गोताखोर लल्लन अब तक बचा चुका है 80 लोगों की जान

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11:30 am 24 Feb, 2016

कभी आपने सोचा है कि जो लोग सड़ी-गली लाशें पानी के अंदर से निकालते हैं उन्हें सड़े हुए मानव अंगों को देखना कैसा लगता है?

सड़क पर पड़ी किसी जानवर की सड़ी लाश की बदबू पड़ते ही हम अपनी नाक बंदकर बेतहाशा भागते हैं, सांस रोक लेते हैं। जरा सोचिए इसी तरह की मानव सड़ी लाशों को हम देखें तो कैसा लगेगा?

सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं लेकिन हम जैसे ही कुछ इंसान न केवल बिना मास्क के उनके पास जाते हैं, बल्कि उन्हें अपने हाथों से निकालते भी हैं। जानिए 80 लोगों की जान बचा चुके गोताखोर लल्लन की कहानी।

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28 साल के लल्लन पिछले कई सालों से इलाहाबाद कुंभ के दौरान गोताखोरी करते हैं। उनके मुताबिक वह अब तक 80 लोगों की जान बचा चुके हैं।

इलाहाबाद में कुंभ के दौरान वह स्नानार्थियों की सुरक्षा के लिए जल पुलिस के साथ तैनात रहते हैं। लल्लन बताते हैं कि सरकार की तरफ से कुंभ के दौरान ही उन्हें याद किया जाता है, बाकी के साल भर सरकार उन्हें तभी याद करती है, जब कोई लाश पानी के अंदर से निकालनी हो। इसके अलावा वह मछली पकड़ने का काम भी करते हैं।

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अपनी गरीबी का जिक्र करते हुए लल्लन ने TopYaps न्यूज़ को बताया कि वह 10 साल की उम्र से काम कर रहे हैं। पहले वह कोयला ढ़ोने का काम करते थे, फिर 12 साल की उम्र में पल्लेदारी का काम करना शुरू किया, लेकिन मेहनत अधिक होने के कारण 14 साल की उम्र से वह गोताखोरी करने लगे।

लल्लन कहते हैं कि वह 1 मिनट 10 सेकेंड तक पानी में रह सकते हैं और पानी के अंदर 25 फुट तक आसानी से जा सकते हैं।


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लल्लन के मुताबिक वह अब तक 80 लोगों की जान बचा चुके हैं, जिसमें एक बार उन्होंने अपने दोस्त कल्लू के साथ मिलकर 25 स्टूडेंट्स को एक साथ डूबने से बचाया था।

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पहली बार लाश निकालने के अनुभव के बारे में लल्लन कहते हैंः “पहली बार जब मैनें लाश निकाली तो न तो उस दिन मैं खाना खा सका और न ही सो सका।”

यहां देखिए, लल्लन कुमार की कहानी, उनकी जुबानी। 

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