घोड़ागाड़ी हांकने वाले की बेटी ने ओलंपिक के पहले ही मैच में दिखाया कमाल

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6:17 pm 9 Aug, 2016


एक पिता के लिए सबसे गर्व के पल क्या हो सकते हैं? यही न कि संतान उनका नाम रोशन कर सकें और बात जब बेटी को हो, तो गरिमा दोगुनी हो जाती है। कोई भी पिता चाहता है कि उसकी जान सी प्यारी बेटी के हर सपने पूरे हों। कुछ ऐसा ही सोचकर घोड़ा गाड़ी चलाने वाले रामपाल जब कभी अपनी बेटी को हॉकी स्टिक पकड़े मैदान में देखते हैं तो उनकी आंखें छलक जाती हैं। फिर जब बात ओलंपिक की हो, तो उस पिता के साथ पूरा देश भावुक हो जाता है।

हम बात कर रहें हैं कुरुक्षेत्र के शाहबाद की बेटी हॉकी खिलाड़ी रानी रामपाल की, जिनके रियो ओलंपिक में भारत और जापान की महिला हॉकी टीम के मैच में अहम योगदान रहा और जिसके बदौलत यह मैच ड्रॉ पर छूटा।

रियो से हजारों किलोमीटर दूर कुरुक्षेत्र के शाहबाद में इस ड्रॉ मैच को लेकर भी उत्साह का माहौल बन गया था। एक समय ऐसा लग रहा था कि यह मैच भारत हार जाएगा, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने वापसी करते खासकर रानी रामपाल के आगाज़ी गोल के बाद पूरी टीम में एक बिजली सी की लहर दौड़ गयी। हालांकि यह मैच 2-2 की बराबरी पर छूटा पर रानी के घर उसके माता-पिता के लिए यह ड्रॉ मैच भी जीत की शुरुआत की तरह रहा।

मैच को बराबरी पर लाने में उनकी बेटी रानी रामपाल के गोल की अहम भूमिका रही थी। यह खुशी का माहौल अन्य खिलाड़ियों के घर पर भी था। बस थोड़ी मायूसी इस खातिर थी कि भारत यह मैच जीत नहीं पाया।

रामपाल बताते हैं कि वैसे तो हॉकी के खेल की उन्हें समझ अधिक नहीं है। लेकिन जब कभी भी बेटी को भारत की जर्सी पहने देखते हैं तो पूरे परिवार के साथ बिल्कुल बच्चों की तरह खुशियां मनाते हैं। कुछ ऐसा माहौल उनके घर रविवार को भी देखने को मिला जब ओलंपिक में भारत का पहला मुकाबला जापान से हुआ।


मैच के हाफ़ तक पूरा पलड़ा जापान का भारी रहा। पहले हॉफ में जापान ने भारत को 2-0 से पीछे कर रखा था। फिर जैसे-जैसे खेल आगे बढ़ता रहा यहां भारत में रानी रामपाल के परिजनों के साथ पूरे हिन्दुस्तान की धड़कनें भी बढ़ने लगी थीं। इसके बाद जैसी ही पेनाल्टी कॉर्नर के जरिए रानी ने भारत का खाता खोला, यहां उसके पिता खुशी से उछल पड़े। मां भी हाथ जोड़कर भगवान का शुक्रिया अदा करने लगी। इसके बाद भारत की तरफ से एक गोल, फिर हो गया कुछ देर पहले तक जहां भारत पर हार के बादल मंडरा रहे थे, वहीं रानी और समस्त भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन से जीत की उम्मीद दिखने लगी। मैच के बाद घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।

रानी के पिता रामपाल का कहना था कि बेटी और पूरी टीम अपना काम कर रही है। हम तो बस दुआ कर सकते हैं। उम्मीद है कि रानी बेहद शानदार प्रदर्शन करेगी और टीम को जीत दिलाने में उसका योगदान जरूर होगा। सभी लोग मिलजुल कर प्रयास करेंगे, तो इस बार मेडल जरूर मिलेगा। बस बेटी मेडल ले आए, यही दुआ है। इधर, नवजोत के पिता सतनाम सिंह और पूरा परिवार भी भारत के इस प्रदर्शन से खुश हैं। आगे सभी को उम्मीद है कि टीम जीत कर लौटेगी।

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