दूसरों की कार धोकर गुजारा करने पर मजबूर है यह विश्व स्तरीय खिलाड़ी

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1:42 pm 9 Mar, 2016

इस अंतर्राष्ट्रीय तैराक को पाकिस्तान ने मदद की पेशकश की थी, लेकिन भारत कुमार नामक इस एथलीट ने कहा था कि भारत में पैदा हुआ हूं यहीं मरूंगा आप बस दुआ करो।

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आजादी के इतने सालों बाद भी भारत बोल्ट या फेल्प्स जैसा खिलाड़ी पैदा नहीं कर पाया। सौ करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले देश भारत को ओलम्पिक खेलों में एक मेडल जीतने के लिए नाको चने चबाने पड़ते हैं। ओलम्पिक में हिस्सा लेने वाले भारतीय खिलाड़ी उंगलियों पर गिने जा सकते हैं।

ऐसा नहीं है कि भारत में प्रतिभा की कमी है। गौर किया जाए तो जंगलों में शिकार करने वाले आदिवासियों से अच्छा तीरंदाज और तालाबों में तैरने वाले बच्चों से अच्छा तैराक शायद ही दुनिया में मिलें, लेकिन जिस देश के लिए ये खिलाड़ी खेलते हैं, वही उनकी मदद न करे तो वह क्या करें।

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ऐसे ही एक तैराक हैं भारत कुमार। एक ही हाथ के साथ हरियाणा के झज्जर में जन्मे भारत कुमार का मन बचपन से ही खेलने-कूदने में लगता था। भारत कुमार ने तालाबों में भैंस की पूंछ पकड़कर तैरना सीखा, लेकिन जब वह पूल में तैरने उतरे तो अच्छे-अच्छे तैराकों को पानी पिला दिया। स्वभाव से हंसमुख भारत अपने एक हाथ से ही वह काम कर गए, जो भारत के दो हाथो वाले खिलाड़ी नहीं कर पाए। 27 साल के भारत ने विश्व स्तर पर आयोजित तैराकी में गोल्ड मेडल जीता है।

दिव्यांग भारत ने पैराओलम्पिक खेलों में भी हिस्सा लिया है और देश के लिए 50 से ज्यादा मेडल जीते हैं।

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इसे विडम्बना ही कहेंगे कि देश-विदेश की प्रतियोगिताओं में अब तक 50 से ज्यादा मेडल जीत चुके, भारत पैसों की कमी के चलते खेल की प्रैक्टिस छोड़ दी है।

वह कहते हैंः


”मैं देश के लिए खेला मैंने कई मेडल जीते, लेकिन उससे मुझे कुछ नहीं मिला। मैनें भारत सरकार से अपील की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ट्वीट किया है। आम आदमी पार्टी के नेताओं से मिलने की कोशिश की। बॉलीवुड अभिनेताओं से भी मिला लेकिन दिलासा के अलावा किसी से कुछ नहीं मिला।”

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दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में रह रहे भारत ने बताया कि कभी-कभी उनका मन करता है कि वह अपने मेडल बेच डालें।

भारत कुमार कहते हैंः

“क्या फायदा हुआ देश के लिए खेलने का दाने-दाने को मोहताज हूं दर-दर की ठोकरें खा रहा हूं, कोई सरकार कोई नेता मदद नहीं कर रहा है, क्या फायदा ऐसे मेडल्स का। अभी और खेलना चाहता हूं लेकिन अपना घर चलाऊं या खेलूं। मंदिरों, गुरुद्वारों में खाना खाकर खेलता रहा, मेडल भी जीते, पैराओलम्पिक और एशियन गेम्स में भी खेला, लेकिन इसका कोई अर्थ नहीं निकला। मेरी दशा तब भी वैसी थी आज भी वैसी है। मुझे अपना घर चलाने के लिए दूसरों की कार धोनी पड़ रही है।”

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भारत बताते हैं कि उन्हें पाकिस्तान से भी मदद की पेशकश हुई थी, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। इसी तरह कई देशों ने उन्हें अपने यहां बसने का प्रस्ताव दिया, लेकिन उन्होंने ठुकरा दी। वह कहते हैंः “मेरा नाम ही भारत है। कैसा लगेगा कि भारत की मदद पाकिस्तान करे। मुझे विश्वास है मेरा देश मेरी मदद जरूर करेगा।”

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भारत कहते हैं कि वह अभी 4 साल और देश के लिए खेलना चाहते हैं, अगर सरकार उन्हें कोई नौकरी दे तो वह सम्मान के साथ अपने घर का खर्चा भी चलाकर और देश के लिए खेलना जारी रख सकेंगे। अगर आप भारत कुमार की मदद करना चाहते हैं तो उन्हें मोबाइल नं. 9891285679 पर संपर्क कर सकते हैं।

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