भारतीय सेना के ‘ग्रेनेडियर्स’ से जुड़े 10 दिलचस्प तथ्य

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5:17 pm 5 Apr, 2016


आपने कारगिल युद्ध के दौरान 18th ग्रेनेडियर्स का नाम जरूर सुना होगा। दुनिया के सर्वश्रेष्ठ योद्धाओं में से एक माने जाने वाले फ्रेंच मूल के ‘ग्रेनेडियर्स’ के नाम पर बनी भारतीय सेना की बेहतरीन इन्फैंट्री रेजीमेंट ‘द ग्रेनेडियर्स’ की पराक्रम की कथाएं हर हिंदुस्तानी के सीने को गर्व से चौड़ा कर देती हैं।

गौरतलब है कि पिछले साल ग्रेनेडियर्स को भारतीय सेना की तरफ से रूस में द्वितीय विश्व युद्ध की 70वीं सालगिरह पर आयोजित की गई प्रतिष्ठित ‘विजय दिवस’ की परेड में भेजा गया था।

आज हम आपके समक्ष भारत की संप्रभुता को चुनौती देने वाले हर संभावित खतरे को पूर्णतया नष्ट करने की क्षमता रखने वाले इन्ही ग्रेनेडियर्स से जुड़े कुछ तथ्यों को प्रस्तुत करेंगेः

1. भारतीय सेना में ग्रेनेडियर्स का गठन ब्रिटिश-काल में ही हो गया था, लेकिन बाद में इस सैन्य इकाई का नाम 1945 में परिवर्तित कर दिया गया। इस यूनिट ने दोनों विश्वयुद्धों और स्वंतंत्र भारत के लिए लड़े सभी मुद्दों में अपने युद्ध कौशल का लोहा मनवाया था।

2. ग्रेनेडियर्स भारतीय सेना के सबसे मजबूत रेजीमेंट्स में से एक माने जाते हैं। ग्रेनेडियर्स का युद्धनाद और ध्येय वाक्य “सर्वदा शक्तिशाली” है, जिसका मतलब हर परिस्थिति में मजूबत रहने वाला है। ग्रेनेडियर्स ने अपनी प्रतिष्ठा और ध्येय वाक्य को चरितार्थ करने के अनेकों उदाहरण पेश किए हैं, जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे।

3. भारतीय सेना में ग्रेनेडियर्स की 19 टुकड़ियां सेवा दे रही हैं, जो युद्ध काल में किसी भी तरह के आक्रमण का जवाब देने में सक्षम है। इनका मुख्य कार्यालय मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित है।

4. अक्टूबर 1947 में जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान को बढने से रोकने के लिए, ग्रेनेडियर्स को भेजा गया। पाकिस्तानी हमलावरों के कश्मीर में प्रवेश को रोकने के लिए ग्रेनेडियर्स को ‘गुरेज’ घाटी को घेरना जरूरी हो गया था। कई दिनों तक चले युद्ध में ग्रेनेडियर्स ने पाकिस्तानी सेना और आतंकियों पर बुरी तरह पराजित कर खदेड़ दिया। इस निर्णायक जीत के लिए 28 जून 1948 को इस यूनिट को “गुरेज” नामक युद्ध पदक से नवाजा गया।

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5. 1965 में भारत-पाक युद्ध में ग्रेनेडियर्स ने चट्टान की भांति खड़े रह कर पाकिस्तानी सैनिकों के दांत खट्टे कर दिए थे। मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित वीर अब्दुल हमीद उस समय 4th ग्रेनेडियर्स में शामिल थे। उन्होंने पाकिस्तान के 7 पैट्टन टैंकों को अकेले ध्वस्त कर दिया। इस रेजीमेंट की बदौलत ही अमृतसर को पाकिस्तानी आक्रमण से बचाने में कामयाबी मिली।

6. वर्ष 1962 में भारत पर मनोवैज्ञानिक और सामरिक तौर पर जीत दर्ज कर ‘मद’ में डूबे चीनी सैनिकों ने सिक्किम के नाथु ‘ला’ दर्रे पर भारतीय ग्रेनेडियर्स को उकसाने के लिए जबर्दस्ती इंटरनेशनल बॉर्डर से छेडछाड़ करने की कोशिश की, जिसके जवाब में ग्रेनेडियर्स द्वारा 4 दिन तक की गई कार्रवाई में चीन को ग्रेनेडियर्स के अजेय युद्ध कौशल का पता चल गया। परिणामस्वरूप पहली बार चीन ने ‘सीजफायर’ के लिए पहल की।

7. वर्ष 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में इन्हीं ग्रेनेडियर्स ने जरपाल में पाकिस्तानी अटैक को ध्वस्त कर दिया था। इसके लिए 3rd ग्रेनेडियर्स की चार्ली ब्रिगेड के कमांडर मेजर होशियार सिंह को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

8. मूलतया ग्रेनेडियर्स का मुख्य काम ध्वस्त कर देना ही होता है। इसीलिए इसे सबसे खतरनाक रेजीमेंट भी कहा जाता है। इनका पराक्रम वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के ‘ऑपरेशन विजय’ में भी देखा गया था। टोपोलिंग और टाइगर हिल की दुर्गम चोटियों पर नीचे से ऊपर की ओर बढ़ते हुए 18वीं ग्रेनेडियर्स बटालियन ने पकिस्तान को मार भगाने में प्रमुख किरदार निभाया। महज 19 साल के ग्रेनेडियर हवलदार योगेन्द्र सिंह यादव को उनके अतुल्य शौर्य और देशभक्ति के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

9. अपनी वीरता के लिए ये रेजीमेंट 38 युद्ध पदक, 3 परमवीर चक्र और अन्य कई सारे सैन्य पदकों से सम्मानित होती रही है। यह रेजीमेंट सही अर्थों में भारत की विविधता में एकता को दिखाती है, क्योंकि इसमें जाट, कुमायूं, मुस्लिम, राजपूत, अहिर और गुज्जर आदि हर जाति-धर्म के सैनिक हैं। सबसे बड़ी बात इनका परस्पर तालमेल अपने आप में नायाब व बेजोड़ होता है।

10. ग्रेनेडियर्स मुंबई में आतंकी हमले के समय उतारी गई सेना का भी हिस्सा थे। ग्रेनेडियर्स श्रीलंका, कोरिया, सिओल आदि राष्ट्रों में शांति सेना के रूप में भी अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।

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