भारत की टॉप 200 कंपनियों ने चीनी कंपनियों को दी मात, बाजार पूंजीकरण क्षेत्र में आगे

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4:10 pm 3 Aug, 2016


भारत में बेहतर ढांचागत सुविधाओं की कमी के बावजूद भारत की टॉप 200 कंपनियों ने अपनी प्रतिद्वंदी चीन की 200 कंपनियों को शिकस्त दी है।

स्टैण्डर्ड एंड पूअर्स (S&P) ग्लोबल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और चीन के निजी क्षेत्रों के बीच काफी बड़ा अंतर सामने आया है। S&P एक अमेरिकी वित्तीय सेवा कंपनी है। यह मॅकग्रा-हिल कंपनियों का प्रभाग है, जो स्टॉक और बॉन्ड पर वित्तीय अनुसंधान और विश्लेषण प्रकाशित करता है।

भारत के शीर्ष 200 कंपनियों के कुल शुद्ध कर्ज और कर पूर्व लाभ में निजी कंपनियोंं का योगदान 75 फीसदी है। वहीं, चीन के मामले में ये योगदान मात्रा 20 फीसदी है। निरंतरता के लिहाज से भारत की निजी कंपनियों ने देश की सरकारी कंपनियों और चीन की कंपनियों से आगे बढ़ते हुए बेहतर प्रदर्शन किया है।

यह रिपोर्ट ‘इंडियाज टॉप कंपनीज सेट टू गेन इवन एज चाइनाज कंटिन्यू टू फील द पेन’ और ‘द मिसिंग पीस इन इंडियाज इकोनोमिक ग्रोथ स्टोरी: रोबस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर’ नाम से प्रकाशित हुई है।

S&P ग्लोबल रेटिंग्स के आकलनकर्ता मेहुल सुक्कावाला का कहना है:

“बाजार पूंजीकरण के लिहाज से भारत की शीर्ष 200 कंपनियों का उनकी चीनी प्रतिद्धंदी कंपनियों से किए गए हमारे आकलन के मुताबिक सामने  आया है कि चीन की लिस्टेड कंपनियों में सरकारी दखल भारत की तुलना में कहीं ज्यादा है।”

इस कारण कंपनी की पूंजीगत लागत कम करने की क्षमता पर सीधा असर पड़ता है, जिससे मुनाफा घटता और कर्ज का स्तर बढ़ता है।


भारत और चीन दोनों देशों की कंपनियों के रेवेन्यू ग्रोथ में नीचे का रुख दिख रहा है। दोनों देशों की कंपनियों के पूंजीगत खर्चे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के बुनियादी ढांचे की खस्ता हालत की वजह से ही भारत सरकार के महत्वाकांक्षी ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के सामने बड़ी बाधाएं खड़ी हुई हैं।

S&P को अगले दो से तीन सालों में रेवेन्यू ग्रोथ के मुद्दे पर भारत की शीर्ष कंपनियों के और बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है।

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