इस्लामिक आतंकियों के निशाने पर है सिंधु घाटी सभ्यता का अवशेष नगर मोहनजोदड़ो

author image
1:22 pm 19 May, 2017


सिंधु घाटी सभ्यता का अवशेष नगर माने जाने वाले मोहनजोदड़ो को दफनाने की तैयारी हो रही है। वर्ष 1922 के बाद इस इलाके में लगातार खुदाई चल रही है, लेकिन अब इसके नगरावशेष के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। यही वजह है कि पुरातत्ववेत्ताओं को लगता है कि इसे बचाने के लिए मिट्टी के नीचे इसका दफन हो जाना ही एक मात्र समाधान है।

मीडिया रिपोर्ट्स में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और शोधकर्ता डॉक्टर रिचर्ड मिडो के हवाले से बताया गया हैः

“जब तक कि संरक्षण का कोई और बेहतर तरीका नहीं मिल जाता है, तबतक इसे दफनाकर ही हम इसकी हिफाजत कर सकते हैं।”

thebetterindia


आखिर क्यों खतरे में है मोहनजोदड़ो ?

माना जा रहा है कि मोहनजोदड़ो के अवशेष इस्लामिक आतंकवादी संगठन के निशाने पर हैं। पाकिस्तान में पिछले कुछ सालों में कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों का विस्तार हुआ है। तालिबान ने वर्ष 2001 में अफगानिस्तान की स्वात घाटी में स्थित बामियान की विश्व प्रसिद्ध बुद्ध प्रतिमाएं तोड़ दी थीं, उसी तर्ज पर मोहनजोदड़ो के अवशेषों का भी ध्वंश किया जा सकता है। इससे पहले कुख्यात आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने सीरिया में स्थित प्राचीन रोमन शहर पलमायरा को तबाह कर दिया था।

क्यों महत्वपूर्ण है मोहनजोदड़ो ?

मोहनजोदड़ो के बारे में पहली बार वर्ष 1922 में पता चला था, जब भारतीय पुरातत्व संस्थान के अधिकारी राखालदास बनर्जी के नेतृत्व में यहां खुदाई की गई थी। वर्ष 1947 में हुए भारत विभाजन के बाद यह जगह पाकिस्तान के सिंध प्रांत हिस्से में चली गई थी। इसके बाद यहां कई चरणों की खुदाई हो चुकी है। खुदाई के आधार पर पता चला है कि सिंधु घाटी में शहरों को सुनियोजित तरीके से बसाया गया था। ये शहर किसी भी हाल में अाधुनिक शहर से कमतर नहीं रहे होंगे। माना जाता है कि इस सभ्यता का अंत 1900 ईसापूर्व में हो गया था, हालांकि इतिहासकार इस बात पर एकमत नहीं है कि आखिर ऐसा हुआ कैसे।

Popular on the Web

Discussions



  • Co-Partner
    Viral Stories

TY News