धड़ल्ले से चल रहे अवैध बूचड़खाने, 8 राज्यों में एक भी रजिस्टर्ड नहीं

author image
1:03 pm 17 Apr, 2017

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अवैध बूचड़खानों पर बड़ी कार्रवाई की है। वहीं, देश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय सरकारें भी उत्तर प्रदेश का अनुशरण कर रही हैं। ऐसे में पता चला है कि देश में 8 राज्यों में एक भी बूचड़खाना पंजीकृत नहीं है। जहां तक वैध बूचड़खानों की बात है तो इनकी संख्या 1,707 है। ये बूचड़खानें खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के तहत पंजीकृत हैं।

एक आरटीआई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि तमिलनाडु, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा पंजीकृत बूचड़ाखाने हैं। जबकि, अरुणाचल प्रदेश सहितआठ राज्यों में एक भी बूचड़खाना पंजीकृत नहीं है।

इस आरटीआई को दाखिल किया है मध्यप्रदेश के नीमच के रहने वाले आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने। उन्हें ये आंकड़े भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने मुहैया कराए हैं।

देश में वैध बूचड़खानों की संख्या राज्यवार कुछ इस तरह है।

तमिलनाडु में 425, मध्यप्रदेश में 262 और महाराष्ट्र में 249 बूचड़खाने पंजीकृत हैं। यानी देश के कुल 55 फीसदी पंजीकृत बूचड़खाने इन्हीं तीन सूबों में चल रहे हैं। वहीं, उत्तरप्रदेश में 58 बूचड़खाने पंजीकृत हैं। आंध्रप्रदेश में एक, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में नौ, असम में 51, बिहार में पांच, छत्तीसगढ़ में 111, दिल्ली में 14, गोवा में चार, गुजरात में चार, हरियाणा में 18, हिमाचल प्रदेश में 82, जम्मू.कश्मीर में 23, झारखंड में 11, कर्नाटक में 30, केरल में 50, लक्षद्वीप में 65, मणिपुर में चार और मेघालय में एक बूचड़खान रजिस्टर्ड है।

वहीं, दूसरी तरफ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा व नगर हवेली, दमन व दीव, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में एक भी वैध बूचड़खाना नहीं है।

जानवरों के अधिकारों के लिए कथित तौर पर काम करने वाली संस्था पेटा के मुताबिक देश में अवैध या वैध बूचड़खानों की संख्या 30,000 से अधिक है।

Discussions


TY News