युद्ध में घायल जवान को सेना से नहीं निकाला जा सकता: हाईकोर्ट

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5:17 pm 22 Mar, 2016


हाईकोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि जंग में घायल हुए सेना के जवान को सेना से नहीं निकाला जा सकता। कोर्ट ने अपने फैसले में बीएसएफ के एक सिपाही रतिराम को फिर से बहाल करने का आदेश सुनाया।

3 दिसंबर 1994 को अनंतनाग (जम्मू-कश्मीर) में ड्यूटी के दौरान रतिराम एक खदान में हुए भयंकर विस्फोट में बुरी तरह से घायल हो गए थे। इलाज के दौरान उनके बाएं पैर को काटना पड़ा था। जिसके बाद उन्हें ऐसे काम दिए जाने लगे जिसमें शारीरिक तौर पर ज़्यादा भागदौड़ न करनी पड़े और बैठकर ड्यूटी की जा सके।

लेकिन फरवरी 2013 में उनकी तबियत लगातार ख़राब रहने पर उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दे दी गई। 1990 में रतिराम बीएसएफ में सिपाही पद पर भर्ती हुए थे।


न्यायमूर्ति एस रविंद्र भट्ट व दीपा शर्मा की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा:

“प्रशासन ने सिपाही की क्षमता को नजरअंदाज किया है। युद्ध में घायल हुए सैनिक को भर्ती के बीस साल बाद रिटायर करने की नीति सभी मामलों में सही नहीं है। ऐसे में पीडि़त खुद को अवांछित महसूस करता है।”

कोर्ट ने साथ में यह भी निर्देश दिए कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देने के बाद से अब तक सिपाही का जो भी भत्ता और अन्य लाभ बनते है, उसे वह दी जाए।

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