केरल की मस्जिद में महिलाओं को प्रवेश, लेकिन नमाज पढ़ने की नहीं मिलेगी छूट

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5:20 pm 25 Apr, 2016


केरल के एक मस्जिद में रविवार को महिलाओं के प्रवेश के साथ ही यहां 1 हजार साल की पुरानी परम्परा टूट गई। तझातंगाड़ी जुमा मस्जिद कमेटी ने यह फैसला समाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियानों के बाद लिया है।

हालांकि, महिलाओं को प्रवेश शर्तों के आधार पर दिया गया है। शर्त यह है कि महिलाएं मस्जिद के अंदर न तो नमाज पढ़ सकेंगी और न ही पारम्परिक अनुष्ठानों में भाग ले सकेंगी। यही नहीं, महिलाओं के प्रवेश के लिए सिर्फ दो दिन 24 अप्रैल और 8 मई मुकर्रर किया गया है।

गौरतलब है कि करीब एक हजार साल पुरानी इस मस्जिद को देखने के लिए दुनिया भर से सैलानी आते हैं, लेकिन महिलाओं को इस मस्जिद में प्रवेश नहीं करने दिया जाता है। इसे लेकर काफी विरोध हो रहा था।

मस्जिद के मौलवी सिराज उद दिन हसन ने कहा था कि एक ही जगह महिला और पुरुषों को इकट्ठा होने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। हालांकि, उन्होंने महिलाओं के लिए अलग व्यवस्था करने की बात कही है।

हफिंग्टन पोस्ट ने मस्जिट कमेटी के वकील नवाब मुल्लाडम के हवाले से बताया हैः

यह एक हजार साल पुरानी मस्जिद है। हमारी महिलाओं ने इसे अब तक नहीं देखा था और वे इस पवित्र स्थल को देखना चाहतीं थीं। इसलिए कमेटी ने 24 अप्रैल और 8 मई को महिलाओं के आने की इजाजत दी है।


तझातंगाड़ी जुमा मस्जिद कमेटी के इस फैसले से कई सवाल उठ खड़े होते हैं। जब मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश और उन्हें पूजा-अर्चना करने की छूट दी जा सकती है, तो मस्जिदों में ऐसा क्यों नहीं हो सकता है?

गौरतलब है कि पिछले महीने शनि शिंगणापुर मंदिर में हिन्दू महिलाओं को पूजा करने की अनुमति मिली थी। इसके साथ ही इस मंदिर में महिलाओं की पवित्र चूबतरे की पूजा नहीं करने की 400 साल पुरानी परम्परा का अंत हो गया था।

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