दो दोस्तों ने कबाड़ से बना डाली फ़ौजियों के लिए जैकेट; नई तकनीक से है लैस

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11:52 am 1 Feb, 2016

हॉलीवुड फिल्में देखने के शौकीन दो दोस्त श्याम चौरसिया और उमेश विश्वकर्मा ने कबाड़ से जैकेट जीपीएस गन बनाई है, जो फौजियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

उत्तरप्रदेश के वाराणसी में रहने वाले श्याम चौरसिया के पिता की पान की दुकान है, जबकि उमेश के पिता कारपेन्टर हैं। श्याम अशोक इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग फर्स्ट सेमेस्टर की पढ़ाई कर रहा है।

इस जैकेट की खासियत यह है कि इसके बैरल के जरिए पीछे से आ रहे दुश्मन पर फायर होगा, वहीं जैकेट में लगे मोशन सेंसर से इंडिकेशन भी मिलता रहेगा। आइए जानते हैं इस कमाल के जैकेट की बेमिसाल तकनीक के बारे में।

अब पीछे से भी आ रहे दुश्मनो को दिया ज सकेगा मात

कबाड़ के पाइप से बने बैरल के जरिए 100 गोलियां दागी जा सकती हैं। जैकेट के पीठ पर 8 बैरल और दाहिने हाथ पर 2 बैरल लगाए गए हैं। ट्रिगर जैकेट के हाथ पर वायर लेस सिस्टम से फिट रहेगा। सेंसर के सामने आते ही ट्रिगर एक्टिवेट हो जाएगा और दबाते ही फायर होगा। दुश्मन बगल से हमला करेगा तो स्विच के जरिए हाथ के गन को ऑन कर फायर किया जा सकेगा।

अब दुश्मन को खोज पाना होगा आसान

महज 300 रुपए की लागत से बने इस जैकेट में बॉडी मोशन, सेंसर और इंडिकेटर तकनीक लगाई गई है। इसकी रेन्ज 100 मीटर की । इस रेन्ज अगर दुश्मन आता है तो यह एक्टिवेट होकर एलईडी इंडिकेटर से संकेत देगा।

जवानों का लोकेशन पता करने में सक्षम


जीपीएस कंट्रोल रूम के सर्वर से अटैच कर इसकी कोडिंग की जा सकती है, जिससे जवानों के लोकेशन के बारे में पता चल सकेगा। इस सुविधा के लिए मात्र 2200 रुपए की लागत आएगी।

पावर के लिए 9 वोल्ट की बैटरी

सेंसर, ट्रिगर और जीपीएस को पावर के लिए इसमें 9 वोल्ट की बैटरी फिट की गई है, जिसकी कीमत मात्र 100 रुपए है। भविष्य में इसमें सोलर प्लेट को उपयोग में लाने की योजना है।

खराब कबाड़ से बनाया डीवीडी सॉकेट

खराब कबाड़ से 6 सॉकेट लिया गया है। इसकी कीमत 200 रुपए है। सभी को एसेम्बल करके कनेक्टिंग सर्किट बनाकर जोड़ा गया है। इसमें एलईडी लाइट, फायरिंग सिस्टम औ सेंसर इसी के सहारे एक दूसरे से अटैच होकर काम करेंगे।

रेडियो फ्रिक्वेंसी रिमोट से लैस ट्रिगर

मात्र 350 रुपए का यह ट्रिगर रेडियो फ्रिक्वेंसी रिमोट के आधुनिक तकनीकी से इसमें फिट किया गया है। यह वायरलेस होगा। मोशन सेंसर से इंडिकेटर के जरिए जानकारी मिलते ही गन को स्विच से एक्टिवेट किया जाएगा। इससे आवश्यकतानुसार फायर किया जा सकता है।

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