क्या आप जानते हैं टेलीफोन पर बातचीत हमेशा हैलो से क्यों शुरू होती है?

2:52 pm 27 Nov, 2016


मोबाइल की घंटी बजती है फोन उठता है और आप बोल उठाते हैं ‘हैलो’। ऐसा आप दिन में कम से कम दस बार करते ही होंगे परंतु क्या अपने कभी सोचा है कि मोबाइल या टेलिफोन पर व्यहवारिक बातचीत प्रारंभ करने के लिए ‘हैलो’ ही क्यों बोला जाता है? आप ज़रूर सोच रहे होंगे कि इस सवाल में ख़ास क्या है? हाय-हैलो तो आम बातचीत का हिस्सा है।

तो आप ग़लत सोच रहे हैं। दरअसल इसके पीछे एक मोहब्बत की निशानी छुपी हुई है। जिसके कारण टेलिफोन या मोबाइल पर बातचीत शुरुआत करने के साथ ही आप ‘हैलो’ बोल उठाते हैं।

‘हैलो’ बोलने के पीछे जुड़ा है ग्राहम बेल की प्रेमिका का प्रसंग।

टेलीफोन के अविष्कार ग्राहम बेल ने किया था यह कौन नही जानता होगा लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि ग्राहम बेल की गर्लफ्रेंड का नाम मारग्रेट हैलो था। और कहा जाता है ग्राहम बेल ने सर्वप्रथम अपनी प्रेमिका को ही टेलिफोन किया था, जिसको संबोधित करने के लिए उन्होने बड़े प्यार से ‘हैलो’ पुकारा था। दरअसल ग्राहम बेल ने जब सालों की मेहनत के बाद टेलीफोन का अविष्कार किया, तो उन्होंने एक ही तरह के दो टेलीफोन बनाए थे , एक टेलीफोन ग्राहम ने अपनी गर्लफ्रेंड को दे दिया था। इस तरह फोन उठाते ही हैलो कहना एक सम्बोधन के शब्द के रूप में प्रचलित हो गया। इस तरह ‘हैलो’ प्यार की निशानी के तहत प्रचलन में आया।

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वहीं कुछ जानकारों का मानना है ‘हैलो’ बोले जाने के पीछे फोन पर इस शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले 1887 में थॉमस अल्वा एडिसन ने किया था और जो अब तक चला आ रहा है। मेनहट्टन की अमेरिकन टेलीग्राफ एंड टेलीफोन कंपनी के दस्तावेजों से पता चलता है कि फोन उठाकर हेलो कहने का सुझाव सबसे पहले एडिसन ने ही दिया था। उनका मानना था कि यह शब्द 10-20 फीट की दूरी से भी सुना जा सकता है। यह भी कहा जाता है कि एडिसन ने गलती से हलो (hullo) शब्द की जगह हेलो (hello) कह दिया और बाद में यही शब्द फोन पर अभिवादन के लिए स्वीकार कर लिया गया।

परिचितों की आवाज कहीं से भी सुन पाने का तोहफा देने वाले ग्राहम बेल की कहानी है दिलचस्प

परिचितों की आवाज कहीं से भी सुन पाने का तोहफा देने वाले ग्राहम बेल के घर में उनकी मां, पत्नी, और उनका एक खास दोस्त सुनने में अक्षम थे। यही कारण था कि उनका बधिर लोगों से खासा लगाव था। उन्होंने ध्वनि विज्ञान के क्षेत्र में काफी अध्ययन किया और काफी यंत्र बनाए। 1876 में टेलीफोन के अविष्कार के अलावा मेटल डिटेक्टर बनाने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है।

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