इस गांव की हर लड़की खेलती है हॉकी, देश का नाम किया है रौशन

author image
3:23 pm 14 Nov, 2016


देश का एक गांव ऐसा भी है, जहां की लडकियां हॉकी के प्रति समर्पित हैं। हम यहां बात कर रहे हैं झारखंड के हेसेल गांव की, जहां के प्रत्येक घर में आपको हॉकी को असल में जीने वाली जुनूनी महिला खिलाड़ी मिलेंगी।

हाल ही में सिंगापुर में भारतीय महिला हॉकी टीम ने चीन को हराकर एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया। इसी विजेता टीम का एक अहम हिस्सा थीं निक्की प्रधान, जो इसी गांव से हैं। इसी हेसेल गांव की गलियों में निक्की ने हॉकी खेलना सीखा।

आज निक्की गांव की हर लड़की के लिए प्रेरणा हैं। निक्की प्रधान झारखंड की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी हैं, जिन्हें इस साल ब्राज़ील में हुए ओलंपिक खेलने का गौरव प्राप्त हुआ।

nikki

निक्की प्रधान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ bbci

इसी गांव की एक और खिलाड़ी हैं पुष्पा प्रधान, जिन्होंने 2002 में जोहांसबर्ग में हुए चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी टूर्नामेंट में अपनी एक अलग छाप छोड़ी थी और वह 2004 के एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम की सदस्य भी रही थीं।

pushpa

पुष्पा प्रधान

पुष्पा प्रधान की उपलब्धि पर उनके पिता सोमरा प्रधान स्रोत से बात करतें हुए कहते हैंः ‘मरुआ की रोटी और साग खिलाकर बेटी को बड़ा किए हैं।’ साथ ही उन्होंने बताया कि पेलोल स्कूल के मास्टर दशरथ महतो ने पुष्पा और निक्की प्रधान समेत तमाम लड़कियों को हॉकी खेलना सिखाया है।

nikki

निक्की प्रधान sportingindia

नक्सल गतिविधियों से प्रभावित इस गांव में गिनती के मुश्किल से 70 घर हैं, जिनमें एक परिवार को छोड़ सभी परिवार आदिवासी समुदाय से हैं।


यहां की आदिवासी लडकियां हॉकी को लेकर जुनूनी है। यहां तक कि उन्होंने अपने पहले से पासपोर्ट बनाकर रखे हैं, इस उम्मीद के साथ कि कभी उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौका मिले और वह सब देश का नाम रौशन कर सकें।

इस गांव की करीब 30 लड़कियों ने राज्य स्तरीय टूर्नामेंट में किसी न किसी हॉकी प्रतियोगिता में भाग लिया है। इनकी प्रतिभा को अगर और निखारा जाए तो वह आने वाले वक्त में देश के लिए अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने की योग्यता रखती हैं।

अपने गांव की लड़कियों की रुचि हॉकी के खेल में देखते हुए ओलंपियन निक्की कहती हैंः

“हमने अभाव में हॉकी खेलना सीखा है। हॉकी ने हेसेल को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दी है। मुझे पूरा विश्वास है कि मेरे गांव की लड़कियां इस परंपरा को और आगे ले जाएंगी। बस उन्हें अपना लक्ष्य तय करना पड़ेगा।”

Popular on the Web

Discussions



  • Co-Partner
    Viral Stories

TY News