भारत की संस्कृति और संघ की विरासत से सजी है यह ‘विदेशी धरती’

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12:55 pm 7 Sep, 2016


इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारतीय संस्कृति को विश्व की अत्यन्त प्राचीन और श्रेष्ठ संस्कृति का दर्ज़ा दिया गया है। भारतीय संस्कृति लौकिकता, अधिभौतिकता और भोगवाद की बजाय आध्यात्मवाद और आत्मतत्व की भावना पर केन्द्रित है। यही कारण है सुदूर देश भी भारतीय संस्कृति से प्रभावित हुए बिना नही रह पाते हैं।

तो चलिए आज हम म्यांमार या बर्मा के उस अनोखे गांव के बारे में बताते हैं, जिसे ‘मिनी इंडिया’ के नाम से भी पहचाना जाता है

म्यांमार का ज़ेरावरी गांव, जहां दिखती है भारतीय संस्कृति की बेमिसाल तस्वीर

म्यांमार की राजधानी नैप्यीदा से करीब 150 किलोमीटर दूर बसा ज़ेरावरी गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता से कहीं ज़्यादा भारतीय संस्कृति की अनोखी खूबसूरती के लिए पहचाना जाता है। यहां के स्कूल में पढ़ रहे कुल छात्रों में पचास फीसदी से ज़्यादा छात्र मूलरूप से भारतीय हैं। इतना ही नही ज़ेरावरी स्कूल के प्रधानाचार्य जयप्रकाश के मुताबिक इस पाठशाला के निर्माण में मदद की भागीदारी प्रमुख रूप से भारतीयों की रही है।

हिन्दी की पाठशाला

म्यांमार को भारत की ही तरह वर्ष 1948 में आज़ादी मिली थी। इसके बाद वहां के स्कूलों में बर्मी भाषा अनिवार्य कर दिया गया था, लेकिन भारतीय विरासत से प्रभावित ज़ेरावरी गांव के स्कूल में बर्मी और अँग्रेज़ी के साथ हिन्दी भाषा भी सिखाई जाती है। हालांकि इनमें से अधिकांश छात्रों को भारत आने का अवसर प्राप्त नहीं हो सका है, लेकिन बॉलीवुड फ़िल्मो में इनकी रुचि बहुत कुछ बयां करता है। साथ ही हिन्दी भाषा पर इनकी अच्छी पकड़ है।  ज़ेरावरी माध्यमिक स्कूल के प्रधानाध्यापक जयप्रकाश बताते हैंः

“छात्रों को हिन्दी पाठ्यपुस्तक के अलावा उपलब्ध धार्मिक पुस्तकों जैसे रामायण गीता आदि का अध्ययन कराया जाता है, ताकि वो भारत की विरासत के साथ अपने धर्म को भी जान सकें।”


ज़ेरावरी में सनातन धर्म की जड़ें मजबूत करती राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाएं

सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और चरित्र निर्माण के लिए ज़ेरावरी गांव में भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का भगवा झंडा एक विरासत की तरह है। बताया जाता है कि ज़ेरावरी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ‘हिंदू संस्कृति विकास केंद्र’ नाम की शाखा की स्थापना 1958 में रामप्रकाश धीर ने की थी। इन शाखा में रोजाना एक घंटे की कक्षा का संचालन किया जाता है, जिनमें हिन्दी भाषा के साथ साथ भारतीय संस्कृति का पाठ किया जाता है। साथ ही यहां विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।

बर्मी लिबास में भारतीय संस्कृति के रंग

मिनी इंडिया नाम से पहचाने जाने वाला ज़ेरावरी गांव भारतीय संस्कृति के आध्यात्मवाद के लिए भी जाना जाता है। यहां स्थित हिंदू देवी देवताओं के मंदिर धार्मिक शांति प्रदान करते हैं। यही नहीं, अगर किसी दूसरे देश में आप भारतीय विरासत के आत्मतत्व का आनंद उठना चाहते हैं, तो बर्मी भेषभूषा में हिन्दी, बिहारी, भोजपुरी बोलते यहां के स्थानीय लोगों से मिलिए।

यकीन मानिए ज़ेरावरी के छोटे मोटे ढाबों में अगर कहीं आपको समोसे और चटनी का स्वाद लेने का मौका मिल गया तो आप म्यांमार के इस छोटे से भारत में भी बिहार और उत्तर प्रदेश के चटखपन का लुत्फ उठा सकते हैं

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