ये हैं गायकी के छोटे फतेह अली खान; गरीबी भी नहीं तोड़ सकी इनका जुनून

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4:09 pm 11 Feb, 2016

कहने को तो देश में दर्जनों रियलिटी शोज़ आ रहे हैं, जो भारत की प्रतिभा खोज कर लाने का दावा करते हैं, लेकिन शायद यह खोज मेट्रो सिटी के उन्हीं लोगों तक सीमित है, जो यह पता लगा सकते हैं कि फलां तारीख को फलां जगह ऑडिशन हैं।

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ऑडिशन की दुनिया से दूर दिल्ली में ऐसे मस्ताने गायकों की एक टोली है, जिसके एक-एक कलाकार को संगीत का खलीफा कहा जाए तो गलत नहीं होगा। उनके गाने को सुनकर लगता है कि ये लोग संगीत के लिए ही बने हैं।

दिल्ली के बेहद पिछड़े इलाके सीलमपुर में ‘शान वारसी’ नाम की टोली है, जिनके पुरखे एक जमाने में नवाबों की महफिलों की शान हुआ करते थे।

हालांकि, समय बदला, लोग बदले और कभी नवाबों महफिलों की शान होने वाले कलाकारों की पुश्तों को आज यहां-वहां गाकर पेट भरना पड़ रहा है, लेकिन संगीत के लिए इनके जुनून को गरीबी तोड़ नहीं सकी है।

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इस मस्तानी टोली के लोग हर तरह के हिन्दी और उर्दू संगीत का रियाज़ करते हैं। संगीत की इस टोली के उस्ताद शरीफ वारसी हैं, जो एक बेहतरीन तबला वादक हैं। शरीफ वारसी के मुताबिक उनका खानदान 800 साल से इसी पेशे में है।

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शरीफ वारसी के दो बेटे हैं दोनों ही संगीत की तालीम अपने वालिद (पिता) से ले रहे हैं। शरीफ वारसी का बड़ा बेटा शान वारसी (17) हरमोनियम वादक और मुकम्मल गायक है, वहीं 14 साल का छोटा बेटा शोएब वारसी तबले के साथ वखूबी खेलता है।


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इनकी टोली के सदस्य मुशाहिद अहमद भी हैं, जिन्होंने गाने की तालीम (शिक्षा) शरीफ वारसी से ही ली है। मुशाहिद के मुताबिक उनके वालिद का ताल्लुक भी संगीत से रहा है वह गाने के साथ-साथ एक अच्छे गीतकार भी थे।

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टोली के उस्ताद शरीफ कहते हैं कि “हमारे यहां का बच्चा भी रोता है तो सुर में रोता है’। मालूम हो कि शरीफ के बड़े बेटे शान को लोग प्यार से छोटा फतेह अली खान बुलाते हैं।”

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देखें छोटे फतेह अली खान की कहानी जिसके बाद आप बोल उठेंगे ‘तुमसा कोई नहीं…’

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