जिहादी गतिविधियों का केन्द्र है बेल्जियम, यूरोप के लिए बना गले की हड्डी

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9:57 pm 22 Mar, 2016

बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स के हवाई अड्डे पर मंगलवार को हुए आत्मघाती बम विस्फोट में कम से कम 34 लोगों के मारे जाने की खबर है। इस घटना में दर्जनों लोग घायल हुए हैं। घायलों में एक भारतीय भी है।

हवाई अड्डा पर आत्मघाती हमला ऐसे वक्त में हुआ है, जब पेरिस आतंकवादी हमलों के मुख्य आरोपी सालाह अब्देस्लाम को गिरफ्तार किया गया है।

बेल्जियम एक सम्पन्न देश है, लेकिन हाल के दिनों में यह जिहादी गतिविधियों का केन्द्र बनकर उभरा है।

मैड्रिड धमाकों से लेकर पेरिस में आतंकवादी हमलों के तार बेल्जियम से जुड़े हैं। यह कहना उचित होगा कि यह देश यूरोप के गले की हड्डी बन गया है।

आखिर ऐसा हुआ क्यों? बेल्जियम और इस्लामिक चरमपंथियों का गहरा नाता रहा है। यूरोप का गेटवे कहे जाने वाले इस देश में 1970 के दशक में बड़ी संख्या में यहां उत्तर अमेरिका के मोरक्को, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया आदि देशों से अप्रवासी आकर बसे।

सऊदी अरब की नजर वहाबी इस्लाम को बढ़ावा देने की थी। इसी क्रम में सऊदी अरब ने इस्लाम के प्रचार-प्रसार और अप्रवासियों को उपदेश देने के लिए वहाबी धर्मगुरुओं को बेल्जियम में भेजना शुरु किया।

समस्या की शुरुआत यहीं से हुई। वहाबी धर्मगुरुओं ने अपने भड़काऊ और भ्रामक भाषणों से बड़ी संख्या में कट्टरपंथियों की फौज तैयार की।

यही वजह है कि मोरक्को से लेकर सीरिया तक की एक बड़ी आबादी यहां जिहादी गतिविधियों में लिप्त है और पूरे यूरोप के लिए खतरा बन खड़ा हुआ है।

आज भी बेल्जियम की बड़ी मस्जिदों पर मालिकाना हक सऊदी अरब का है। इन कट्टरपंथियों की फौज को इराक और सीरिया में चल रहे युद्ध से ताकत मिलती है।


माना जाता है कि ब्रसेल्स के मुस्लिम युवा खुद को यहां समाज की मुख्यधारा से जोड़कर नहीं देखते और अलग-थलग रहते हैं। यही नहीं, कट्टरपंथियों की आम बोलचाल की भाषा अरबी है, और यही वजह है कि सुरक्षा एजेन्सियां इन पर लगाम नहीं लगा पातीं। उन्हें इनके मंसूबों के बारे में पता नहीं चल पाता।

यहां जिहाद की जड़ें इतनी गहरी हैं कि नवंबर 2015 में पेरिस में हुए आतंकवादी हमलों का मास्टरमाइंड पिछले चार महीने से शहर में रह रहा था, लेकिन उसे पकड़ना सुरक्षाबलों के लिए संभव नहीं था।

आबादी और क्षेत्रफल के लिहाज से बेल्जियम एक छोटा देश है और यहां की जनसंख्या 1 करोड़ 10 लाख के करीब है।

हालात इतने खराब हैं कि बड़ी संख्या में बेल्जियम के युवा इस्लामिक स्टेट की तरफ से लड़ रहे हैं। यहां के पुलिस चीफ कमिश्नर कहते हैं कि 474 बेल्जियन नागरिकों का सीरिया से संबंध रहा है। इनमें से लगभग 130 वापस देश लौट आए, जबकि 77 वहीं पर लड़ते हुए मारे गए। 200 से ज्यादा अब भी वही हैं।

फिलहाल, यहां अलग-अलग कट्टरपंथी गुट सक्रिय हैं। शरिया फॉर बेल्जियम जैसे गुट खुलेआम आतंकवादी गतिविधियां चलाते हैं। मैड्रिड बम धमाकों के बाद इन गुटों पर लगाम लगी है, लेकिन ये नाकाफी हैं।

इसी संगठन ने सीरिया में इस्लामिक स्टेट के लिए मुस्लिम युवकों की भर्ती की थी।

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