IPL और क्रिकेट के वैश्वीकरण की इनसाइड स्टोरी

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3:36 pm 18 Apr, 2016


यदि वैश्विक इतिहास को पलटेंगे तो पाएंगे कि खेल हमेशा से ही राष्ट्रों के मध्य मैत्री और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के अभिन्न उपक्रम साबित हुए हैं। शायद इसीलिए हर देश विशेष से कोई न कोई खेल प्रमुखता से जुड़ा होता है, जो उनकी संस्कृति का दुनिया भर में प्रतिनिधित्व करता है।

समय का फेर देखिए भारत जो की दुनिया भर के लगभग सभी खेलों की जन्मस्थली रहा है, आज सामंतवादी ब्रिटेन के अधीन गिने-चुने राष्ट्रों के बीच खेले जाने वाले जेंटलमेन्स गेम क्रिकेट में अपनी सर्वोच्चता सिद्ध करने में सफल रहा है। तथाकथित संभ्रांतवादी पश्चिम के धरातल में जन्मे क्रिकेट जगत में भारत का गैरपारंपरिक वर्चस्व किसी अजूबे से कम नहीं है।

क्रिकेट को जो वैश्विक पहचान अकेले BCCI और आईपीएल के माध्यम से ‘भारत’ ने दिलाई वो काबिल-ए-तारीफ़ है। IPL आज ओलम्पिक, टेनिस ग्रैंड स्लैम, फीफा वर्ल्ड कप और फार्मूला 1 ऑटो ग्रैंड प्रिक्स की तरह दुनिया भर में धूम मचाए हुए है। आज हम आपको आईपीएल और क्रिकेट के वैश्वीकरण के अंतर्संबंधों की सफलता की इनसाइड स्टोरी के बारे में बताएंगे।

1. ज्यादातर यूरोपीय देशों द्वारा आयोजित किये जाने वाले ओलम्पिक, फुटबॉल विश्वकप और विम्बलडन जैसे बड़े टूर्नामेंट हर साल अन्तर्राष्ट्रीय वितरणों और सहभागिता से भारी अर्थ संग्रह करते हैं, क्योंकि इनका दायरा विश्व भर में फैला हुआ है। जबकि दूसरे दर्जे के गेम्स माने जाने वाले स्क्वैश, टेबल टेनिस और क्रिकेट जैसे गेम्स उचित प्रतिभागिता और व्यूअरशिप से मरहूम रह जाते हैं।

2. ऐसा नहीं है कि इन गेम्स को बढ़ावा देने में, उनसे सम्बंधित राष्ट्र कोई ध्यान नहीं देते पर अक्सर वे इन्हें वैश्विक विस्तार दे पाने में नाकाम रहते हैं। अमेरिका जैसा सशक्त राष्ट्र भी अपने ही राष्ट्रीय खेल को अन्तर्राष्ट्रीय पहचान दे पाने में नाकाम रहा है। जबकि वहां हर वर्ष व्यापक पैमाने पर तीन-तीन लीग का आयोजन किया जाता है, जिसमे केवल क्षेत्रीय खिलाड़ी ही हिस्सा ले पाते हैं। इसलिए सीमित दर्शकों और टीवी अधिकारों के कारण यह अमेरिका से बाहर कदम भी न रख सका है।

3. भारतीय उपमहाद्वीप जो कि कभी ब्रिटेन का प्रमुख उपनिवेश था, में क्रिकेट बड़ी तेजी से फला-फूला, धीरे-धीरे जेंटलमैन गेम “देसी” बन गया। परन्तु कमोबेश अन्य सभी खेलों वाली स्थिति क्रिकेट के लिए भी रही और क्रिकेट भी चुनिन्दा देशों में कैद होकर रह गया। क्रिकेट अपने वृहद वैश्विक ‘आयाम’ की तलाश में राष्ट्रमंडल खेलों में ही घूमता रहा।

4. इस स्थिति में बदलाव की बयार तब चली, जब 1982 में एशियन गेम्स की सफल मेजबानी के साथ ही भारत ने 1983 का क्रिकेट वर्ल्ड कप जीत लिया। खिलाड़ी भारत सहित दुनिया भर में बेहद लोकप्रिय हो गए, जिससे ये महसूस किया गया कि एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था भारत में ‘क्रिकेट’ जैसे खेलों के लिए जबरदस्त क्रेज है। साल 1987 में रिलाइंस की स्पांसरशिप में BCCI ने क्रिकेट विश्वकप का सफल आयोजन किया। भारत में दर्शकों की बढ़ती संख्या से क्रिकेट ने लोकप्रियता में ‘राष्ट्रीय खेल’ हॉकी को भी पीछे छोड़ दिया।

5. खुद को क्रिकेट का जनक बताने वाले ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैण्ड के क्रिकेट बोर्डों ने क्रिकेट के विस्तार में कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया। इससे क्रिकेट जगत में एकाधिकार की दावेदारी ECB और CA से BCCI की ओर खिसक गई। इस मौके को गैरसरकारी संस्था BCCI ने बखूबी भुनाया।

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6. 20 साल बाद BCCI और ICC के इतर जी ग्रुप ने इन्डियन क्रिकेट लीग का शुभारम्भ किया। BCCI ने इसे स्वयं की संप्रभुता की अवमानना समझा, फलस्वरूप बेहद धनी BCCI के दबाव में आईसीएल में खेलने वाले खिलाड़ियों को आधिकारिक अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैचों में प्रतिबंधित कर दिया गया।

7. आईसीएल भले ही ज्यादा हिट न रहा हो,पर इससे क्रिकेट में फुटबॉल की तर्ज पर क्लब प्रथा की शुरुआत हो गयी। लगभग 2 साल बाद BCCI ने आईसीएल की तर्ज पर इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की शुरुआत की। कई विदेशी बोर्डों के खिलाड़ियों ने अपने बोर्डों के लिए खेलने के बजाय IPL को तवज्जो दी।

8. IPL मार्केटिंग की सारी खूबियों से युक्त था। परंपरागत क्रिकेट से बिल्कुल अलग यहां खिलाड़ी जेंटलमैंन के रूप में नहीं, बल्कि आक्रामक खेल खेलता हुआ दिखाई देता था। फुटबॉल की तर्ज पर दर्शकों को बांधे रहने के लिए चीयर लीडर्स की प्रस्तुतियां भी विश्व मीडिया के चर्चे का केंद्र रहीं।

9. भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, वेस्टइंडीज, पाकिस्तान और न्यूजीलैंड जैसे देशों के दर्जनों खिलाड़ी अपने-अपने भावों की बोली के आधार पर टूर्नामेंट में शरीक हुए। इस तरह IPL अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहा।

10. साल 2015 में बिना किसी सरकारी सहायता के लगभग 11.5 बिलियन डॉलर का रेवेन्यु प्राप्त करना IPL की भारी उपलब्धि माना जा सकता है। इससे साबित होता है कि भारत खेलों के बड़े बाजार के रूप में उभरा है। इस आधार पर निश्चित रूप से IPL दुनिया के सर्वर्श्रेष्ठ स्पोर्ट्स इवेंट्स में से एक माना जा सकता है।

11. परन्तु स्पॉट फिक्सिंग और दुर्व्यवहार की घटनाएं खेल भावना को तार-तार करती दिखाई देती हैं। पिछले दो सीजन पुराने 6 सीजनों की तुलना में अपेक्षाकृत कम सफल रहे। लगातार बढ़ती चीटिंग की घटनाओं ने दर्शकों को बुरी तरह निराश किया है। खेल भावना को बनाए रखना आईपीएल के लिए बड़ी जिम्मेदारी और चुनौती है।

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