नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं पाकिस्तान में हिन्दू, बचे हैं सिर्फ 1.5 फीसदी

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11:45 am 26 May, 2016


पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल मोहम्मद अली जिन्ना ने 11 अगस्त 1947 को पाकिस्तान की आवाम को संबोधित करते हुए कहा थाः

“सभी पाकिस्तानियों को उनके धर्मस्थलों पर जाने का अधिकार होगा तथा गैर-मुस्लिम अपनी धार्मिक भावना के लिए स्वतंत्र होंगे।”

भारतवर्ष की अखंडता को लहुलुहान करते हुए, दो भागों में विभाजित करने वाले जिन्ना तथाकथित ‘काफिरों’ को दिए गए भरोसे पर कितना खरे उतरे, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि विभाजन के समय 24 फीसदी पाकिस्तानी हिन्दुओं की जनसंख्या, आज 69 वर्ष बाद महज 1.5 फीसदी में सिमट कर रह गई है।

 पाकिस्तान में योजनाबद्ध तरीके से हिन्दुओं का दमन किया जा रहा है! हमने पाकिस्तान में हिन्दुओं की स्थिति को निम्नलिखित 12 बिन्दुओं में स्पष्ट किया है।

1. इस्लामाबाद स्थित मानवाधिकार संस्था SDPI ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया है कि है पाकिस्तान में प्रत्येक वर्ष करीब 1,000 गैर मुस्लिम लड़कियों का “जबरन” धर्म परिवर्तन करवाया जाता है। सबसे भयावह बात यह है कि इसके लिए सबसे पहला जरिया बलात्कार को बनाया जाता है। रिंकल कुमारी जैसी हजारों हिन्दू लडकियां इसका शिकार हो चुकी हैंं।

2. पाकिस्तानी हिन्दू काउंसिल के अनुसार अकेले सिंध प्रान्त से हर महीने 20 हिन्दू लड़कियों का धर्म परिवर्तन कराया जाता है। इन प्रान्तों में हिन्दुओं की जनसंख्या करीब 25 लाख है। यहां पर हिन्दू परिवारों से धर्मपरिवर्तन न कराने के लिए फिरौती ली जाती है। हिन्दू लड़कियों का अपहरण,बलात्कार और धर्म परिवर्तन की घटनाएं आम हैं। 

3. पाकिस्तान में सभ्य समझे जाने वाले बहुसंख्यक धार्मिक समुदायों के अगुआ भी जबरन धर्मपरिवर्तन की इन गतिविधियों में संलिप्त रहते हैं और उपद्रवी तत्वों को हिन्दुओं के प्रति जिहाद के लिए उकसाते रहते हैं। सरकारें और पुलिस भी इन कट्टरपंथियों के साथ सहमति बनाए रखने के लिए इन घटनाओं पर आंखें मूंद लेती हैं।

4. पाकिस्तान के इस्लामी लोकतंत्र में ईशनिंदा (blasphemy) कानून को सबसे अधिक तवज्जो दी जाती है। पाकिस्तान के एक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मो. अख्तर साफ़ कहते हैं कि “ईशनिंदा को रोकना हर मुस्लिम का दायित्व है”। जहां न्यायपालिका ही ऐसे बयानों का प्रयोग करती हो, वहां आप निष्पक्ष न्याय की उम्मीद कैसे कर सकते हैं !!

5. हिन्दुओं को पाकिस्तानी व्यवस्थापिका में क्लर्क से ऊंचे पद पर तैनाती नहीं होती। हालांकि, कुछ अपवाद जरूर हैं,लेकिन कमोबेश हर सरकारी तंत्र में हालात ऐसे ही मालूम होते हैं।

6. पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों द्वारा स्वतंत्र व्यापार करना दुरूह है। व्यापार करने के लिए मूक रूप में ही सही, पर एक मुस्लिम पार्टनर बनाना जरूरी है। पाकिस्तानी आवाम का एक बड़ा वर्ग हिन्दुओं को ‘कंजूस बनिया’ मानता है और उन्हें इस्लाम के लिए खतरा बताता हैं।

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7. हिन्दू और सिख पाकिस्तान में भारत के प्रतीक समझे जाते हैं। इसलिए जब भी भारत-पाकिस्तान के बीच किसी भी प्रकार का द्वन्द होता है, चाहे वह क्रिकेट मैच या सीजफायर का उल्लंघन हो, हिंदुओं के मंदिर, बेटियों, घर, दुकानों और संपत्ति को निशाना बनाया जाता है।

8. पाकिस्तान अपनी इस्लामिक कट्टरता को अपनी शिक्षा और समाज पर भी थोपे हुए है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ पाकिस्तान के स्कूलों में भारत को ‘काफिरों का देश’ बताते हुए उससे घृणा करने की सीख दी जाती है। इसका बुरा प्रभाव ये पड़ता है कि पाकिस्तान की भारत विरोधी भावना का कोपभाजन,स्थानीय निर्दोष हिन्दुओं को भुगतना पड़ता है।

9. साल 1992 में बाबरी विध्वंस की प्रतिक्रिया में पाकिस्तान में सैकड़ों मंदिरों को नष्ट कर दिया गया। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की इस समय पाकिस्तान की राजधानी ‘इस्लामाबाद’ में एक भी हिन्दू मंदिर अस्तित्व में नहीं हैं। सबसे अधिक 50 मंदिर कराची में हैं,लेकिन 30 से अधिक में कट्टरपंथियों ने अतिक्रमण कर रखा है।

10. धार्मिक स्वतंत्रता का जो छलावा पाकिस्तान ने रच रखा है। उसके अनुसार पाकिस्तान के हर छात्र को स्कूल में कुरान पढना जरूरी है। इसकी अवमानना ईशनिंदा की परिधि में आती है। यदा-कदा इस कानून की आड़ में कट्टरपंथी निर्दोष हिन्दुओं और अन्य गैर इस्लामियों के साथ अत्याचार करते हैं।

11. कभी पाकिस्तान का अंग रहा बांग्लादेश भी हिदुओं पर अत्याचार के मामलों में पीछे नहीं है। पिछले 20 सालों में हजारों हिन्दुओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की हत्याएं की गई हैं। ‘वेस्टेज प्रापर्टीज रिटर्न’ जैसे काले कानूनों के कारण यदि किसी हिन्दू की जमीन हड़प ली गई है,तो वह उस पर अपील करने का अधिकार नहीं रखता।

12. दुर्दशा के शिकार पाकिस्तानी हिन्दू भारत को अपनी आख़िरी आस मानते हैं। कई पाकिस्तानी हिन्दू जत्थों की शक्ल में अपनी सारी संपत्ति छोड़-छाड़ कर भारत की ओर पलायन कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे दोबारा पाक नहीं जाना चाहते। इससे उनकी मजबूरी और पीड़ा का अंदाजा सहजता से लगाया जा सकता है।

भारत में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और अहमदाबाद जैसे शहरों में करीब 3 करोड़ फर्जी घुसपैठिए रह रहे हैं, जिसकी आधिकारिक जानकारी सरकार के पास भी नहीं है।

असम और पश्चिम बंगाल की पूर्ववर्ती राज्य सरकारों ने तो उनके वोटर आईडी और राशन कार्ड भी बनवा दिए हैं। आपको बता दें की इनमें से अधिकतर बांग्लादेशी मुस्लिम हैं। तो क्या मानवता के नाम पर भारत सरकार को इन पलायित हिन्दूओं को शरण नहीं देना चाहिए !!!

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