पृथ्वी को बचाने के लिए साथ आए 175 देश, किया ऐतिहासिक समझौता

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3:28 pm 23 Apr, 2016


भारत ने संयुक्त राष्ट्र में ऐतिहासिक पेरिस जलवायु समझौते पर 170 से अधिक देशों सहित हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस समझौते को बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस समझौते के तहत अब सभी देश धरती पर होते अनियमित जलवायु परिवर्तन, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने को लेकर साझा काम करेंगे। इसका उद्देश्य पृथ्वी को जलवायु परिवर्तन के खतरों से बचाना है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा परिसर में संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून की ओर से आयोजित उच्च स्तरीय समारोह में पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

Prakash Javadekar

पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर thehindubusinessline

इस उच्चस्तरीय समारोह में सरकार के प्रमुखों, शासनाध्यक्षों, मंत्रियों और उद्योगपतियों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने इस समझौते को ऐतिहासिक पल करार देते हुए कहा:

“यह इतिहास में एक अहम क्षण है। आज आप भविष्य से जुड़े एक संविदापत्र पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। हम समय से होड़ कर रहे हैं।”

UN President

फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद (बाएं), संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून के साथ dailymail


इसके साथ ही एक दिन में 175 देशों ने एक साथ एक अंतरराष्ट्रीय समझौते पर हस्ताक्षर कर नया रिकॉर्ड कायम किया है। इससे पहले 119 देशों ने 1982 में समुद्री नियम संधि पर एक साथ हस्ताक्षर किए थे।

वहीं, भारत के पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने इस ऐतिहासिक समझौते को लेकर कहा कि इससे यह दिखेगा कि गैस उत्सर्जन में कटौती और गरीबी उन्मूलन में किस तरह से उनकी कथनी और करनी एक जैसी रहती है।

“विकसित दुनिया की इसको लेकर परीक्षा होगी कि वे कैसे अपने खुद के देशों में इसे अपनाते हैं और विकासशील देशों को क्रियान्वयन के माध्यम उपलब्ध कराते हैं या नहीं।”

इस समझौते पर हस्ताक्षर के बाद सभी देशों को पहले अपने यहां से इस समझौते को मंजूरी दिलानी होगी। जब जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) से जुड़े कम से कम 55 देश , जिनका वैश्विक उत्सर्जन कम से कम 55 फीसदी हो, इस समझौते पर  घरेलू स्तर पर अपनी हामी भर देंगे, उसके 30 दिनों के भीतर यह प्रभाव में आ जाएगा।

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