मिलिए पहले MBBS फिर IPS और अब IAS पास करने वाली पहली कश्मीरी मुस्लिम लड़की से

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5:07 pm 4 Jul, 2016


जम्मू-कश्मीर की रहने वाली रूवैदा सलाम यहां की स्वर्ग तुल्य धरती पर इतिहास लिखती नज़र आ रही हैं। वह ऐसी पहली कश्मीरी मुस्लिम लड़की हैं, जिन्होंने भारतीय सिविल सेवा परीक्षा पास की है। लेकिन यह उनकी उपलब्धियों में पहली और आखिरी बात नहीं है।

जम्मू के कुपवाड़ा की रहने वाली रूवैदा ने सबसे पहले MBBS फिर IPS और उसके बाद अब UPSC की परीक्षा पास कर अपना IAS बनने का सपना साकार किया है।

नियंत्रण रेखा (एलओसी) के इतने करीब संवेदनशील कस्बे में रह रहीं रूवैदा को काफ़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

वह कहती हैंः

“भले ही आप श्रीनगर शहर में रह रहे हो यहां आपको मुश्किल हो ही जाती है। जब कभी अराजकता के माहौल की वजह से परिस्थितियां आपके हाथ से निकल जाती हैं। तब हमें जनता के गुस्से का सामना करना पड़ता है- कर्फ़्यू, अख़बारों पर पाबंदी और अध्ययन सामग्री उपलब्ध नहीं होती। आप पर एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है। क्योंकि आपको पता नही चलता कि इसके बाद क्या होने वाला है।”

रूवैदा बताती हैं कि उनके इस ऊंचाइयों के पीछे उनके परिवार का हाथ है। उनके पिता ने हमेशा ही उनको प्रोत्साहित किया और कभी यह एहसास नही होने दिया कि वह एक औरत के रूप में पुरुषों की तुलना में कमज़ोर हैं।

रूवैदा के पिता सलामुद्दीन बजद दूरदर्शन के उप निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। वह कुपवाड़ा से श्रीनगर शहर वहां की आतंकवादी गतिविधियों से बचने के लिए आए। सलामुद्दीन अपनी बेटी पर गर्व करते हैं।

“मैं काफ़ी सम्मानित महसूस करता हूं। वह हमारे समुदाय की पहली ऐसी लड़की है जो हर क्षेत्र में बेहतरीन कर रही है।”


27 साल की जुवैदा सलाम को ये कामयाबी यूं ही आसानी से नहीं मिली। इसके लिए उन्हे कई मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा। जब उन्होने पहले एमबीबीएस की परीक्षा पास की तो उनके परिवारवालों और रिश्तेदारों ने उनपर शादी का दबाव बनाना शुरू कर दिया। एमबीबीएस में सफलता पाने के बाद शादी करके एक आम लड़की जैसी जिंदगी बिताने के बजाय रूवैदा ने अपने बुलंद हौसलों के दम पर ये कामयाबी हासिल की।

आपको बता दें कि इस वर्ष के 998 सफल उम्मीदवारों में रूवैदा सलाम की रैंक 820वीं है। रूवैदा सलाम पहली ऐसी भारतीय मुस्लिम लड़की हैं, जिन्होंने भारतीय सिविल सेवा परीक्षा पास की है।

रूवैदा ने अपने मेडिकल की पढ़ाई 2009 में शुरू कर दी थी। उन्होंने श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से अपनी डिग्री प्राप्त की। उसके बाद श्रीनगर में लोक सेवा आयोग की परीक्षा के लिए आवेदन किया। यहां पर 398 पोस्ट थी। इसमे रूवैदा ने 25वीं रैंक हासिल की।

पिछले कुछ सालों में कश्मीर घाटी में सरकारी नौकरियों के लिए युवाओं में काफ़ी रुझान दिखा है। रुवैदा सलाम की सफलता की कहानी एक नई पीढ़ी के लिए जहां आशा है, वहीं निश्चित रूप से कश्मीर घाटी में एक बदलाव की बयार है।

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