इस शहर में न तो सड़क है और न ही पगडंडियां, फिर भी आवागमन करते हैं लोग

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12:49 pm 26 Feb, 2016

कल्पना कीजिए कि आप ऐसी जगह हैं जहां ‘सड़क’ का अस्तित्व ही न हो। अरे सड़क तो छोडिए पगडंडियां भी अस्तित्व में न हो तो! सपनों का यह नगर किसी परीलोक में नहीं, बल्कि धरती पर ही मौजूद है।


गिएथूर्न, नीदरलैंड (हॉलैंड) का एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है, जिसे ‘नीदरलैंड का वेनिस’ भी कहा जाता है। इस नगर की खूबसूरती और सादगी देख कर यहीं बस जाने का मन करता हैं। पूरे हॉलैंड में यह जगह पर्यटन के लिए खास मशहूर है। बसंत के सुहाने मौसम में हम ख़ास आपके लिए लेकर आए हैं, बेहतरीन सपनों और शिकारों के नगर की कहानी।

1. गिएथूर्न हॉलैंड के ओवरिजेस्सल प्रांत में स्थित एक छोटा सा देहाती क़स्बा है। यह करीब 8 किलोमीटर लम्बे नहरों के नेटवर्क से घिरा हुआ है। स्थानीय जनता ट्रांसपोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक बोट्स का उपयोग करती है।

2. यह एक खास प्रसिद्द पर्यटन स्थल है। इन नावों से बहुत कम शोर होता है, इसलिए दूर-दूर से पर्यटक अक्सर मानसिक थकान और काम के बोझ से राहत महसूस करने के लिए गिएथूर्न की ‘नावों’ का आनंद उठाने आ जाते हैं। यदि आप शिकारों और शांत झील में विचरण के शौक़ीन हैं, तो आप के लिए कश्मीर के अलावा हॉलैंड का गिएथूर्न भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

3. स्थानीय लोगों ने एक स्थान से दूसरी स्थान जाने के लिए ‘कस्बे’ के बीच से गुजरने वाली नहर पर लकड़ी के पुल बना लिए हैं।

4. इस क्षेत्र को वर्ष 1170 में भयंकर बाढ़ का सामना करना पड़ा था, जिसमें पूरा कस्बा जलमग्न हो गया। हालांकि तब यह जंगली इलाका था तथा यहां कोई नहीं रहता था।

5. इस गांव की स्थापना भयानक बाढ़ के बाद लगभग 60 साल बाद में वर्ष 1230 में हुई। जब लोग यहां पर रहने आए तो उन्हें बहुत सारे जंगली बकरियों के सींग मिले। माना जाता है कि ये सींग बाढ़ में बहकर यहां इकट्ठा हो गए होंगे। इसलिए इस जगह का शुरुआती नाम पड़ा ‘गेटेनहोर्न’ (Geytenhorn), जिसका मतलब होता है ‘बकरियों की सींग’। कालान्तर में शाब्दिक अपभ्रंश के फलस्वरूप यह गिएथूर्न (Giethoorn) हो गया।

6. यहां के नहरों के निर्माण की कहानी तो और भी अधिक दिलचस्प है। आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि इन नहरों का निर्माण अनजाने में ही हुआ। असल में जब लोग यहां रहने आए, तो उन्होंने देखा कि बाढ़ की वजह से जगह-जगह भारी मात्रा में ‘पिट’ इकठ्ठी हो गई है। यह ‘पिट’ एक तरह की दलदली मिट्टी और वनस्पतियों का मिश्रण होता है, जो की ईंधन के रूप में काम में लिया जाता है।

7. बस फिर क्या था, गांव वालों ने इस पिट को काम में लेने के लिए जगह-जगह खुदाई की। इस तरह खुदाई करते-करते कई सालों में अनजाने में यहां पर नहरों का निर्माण हो गया। तब शायद किसी को यह अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि पीट निकालने से बनी नहरों के कारण यह जगह दुनिया के नक्शे पर खूबसूरत पर्यटक स्थल के रूप में छा जाएगी। इस गांव से कुल 8 किलोमीटर लम्बी नहरें निकलती हैं।

8.गिएथूर्न कस्बे में 180 से अधिक पुल हैं, जो इसे नहरों का नेटवर्क बनाने में मदद करते हैं। यह कस्बा चाइनीज पर्यटकों की बहुलता के लिए भी जाना जाता है। यहां हर साल लगभग 2 लाख चाइनीज पर्यटन के लिए आते हैं। यहां के मूल निवासियों की संख्या 3000 से भी कम है।

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