पर्यटकों के लिए अजूबा है भारत, ये रहे 10 अनसुलझे रहस्य

11:12 am 21 Apr, 2016


भारत पर्यटकों के लिए एक अजूबा है। इस देश में कुछ ऐसे अनसुलझे रहस्य हैं, जो वैज्ञानिक स्पष्टीकरण से परे हैं। आइए जानते हैं इन अनसुलझे रहस्यों के बारे में।

1. कोंग्का ला पास UFO बेस

‘कोंग्का ला’ भारत एवं चीन के मध्य, विवादित अक्साई चीन प्रदेश में स्थित एक निचली पहाड़ी चोटी के बीच का रास्ता है। हिमालय में अपनी स्थिति एवं सीमा विवाद के कारण यह विश्व का सबसे कम भ्रमण वाला क्षेत्र है। दोनों देशों के नागरिकों, सन्यासियों, सैनिकों एवं माउंट कैलाश के तीर्थयात्रियों आदि ने यहां अजूबे यान देखने की बात कही है।

कुछ लोगों के मुताबिक इस जगह पर जमीन के अन्दर UFO का बेस है, जिसके बारे में चीनी एवं भारतीय अधिकारियों को पता है। इस क्षेत्र में किसी वैज्ञानिक के जाने की मनाही है। विवादित होने के कारण दोनों में से किसी भी देश ने इस क्षेत्र का अधिक अध्ययन नहीं किया है।

2. सम्राट अशोक की गुप्त समिति

273 BC में सम्राट अशोक, कलिंग के युद्ध में भीषण रक्तपात देखने के बाद अत्यंत विचलित हो गए और बौद्ध धर्म को अपना लिया।

सत्य की खोज करते हुए वे इतने ज्ञानी हो गए कि इस ज्ञान का गलत हाथो में पड़ने से मानवता को खतरा हो सकता था। अपने ज्ञान को बचाने के लिए उन्होंने नौ विश्वसनीय व्यक्तियों की गुप्त समिति का गठन किया, जिसमें पोप सिल्वेस्टर-2 भी शामिल थे।

यह सभी विभिन्न देशों व जातियों के थे। इससे ज्ञान किसी एक व्यक्ति या जगह पर केंद्रित होने के बजाय, पूरे विश्व में फ़ैल गया। काफी समय बाद यह कथा धूमिल हो गई पर कुछ लोग अब भी विश्वास करते हैं कि नौ लोगों की यह विश्व की पहली गुप्त समिति थी व उनके उत्तराधिकारी अब भी उन पुस्तकों के ज्ञान का उपयोग कर प्रभावशाली बन गए हैंं।

3. कुलधरा का रहस्य

वर्ष 1291 में पश्चिम राजस्थान के पालीवाल ब्रह्मणों द्वारा कुलधरा ग्राम की स्थापना की गई, जो बहुत संपन्न व खुशहाल था।

वर्ष 1825 में अचानक कुलधरा व आसपास के 83 गांवों के लोगों ने उस क्षेत्र को छोड़ दिया। भारत में जहां आज भी रीति-रिवाजों का पालन होता है, वहां सदियों पुरानी पूर्वजों की ज़मीन को अचानक छोड़ देना, एक रहस्यमय पहेली बन कर रह गया।

कुछ लोग कहते हैं कि राज्य के एक दुष्ट मंत्री द्वारा गांव के मुखिया की बेटी से शादी की लालसा के कारण सभी गांव वाले उस क्षेत्र को छोड़ कर चले गए। इस में दम नजर नहीं आता। इस गांव के अवशेष अब भी देखे जा सकते हैं।

4. जोधपुर का ध्वनि गर्जन

आपको दिसम्बर 2012 तो याद ही होगा, जब पूरा विश्व ये मान बैठा था की यह धरती का अंत है। इसी समय संसार में कई जगहों पर भीषण ध्वनि गर्जना सुनी गयी। ऐसा ही एक अनुभव 18 दिसम्बर 2012 को जोधपुर में भी किया गया।

यह ध्वनि गर्जन इतना तीव्र था कि लोग इसे सुन अपने घरों से निकल गए। लोगों ने सोचा कि शायद सैनिक छावनी में कोई विस्फोट हुआ। लेकिन थल एवं वायु सेना दोनों ने इस बात से इंकार कर दिया। इस गगनभेदी गर्जन का रहस्य अब तक नहीं अनसुलझा है।

5. बाबा हरभजन सिंह

यह कहानी अपने कर्तव्य को जीवित हो या मृत, पूर्णतया निभाने की है। पंजाब रेजिमेंट के सिपाही स्व. हरभजन सिंह भारत-चीन सीमा पर स्थित नाथुला पास पर तैनात थे।

4 अक्टूबर 1968 को हरभजन सिंह भारी बारिश और बाढ़ में अपने घोड़ों के साथ बह गए। उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। आश्चर्यजनक रूप से सैनिकों ने उन्हें सपने में देखना शुरू कर दिया। वह सपने में आकर बताते थे कि उनका शव बर्फ में कहां दबा पड़ा है एवं वहां उनकी समाधि बनाने को प्रेरित करते थे।

दोनों देशो के सैनिकों को वह अकेले घोड़े पर बैठे गश्त लगाते दिखाई देते थे तथा सपने में आकर सुरक्षा के पहलुओं के बारे में बताते थे। उनकी समाधि शीघ्र ही वहां के निवासियों एवं सैनिकों में प्रसिद्द हो गई तथा आज भी वहां के निवासी बाबा को याद करते हैं।


6. येती

हिमालय क्षेत्र में बौद्ध धर्म फैलने से पूर्व, वहां के लेपचा निवासी एक ‘ग्लेशियर के प्राणी’ को शिकार का देवता मानकर पूजते थे। बॉन धर्म के अनुयायियों का मानना था कि mi rogd (जंगली आदमी) के खून में दैवीय शक्ति होती हैं। यह जंतु लम्बे और बन्दरनुमा थे व सीटी सरीखी आवाज निकालते थे।

वर्ष 1832 में, नेपाल में जेम्स प्रिन्सेप और उनके गाइडों ने एक लम्बे प्राणी को देखने का दावा किया था जो उनको देखते ही भाग गया। ऐसे प्राणी और उनके पदचिन्ह देखने की घटनाएं समय-समय पर होती रही हैं। उनके मल के परीक्षण से उसमें अज्ञात परजीवियों के लक्षण मिले हैं। इस सब के बावजूद, येति के होने का कोई ठोस सबूत नहीं है।

7. कोधिनी के जुड़वां

मलप्पुरम केरल में 2000 परिवारों का कोधिनी नामक एक गांव है। इस गांव की विशेषता है कि इसमें 250 से अधिक जुड़वां बच्चे रहते हैं, जो विश्व की जुड़वां औसत दर से छह गुना ज्यादा है। जबकि भारत, कम जुड़वां औसत दर वाले देशों में से एक है।

इस विषय पर काफी अनुसन्धान के बाद भी इसका कोई ठोस कारण पता नहीं चल सका है। कोधिनी के लड़कियों की किसी दूर के व्यक्ति से शादी करने पर भी जुड़वां बच्चे ही पैदा होते हैं। इसका खानपान से भी कोई नाता नहीं पाया गया है। कुछ शोधकर्ता इसका कारण वहां के पानी को मानते हैं, पर यह सब अनुमान ही है।

8. जटिंगा में चिड़ियों की आत्महत्या

जटिंगा, दीमा हसिंगा, असम में स्थित एक छोटा सा गांव, चिड़ियों की खुदखुशी के लिए प्रसिद्ध है। वैज्ञानिकों को इस घटना में काफी रूचि है, जो हर साल सितम्बर व नवम्बर माह में मानसून के वक्त शाम 7 से 10 बजे के बीच घटित होती है। इस समय ऐसा लगता है मानो पक्षियों ने ज़िंदगी से हार सी मान ली हो।यह घटना दूर के प्रवासी पक्षियों पर कोई प्रभाव नहीं डालती, अपितु यहां रहने वाले पक्षी इस घटना से प्रभावित होते हैं।

सूर्यास्त के समय कई पक्षी 1.5 किमी लम्बी पट्टी पर पेड़ों एवं खाली इमारतों से टकरा कर मर जाते हैं या अपने आप को चोट पहुचाते हैं। इनके इस व्यवहार का कोई उचित कारण पता नहीं लगा सका है।

9. रूपकुंड झील

हिमालय की वादियों में स्थित रूपकुंड झील अपने किनारों पर नर कंकाल मिलने के कारण प्रसिद्द है। बर्फ पिघलने के बाद दो मीटर गहरी इस झील के तल में नर कंकाल मिले हैं। माना जाता है कि ये नरकंकाल 9वीं सदी के हैं। इन नर कंकालों में से तीस पर नेशनल जियोग्राफिक द्वारा किए गए डी एन ए टेस्ट से पता चला है कि इनमें से 70 फीसदी ईरान के तथा बाकी भारतीय मूल के हैं।

ताज़ा शोध बताते है कि करीब 200 व्यक्तियों की मृत्यु बर्फीले तूफ़ान की वजह से हुई थी, लेकिन सत्य कोई नहीं जानता कि वे लोग कौन थे और व्यापारिक मार्ग न होने के बावजूद, इतने लोग उस दुर्गम स्थान पर क्या कर रहे थे।

10. सिन्धु घाटी सभ्यता का रहस्य

लगभग 5300 वर्ष पूर्व कांस्य युग में सिन्धु व पंजाब क्षेत्र में एक आधुनिक सभ्यता ने जन्म लिया था। पुरातत्ववेताओं को इस सभ्यता के मल प्रवाह पद्यति, स्नानघर व सफाई के बारे में पता चला। इस सभ्यता के लोग धनवान व विज्ञानवेत्ता थे। उन्होंने आधुनिक शहर बसाए थे, जहां दो मंजिली इमारत हुआ करती थी।

उस समय की अन्य सभ्यताओं से भिन्न इन लोगों के मंदिर और राज महल नहीं होते थे। उनकी भाषा भी अभी तक कोई समझ नहीं सका है। वह लड़ाका प्रकृति के भी नहीं थे, लेकिन यह भी एक रहस्य बना हुआ है कि इस सभ्यता का अंत कैसे हो गया। बाढ़, आक्रमण, एलियंस अथवा नाभिकीय विस्फोट इसके कुछ कारण हो सकते हैं।

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