पाकिस्तान के इस मंदिर का जिक्र है महाभारत में भी, हिन्दुओं के लिए है बेहद पवित्र

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11:59 am 22 Oct, 2016


पाकिस्तान के जाब प्रांत में स्थित कटासराज मंदिर का जिक्र महाभारत में भी मिलता है। यह स्थान न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि हिन्दुओं के लिए बेहद पवित्र भी है।

प्रसंगवश, पाकिस्तान की सरकार ने सिन्ध प्रान्त में हिन्दू मंदिरों व गुरुद्वारों की रक्षा के लिए 40 करोड़ रुपए की एक परियोजना शुरू की है। इस धन के उपयोग से पवित्र स्थलों की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

पाकिस्तान के चकवाल शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित कटासराज मंदिर के आसपास हिन्दुओं की बड़ी आबादी निवास करती थी। लेकिन भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद यहां के अधिकतर हिन्दू भारत चले आए। कटासराज मंदिर परिसर में राम मंदिर, हनुमान मंदिर और शिव मंदिर मौजूद हैं।

इस परिसर में कम से कम सात मंदिर हैं। इस मंदिर की जिम्मेदारी पंजाब प्रान्त की सरकार के अधीन पुरातत्व विभाग को दी गई है।

मान्यताओं के मुताबिक, सती के निधन के बाद, भगवान शिव इतना रोए कि उनके आंसुओं की वजह से दो तालाब बन गए। एक राजस्थान के पुष्कर में तथा दूसरा कटाशा में। कटाशा एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है आंसू की लड़ी। कटास शब्द कटाशा का अपभ्रंश है।

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यह मंदिर कोहिस्तान नामक इलाके में स्थित है। यह स्थान छोटी-बड़ी पहाड़ियों से घिरा हुआ है।

पुरातत्वविदों का मानना है कि कटासराज का सबसे पुराना मंदिर छठी सदी का है।

हिन्दू पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, शिव और सती ने लंबा समय कटासराज में ही गुजारा था। मान्यता है कि कटासराज के तालाब में स्नान से सारे पाप दूर हो जाते हैं।

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