रूस की मदद से भारत बनाएगा सुपर सुखोई और आधुनिक लड़ाकू विमान

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6:11 pm 11 Jul, 2016

जहां भारत अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संबंध मजबूत करने की दिशा की ओर काम कर रहा है। वहीं केन्द्र सरकार अब दुश्मनों को धूल चटाने के लिए 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों और सुखोई जेट (30MKI) को सुपर सुखोई में बदलने के लिए रूस से समझौता करने जा रही है।

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सुखोई 30MKI लड़ाकू विमान intoday

रूस के साथ मिलकर भारत पांचवीं पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ्ट (FGFA) विकसित करेगा। इसके लिए दोनों देश जल्द ही बात करने वाले हैं। साथ ही भारत अपने सुखोई 30-MKI को अपग्रेड कर ‘सुपर सुखोई’ बनाएगा।

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने बताया कि देश के लिए सुखोई की उपयोगिता जो पहले 46 फीसदी ही थी, अब 60 फीसदी तक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि  ‘हमारा लक्ष्य इसकी उपयोगिता को 75 फीसदी तक करना है।’

सुखोई को बेहतर बनाने के लिए रूस, हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स और भारतीय वायुसेना मिलकर ‘सुपर सुखोई’ पर साझा रूप से काम करेंगे।


भारत  सिंगल सीट वाले 5वीं जनरेशन के लड़ाकू विमान के निर्माण को लेकर तैयारी में है। इस डिजाइन कॉन्ट्रैक्ट के करीब छह साल बाद भारत और रूस अब प्रोटोटाइप विकास, परीक्षण और बुनियादी ढांचे बनाने के लिए करीब 4 बिलियन डॉलर का समझौता करने जा रहे हैं। ऐसे 127 विमान बनाने में करीब 25 बिलियन डॉलर की लागत आएगी।

सुपर सुखोई एक्टि‍व इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे रडार और लॉन्ग रेंज स्टैंड ऑफ मिसाइल जैसी एडवांस तकनीकों से लैस होगा।

बता दें कि भारत के पास महज 33 स्क्वॉड्रन हैं।  इनमें से 11 स्क्वॉड्रन में MiG-21 और MiG-27 फाइटर हैं। पड़ोसी मुल्कों से बढ़ते खतरे से निपटने के लिए भारत को 42 स्क्वॉड्रन की जरूरत है।

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