गुमनामी बाबा के रहस्य से पर्दा उठाने की तैयारी, अखिलेश सरकार ने किया आयोग का गठन

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1:27 pm 30 Jun, 2016


गुमनामी बाबा के रहस्य से जल्द ही पर्दा उठ सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने गुमनामी बाबा की वास्तविक पहचान के लिए एक एक-सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया है। इससे यह माना जा रहा है कि समकालीन भारत के सबसे चर्चित रहस्य से जल्दी पर्दा उठेगा।

बड़ी संख्या में लोग यह मानते हैं कि गुमनामी बाबा ही नेताजी सुभाष चन्द्र बोस थे, जो उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में वेश बदल कर रहते थे।

इस न्यायिक आयोग की अध्यक्षता जस्टिस विष्णु सहाय करेंगे। वह अगले छह महीने में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेंगे। सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस न्यायिक आयोग का गठन किया है।

गौरतलब है कि गुमनामी बाबा के रहस्यों पर से पर्दा उठाने के लिए आयोग बनाने का यह फैसला कोर्ट के आदेश के 3 साल बाद आया है।

1985 में गुमनामी बाबा की मृत्यु के पश्चात ललिता बोस ने कोर्ट का रुख किया और मांग की है कि उनकी पहचान उजागर किया जाए और नेताजी की विरासत को सुरक्षित रखा जाए। इसके बाद कोर्ट ने आदेश दिया था कि गुमनामी बाबा की वस्तुओं को संरक्षित किया जाए और आयोग गठित कर उनके पहचान से पर्दा उठाया जाए।


वर्ष 2013 में कोर्ट ने गुमनामी बाबा को असाधारण व्यक्तित्व मानते हुए सरकार को निर्देश दिया था कि एक आयोग गठित कर उनके पहचान को लेकर जो विवाद है, उस पर विराम लगाया जाए।

गुमनामी बाबा ने अपने जीवन के आखिरी 10 साल अयोध्या और फैजाबाद में गुजारे। वह स्थानीय राम भवन में रहते थे। इस दौरान ऐसे कई लोग थे, जो यह मानते थे कि गुमनामी बाबा नेताजी ही थे।

गौरतलब है कि हाल ही में गुमनामी बाबा के सामान से नेताजी से जुड़ी चीजें मिली हैं। नेताजी की घड़ी, उनका चश्मा और यहां तक कि उनके बक्से से नेताजी की पारिवारिक तस्वीर भी मिली है।

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