ये हैं दुनिया के 10 भीषण ज्वालामुखी विस्फोट, सैंकड़ों ने गंवाई थी जान

4:46 pm 17 Apr, 2016


ज्वालामुखियों का फटना किसी ऐतिहासिक घटना से कम नहीं है। हम यहां इतिहास में दर्ज कुछ सबसे शक्तिशाली विस्फोटों की एक सूची आपके लिए लेकर आए हैं।

1. गलुंग गुंग | इंडोनेशिया | 8 अक्टूबर | 1882 | मृतक संख्या 4,011

अचानक से फटे इस ज्वालामुखी से निकले खौलते मलबे, जलती गंधक एवं राख और पत्थरों की चपेट में देखते ही देखते पूरे 114 गांव आ गए और नष्ट हो गए। इसी ज्वालामुखी में हुए एक अन्य विस्फोट में वर्ष 1982 में 68 लोगों की जान गई थी।

2. केलुत | इंडोनेशिया | 19 मई | 1919 | मृतक संख्या 5,110

वर्ष 1901 से सोया हुआ यह ज्वालामुखी बिना किसी चेतावनी या संकेत के एक दिन अचानक ही फट पड़ा। लावा से बनी लम्बी नदी और उससे हुए भूस्खलन, हजारों निवासियों की दुखद मौत का कारण बना। यह ज्वालामुखी अभी भी सक्रिय है और उसमे पुनः 2007 में विस्फोट हुआ था।

3. लाकी | आइसलैंड | जनवरी-जून | 1783 | मृतक संख्या 9,350

आइसलैंड, धरती पर सबसे अधिक होने वाली ज्वालामुखी गतिविधियों का केंद्र है। हालांकि, घनी आबादी वाला स्थान न होने के कारण इसके विस्फोट से अधिक नुकसान नहीं होता। सबसे भयंकर विस्फोट लाकी वोल्कानिक रिज पर 11 जून को हुआ, जिसमे सबसे अधिक लावा के बहाव को दर्ज किया गया। लगभग 80 किलोमीटर लम्बे और 30 मीटर गहरे लावा के बहाव ने इसके चपेट में आए सारे गांवों को भस्म कर दिया और जो लोग लावा से बचे रह गए, उन्होंने जहरीली गैसों से घुटकर दम तोड़ दिया।

4. उन्जें | जापान | 1, अप्रैल, 1792 | मृतक संख्या 14,300

यहाँ तीव्र ज्वालामुखी गतिविधियों की वजह से कई द्वीप तबाह हो गए हैं।

5. माउंट एट्ना | सिसीली | वर्ष 1169 | मतृक संख्या 15000

लोगों ने कैटानिया गिरजाघर में यह सोच कर पनाह ली थी कि वे सुरक्षित रहेंगे। ज्वालामुखी से उत्पन्न सुनामी के मेस्सिना बंदरगाह से टकराने से वे लोग यहीं दफ़न हो गए।

6. माउंट एट्ना | सिसीली | 11 मार्च 1669 | मृतक संख्या 20,000

यूरोप का सबसे बड़ा ज्वालामुखी (13,280 मीटर) कई बार फट चुका है, पर सबसे घातक विस्फोट 1969 में हुआ था। बहते हुए लावा ने कैटानिया नामक शहर को अपने अंदर समा लिया। लगभग 20,000 लोग इसमें जल कर राख हो गए।


7. नेवादा डेल रिउज | कोलंबिया | 13 नवंबर 1985 | मृतक संख्या 22,940

यहां मौजूद ज्वालामुखी ने अपने फटने की कई चेतावनियां दी थी, लेकिन जब तक लोगों को बाहर निकाला जाता, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। ज्वालामुखी से निकले गर्म भाप, पत्थर और राख से पिघलती बर्फ से पैदा हुई बाढ़ ने यहां बसे अरमेरो शहर को पूरी तरह उजाड़ दिया।

8. मोंट पीली | मर्टिनिक्वे | 8 मई 1902 | मृतक संख्या 27,000

सदियों से शांत पड़े इस मोंट पीली ज्वालामुखी ने अप्रैल 1902 में फटना शुरू किया। मुख्य शहर, सैंट पिएर्रे के वासियों ने खतरे को अनदेखा करते हुए कोई कदम नहीं उठाया और अपने घरों में ही रहे। परिणामस्वरूप, 8 मई को लगभग सुबह 7:30 पर फटे इस ज्वालामुखी के पिघले लावा, गैस एवं राख ने यहां के जन-जीवन को नष्ट कर दिया। लुइस औगुस्टे सिल्बरिस नामक कैदी, जो सैंट पिएर्रे जेल में कैद था, ही बच पाया। उसे बाद में, बरनम और बेली नामक सर्कस में “द अमेजिंग सरवाईवर ऑफ़ मोंट पेली” के नाम से शामिल कर लिया गया।

9. क्राकाटोआ | सुमात्रा | 26-27 अगस्त 1883 | मृतक संख्या 36,380

कुछ दिनों तक लगातार फटने के बाद इस टापू पर ज्वालामुखी के फ़टने से हुए एक जबरदस्त विस्फोट की गूंज 4,800 किलोमीटर तक सुनाई पड़ी। यह मानव इतिहास में सबसे भयंकर विस्फोट साबित हुआ। आंकड़ों के मुताबिक, इस विस्फोट से उत्पन्न 30 मीटर ऊंची सुनामी में लगभग 2 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई। इस ख़तरनाक आपदा को वर्ष 1969 में बनी एक फिल्म (क्राकाटोआ, ईस्ट ऑफ़ जावा ) में भी दिखाया गया, जबकि क्राकाटोआ वास्तव में जावा के पश्चिम में है।

10. तम्बूरा | इंडोनेशिया | 5-12 अप्रैल, 1815 | मृतक संख्या 92,000

ये अनुमान लगाया गया कि वर्ष 1600 से 1982 तक इंडोनेशिया में फटने वाले ज्वालामुखियों से कुल मिलाकर 160,783 लोगों की जानें गई हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक हैं। सम्भवा द्वीप पर हुए तंबोरा के एक विध्वंशकारी विस्फोट में तुरंत ही 10 हजार से अधिक लोगों की मौत हो गई तथा उससे आई आपदा, बीमारियों और भुखमरी की वजह से 182,000 लोग मारे गए। सम्भवा में मारे जाने वालों की संख्या 138,000 और लोम्बोक द्वीप पर मृतकों की सख्या 44,000 के करीब थी। यहां उपजी राख की वजह से सूर्य का प्रकाश कई सालों तक धरती को छू नहीं सका था। यही नहीं, मौसम भी खराब रहा था। इस त्रासदी को कला के रूप में बखूबी दिखाया गया था। लार्ड बायरन और उनके सहयोगियों ने इस घटना से प्रेरित हो दहला देनी वाली कथाएं लिखी, जिनमे मैरी शैली की किताब फ्रैंकेंस्टीन एक है।

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