भगवान जगन्नाथ का चमत्कारी मंदिर जहां बारिश का रहस्य आज भी है अबूझ पहेली

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12:40 am 18 May, 2016


भारत चमत्कारों का देश है और इसलिए भारत को पावन धरा कहा गया है। आज कलियुग में भी हमें समय-समय पर ऐसे कई चमत्कार देखने को मिल ही जाते हैं, जिनके रहस्य अचंभित करने वाले हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश का एक मंदिर बरसात का संकेत देने के लिए पिछले कई सालों से चमत्कार दिखा रहा है। यह मंदिर 15 दिन पहले बता देता है कि बरसात कब होगी, जिससे किसानों को अपनी फसल की तैयारी करने में मदद मिल जाती है।

कानपुर में है भगवान जगन्नाथ का मंदिर जहां यह चमत्कार घटता है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में भगवान जगन्नाथ का एक ऐसा मंदिर है, जिसकी छत बारिश होने के पहले ही टपकने लगती है। इसे गांव के लोग इन्हें ठाकुर जी बाबा के नाम से भी पुकारते है। लोग इसे भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद मानते हैं। अगर उनकी मानें तो भगवान जगन्नाथ बड़े ही कृपालू हैं तथा वह अपने भक्तों को यह संकेत दे कर सचेत कर देते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को फसल संबंधी तैयारी करने में काफ़ी लाभ होता है। लेकिन यह चमत्कार कैसे होता है, यह आज भी रहस्य बना हुआ है।

क्या कहते हैं तमाम सर्वेक्षण और वैज्ञानिक?

इस मंदिर में अपने आप बूंदों के टपकने का रहस्य आज भी अनसुलझा है। और तो और तमाम सर्वेक्षणों के बाद भी इसके निर्माण का सही समय भी पता लगाने में पुरातत्व वैज्ञानिक असमर्थ हैं। हालांकि, कुछ सर्वेक्षणों में यह दावा किया जाता है कि इस मंदिर का अंतिम जीर्णोद्धार 11वीं सदी में हुआ था। उसके पहले कब और कितने जीर्णोद्धार हुए या इसका निर्माण किसने कराया, ये जानकारियां आज भी अबूझ पहेली है।

मन्दिर में भगवान जगन्नाथ के साथ सूर्य और पदमनाभम भगवान की भी मूर्तियां हैं स्थापित

यह मंदिर जनपद के भीतरगांव विकासखंड मुख्यालय से तीन किलोमीटर पर बेंहटा गांव में स्थित है। मन्दिर में भगवान जगन्नाथ, बलदाऊ और बहन सुभद्रा की काले चिकने पत्थर की मूर्तियां स्थापित हैं। वहीं, सूर्य और पदमनाभम् भगवान की भी मूर्तियां हैं। मंदिर की दीवारें 14 फुट मोटी हैं। वर्तमान में मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है। मंदिर से वैसे ही रथ यात्रा निकलती है, जैसे पुरी उडीसा के जगन्नाथ मंदिर से निकलती है।

कुछ ऐसे होता है चमत्कार

मान्यता है कि मंदिर के गर्भ गृह के छत में चमत्कारी मानसूनी पत्थर लगा हुआ है, जिसकी वजह से मानसून आने के एक सप्ताह पूर्व ही इससे पानी की बूंदे टपकने लगती हैं और सबसे बड़ा अजूबा यह है कि इससे टपकी हुई बूंदे भी बारिश के बूंदों के आकार में होती है। इतना ही नहीं, जिस दिन बारिश होने लगती है, उस दिन से बूंदे टपकना बंद हो जाती है। और इस तरह यहां के पुजारी और भक्तों को अंदाज़ा हो जाता है कि बरसात होने वाली है।


मंदिर के निर्माण काल में है मतभेद

मंदिर के पुजारी दिनेश शुक्ल के अनुसार, कई बार पुरातत्व विभाग और आईआईटी के वैज्ञानिक आए और जांच की, लेकिन न तो मंदिर के वास्तविक निर्माण का समय ही जान पाए और न ही बारिश से पहले पानी टपकने की पहेली सुलझा पाए।

मंदिर के वास्तविक निर्माण को भी लेकर दो मत बने हुए हैं। एक मत यह कहता है कि इस मंदिर का आकार बौद्ध मठ जैसा दिखता है, जिससे इसके अशोक के द्वारा निर्माण कराए जाने की बात का दावा किया जाता है। वहीं, दूसरे मत से मंदिर के बाहरी दीवारों पर चित्रित मोर के निशान और चक्र से यह अंदाज़ा लगाया जाता है कि यह मंदिर चक्रवर्ती सम्राट हर्षवर्धन के काल में स्थापित हुआ होगा।

इस गांव में रहने वाले बुजुर्ग कहते है कि हमारे दादा, परदादा भी इस बारे में पौराणिक कथा कहते है। जिसके अनुसार बताते हैं कि जब भगवान हनुमान ने सूर्य भगवान को निगला था तब यह मंदिर अपने आप बना था। साथ ही यह भी माना जाता है कि भगवान श्री राम इस मंदिर में आए थे।

इस बात में कितनी सच्चाई है, यह कोई नहीं बता सकता।

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