यह कश्मीरी लड़की है भारत की सबसे छोटी उम्र की महिला पायलट

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5:41 pm 7 Sep, 2016


20 वर्षीया आयशा अजीज का बचपन से ही सपना था कि वह पायलट बनकर खुले आसमान में हवा से बातें करें। यह चुनौती भरा सपना उन्होंने सिर्फ 16 साल की छोटी उम्र में पूरा कर लिया। अब उनके हौसले सातवें आसमान पर हैं।

मुंबई में रहने वाली आयशा मूलरूप से कश्मीर से ताल्लुक रखती हैं। कश्मीर की खूबसूरत वादियों में देखे गये अपने पाइलट बनने के सुनहरे सपने के बारे में उत्साहित होकर बताती हैंः

“हर बार जब भी मुझे अपने गांव जाने का मौका मिलता तो मैं ख़ुशी से भर जाती थी, प्लेन के टेकऑफ और लैंड करने के वक़्त जहां मुझे रोमांच का एहसास होता था। वहीँ, मेरा भाई बिलकुल डरा हुआ रहता था।”

अक्तूबर 1995 में जन्मी आयशा अज़ीज़ को 2011 में स्टूडेंट लायसेंस मिल गया था। वह हफ्ते भर स्कूल जातीं और शनिवार-रविवार को विमान उड़ाना सीखती थीं।

सुनीता विलियम्स को अपना आदर्श मानने वाली आयशा को एडवेंचर, ट्रेवल और लोगों से मिलना बहुत पसंद है। इस मुकाम तक पहुचने के लिए वह अपने माता-पिता का भी शुक्रिया अदा करती हैं। आयशा बताती हैं कि उनका यह सपना पूरा करने के लिए माता-पिता ने हाई स्कूल के बाद ही उसका फ्लाइंग स्कूल में दाखिला करवा दिया था। इसके बाद आयशा ने 16 साल की उम्र में सभी टेस्ट पास करके स्टूडेंट पायलट लाइसेंस हासिल कर लिया था।

कश्मीर से पहली महिला पाइलट आयशा ने अपनी करियर की शुरुआत सेसना 152 और 172 एयरक्राफ्ट उड़ाने से की थी। अब वह कमर्शियल पायलट लाइसेंस प्राप्त करने के बाद किसी बड़ी एयरलाइन के साथ जुड़ना चाहती हैं।

हालांकि, कमर्शियल पायलट लाइसेंस हासिल करने के लिए आयशा को पैसों की तंगी की वजह से इंतज़ार करना पड़ा, लेकिन उनका इंतज़ार जल्द ही खत्म हो गया और आज वह बॉम्बे फ्लाइंग क्लब में बीएससी एविएशन के तीसरे साल की पढ़ाई कर रही 4 लड़कियों में से एक हैं।


आयशा को नासा जाने का भी अवसर प्राप्त हो चुका है जहां उनकी मुलाकात एविएटर जॉन मैकब्राइड से हुई थी। आयशा अपनी ज़िंदगी के बेहतरीन पलों को याद करते हुए बताती हैं कि उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा था, जब उनकी मुलाकात रोल मॉडल सुनीता विलियम्स से हुई थी। आयशा सपने को हक़ीकत में तब्दील होने की बात पर कहती हैंः

“देश की यंगेस्ट पायलट होने की मुकाबले, मैं अपने बचपन का टारगेट पूरा होने पर ज्यादा खुश हूं। महिलाओं का जुनून ही पुरुष प्रधान दुनिया में असली ताकत है। हमें फोकस, स्टेबिलिटी, मेहनत और खुद पर विश्वास की जरूरत है।”

आयशा कहती हैं कि वे हमेशा से कुछ हटकर या परंपराओं से अलग जाकर काम करना चाहती थीं। आज जब आयशा एक सफल पायलट हैं तो इस मुकाम को हासिल करने से अलग कुछ और नहीं हो सकता। आयशा की सफलता तमाम लड़कियों के लिए  प्रेरणा हैं। जो समाज की हर दकियानूसी को किनारे करते हुए यह सीख देती है कि अगर आपमें सपनों को हक़ीक़त में बदलने का ज़ज़्बा है तो कोई भी मंज़िल मुश्किल नही है।

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