डॉ. लक्ष्मी जिन्होंने आजाद हिन्द फौज की कमान संभाल ‘रानी लक्ष्मीबाई रेजीमेंट’ का किया नेतृत्व

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12:29 pm 15 Aug, 2016


भारत की आजादी की लड़ाई में कई शूरवीरों ने अपना अथक योगदान दिया। इनमें से एक थीं नेताजी द्वारा बनाए गए आजाद हिन्द फौज से जुड़ी लक्ष्मी सहगल।

24 अक्टूबर, 1914 को मद्रास (अब चेन्नई) में जन्मी कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने भारत को स्वतंत्रता दिलाने में अहम भूमिका निभाई। लोग उन्हें आज भी ‘कैप्टन लक्ष्मी’ कहकर संबोधित करते हैं।

सहगल में शुरुआत से ही गरीब लोगों की सहायता करने का भाव था। वह उनके चिकित्सकीय सेवाओं को लेकर चिंतित रहती थीं। यही वजह है कि उन्होंने गरीबों की सेवा के लिए चिकित्सा पेशा चुना और वर्ष 1938 में मद्रास मेडिकल कॉलेज से एम.बी.बी.एस. की डिग्री हासिल कर 24 साल की उम्र में डॉक्टर बनीं। उसके बाद उन्होंने डिप्लोमा इन गाइनिकोलॉजी भी किया और अगले ही साल वर्ष 1939 में वह महिला रोग विशेषज्ञ बनीं।

एक दिन नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के साथ क़रीब एक घंटे की मुलाकात के बीच, उनके विचारों से प्रभावित होते हुए लक्ष्मी के दिल में भारत की आजादी की अलख जग चुकी थी।

लक्ष्मी के भीतर आज़ादी का जज़्बा देखने के बाद नेताजी ने उनकी अगुवाई में ‘रानी लक्ष्मीबाई रेजीमेंट’ बनाने का ऐलान किया। 22 अक्तूबर, 1943 में डॉ. लक्ष्मी ने महिलाओं से सजी फ़ौज रानी लक्ष्मीबाई रेजिमेंट में ‘कैप्टन’ पद का कार्यभार संभाला।

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आजाद हिन्द फौज की महिला बटालियन रानी लक्ष्मीबाई रेजीमेंट ने कैप्टन लक्ष्मी की अगुवाई में कई जगहों पर अंग्रेजों से मोर्चा लिया। कैप्टन लक्ष्मी को ‘कर्नल’ का पद भी मिला, जो एशिया में किसी महिला को पहली बार मिला था।

उन्हें साल 1945 में अंग्रेजी हुकूमत द्वारा गिरफ्तार कर, करीब साल भर तक बर्मा में रखा या गया। डॉ. लक्ष्मी अस्थाई ‘आज़ाद हिंद सरकार’ की कैबिनेट में पहली महिला सदस्य भी बनीं।

साल 1998 में लक्ष्मी सहगल को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

एक स्वतंत्रता सेनानी, डॉक्‍टर, समाजसेवी के रूप में पहचाने जाने वाली लक्ष्मी सहगल ने 98 वर्ष की आयु में 23 जुलाई 2012 को इस दुनिया से अलविदा कह दिया।

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