गया था।

इसकी विशेषता है कि यह एक भूकंपरोधी इमारत है।

17. गांधीजी पहली बार 11 मई, 1921 को शिमला आए थे।

पंडित मदन मोहन मालवीय और लाला लाजपत राय भी उनके साथ यहां आए थे।

18. लोगों का मानना है कि IGMC के गलियारों में भूत-प्रेतों का वास है।

वे लोगों को यहां परेशान कर देते हैं और लिफ्ट को कई घंटों तक रोक भी देते हैं। कहा जाता है कि वे लोगों का नाम भी पुकारते हैं।

19. नव बहार के समीप चुड़ैल बौड़ी है। माना जाता है कि वह पुरुषों को इशारे से अपनी ओर बुलाती हैं।

इस जगह पर आपकी गाड़ी अपने आप धीमी हो जाती है और हो सकता है कि आपकी पीछे वाली सीट पर सफ़ेद साड़ी में एक खूबसूरत स्त्री के रूप में चुड़ैल बैठी हो।


20. शिमला कई महान कलाकारों की जन्मस्थली है।

अनुपम खेर, प्रेम चोपड़ा, बलराज साहनी, प्रिय राजवंश आदि यहीं रहे थे।

21. लोगों का मानना है कि यहां के जाखू मंदिर में भगवान हनुमान के पैरों के निशान हैं।

22. “हॉउलमे” अमृता शेरगिल का जन्म स्थान है। वह भारत की प्रसिद्ध कलाकार थी।

इस घर में एक स्टूडियो भी है, जो अमृता के पिता ने उनके लिए बनवाया था।

23. 16वीं और 17वीं सदी में तिब्बती लिपि में लिखे गए “आर्य आस्था सहसरिकास प्रज्न परामिता” आज भी मारिया बंधुओं के पास सुरक्षित रखा है।

इसको लिखने में सोने एवं चांदी की स्याही का उपयोग किया गया है।

24. शिमला का पहला अख़बार जिसका नाम ‘शिमला अख़बार’ था वर्ष 1848 में छपना शुरू हुआ था।

यह मुसलमानों द्वारा छापा जाता था, पर अंग्रेजों ने इस अखबार को बंद करा दिया था।

25. शिमला की सबसे पहली दुकान एक कसाईखाना था।

इसे चलाती थी मैसर्स बैरेट एंड कंपनी।

26. ऑकलैंड हाउस स्कूल भारत का एकमात्र ऐसा कन्या विद्यालय है, जहां स्कूबा डाइविंग का रोमांचक खेल सिखाया जाता है।

27. जोनांग तकतेन फुंत्सोक चोएलिंग नामक मठ संजौली में स्थित है। यह भारत के ख़ास मठों में से एक है।

इसके अलावा केवल तिब्ब्त में एक अन्य मठ है जहां ‘कालचक्र’ के बारे में शिक्षा दी जाती है।

28. BCS शिमला को एशिया के सबसे प्राचीन बोर्डिंग स्कूलों में शुमार किया जाता है।

यह स्कूल वर्ष 1863 से संचालित किया जा रहा है। यहां पर एक दरवाज़ा है, जो बंद रहता है। इसी दरवाज़े से क़रीब 100 मुस्लिम छात्र भारत के बंटवारे के दौरान यहां से चले गए थे।

29. वर्ष 1828 में शिमला का सबसे पहला रोड बनाया गया था।

अंग्रेजों के ज़माने में इसे ‘ठंडी सड़क’ के नाम से जाना जाता था।

30. गुरखा समुदाय ने अंग्रेजों का बहुत साथ दिया था, इसलिए उनके सम्मान में अंग्रेजों ने यहां गुरखा गेट बनवाया था।

31. यहां कुछ बेहतरीन गाने भी फिल्माये गए हैं। जैसे किः

● बहती हवा सा था वो – 3 इडियट्स
● आओगे जब तुम साजना- जब वी मेट
● तेरा मुझसे है पहले का नाता कोई- आ गले लग जा
● उड़जा काले कावां- गदर

32. संजौली क़ब्रिस्तान में बहुत सी उन लोगों की क़ब्रें हैं, जिन्होंने आत्महत्या की थी।

33. शिमला भूकंप झेलने में सक्षम नहीं है। ये सीस्मिक जोन IV की श्रेणी में आता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यहां की 2 फीसदी इमारतें भी अधिक तीव्रता के भूकंप को नहीं झेल सकेंगी।

शिमला को केवल 16,000 निवासियों के हिसाब से बसाया गया था। पर आज यहां इससे कहीं अधिक इमारतें और निवासी हैं, जिससे खतरा और अधिक बढ़ सकता है।

34. यहां के पहाड़ों की ढलान भी सरकने लगी है।

द ग्रैंड होटल वैस्ट, लक्कड़ बाज़ार आदि नीचे की ओर धंसने लगे हैं। साथ ही खतरनाक बात यह है कि यहां 187 से भी अधिक बहुमंज़िली इमारतें हैं, जिनमें अधिकतर पांच मंज़िलों से भी ऊंची हैं।

35. शिमला सम्मलेन की संधि हुए एक सदी से अधिक का वक्त गुजर गया, लेकिन आज भी तिब्बतियों को देशनिकाला समझा जाता है।

शिमला संधि भारत, चीन एवं तिब्ब्त के बीच 1914 में हुई थी, जिसमें यह तय हुआ था कि तिब्ब्त को आज़ाद राज्य का दर्जा दिया जाएगा।

36. रात 12 बजे के बाद यहां खाना नहीं मिलता।

सभी खाने-पीने की जगहें यहां पर आधी रात तक बंद हो जाती हैं। यहां पर कहीं भी 24 घंटे खाना-पीना नहीं मिलता।

37 यहां के नौजवान टैटू के दीवाने हैं।

शिमला में कुछ ख़ास टैटू बनाने वाले आर्टिस्ट तो हैं ही, साथ ही उनसे टैटू बनवाने वालों की संख्या भी बहुत है।

38. पहाड़ों के उत्तरी भाग से बारिश का पानी सतलज नदी में बह जाता है और ये अंत में अरब सागर में जा मिलती हैं।

इसके दक्षिणी भाग से बारिश का पानी यमुना में गिरता है, जो अंत में बंगाल की खाड़ी में जा मिलती है।

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