उमर खय्याम की रुबाइयों से प्रेरित थी हरिवंशराय बच्चन की ‘मधुशाला’

12:59 pm 27 Nov, 2016


‘मधुशाला’ आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय है। 1935 में छपी मधुशाला ने हरिवंशराय बच्चन को खूब प्रसिद्धि दिलाई। इसका अंग्रेजी सहित कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है। इसके अलावा बच्चन की प्रसिद्ध रचनाओं में मधुबाला, मधुकलश, मिलन यामिनी, खादी के फूल, सूत की माला, बुद्ध और नाच घर, चार खेमे चौंसठ खूंटे, निशा निमंत्रण, दो चट्टानें जैसी काव्य की रचनाएं शामिल हैं।

‘मधुशाला’ उमर खय्याम की रुबाइयों ( चार लाइन की छंद वाली कविताएं) से प्रेरित थीइसमें उन्होने व्यक्ति और समाज की पीड़ा को उन्माद और मधु की मस्ती में भुला देने की प्रेरणा दी। तो आइए आज हरिवंशराय बच्चन के जन्मदिवस के अवसर पर उनकी ही ‘मधुशाला’ के कुछ चुनिंदा रुबाइयों को याद कर जीवन के घात-प्रतिघात को दबा कर उनका स्मरण करते हैं।

1. मधुशाला आम लोगों के ईर्द-गिर्द घूमनेवाली रचना है। यही कारण है कि मधुशाला कालजयी कृति बनकर कायम है।

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2. मधुरव से मधु की मादकता और बढ़ाती मधुशाला।

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3.  मधु के दीवानों को अपने पास बुला ही लेती है मधुशाला।

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4. अब तक ‘मधुशाला’ के पचास से अधिक संस्करण निकल चुके हैं, जबकि वह पाठ्यक्रमों में शामिल भी नहीं रही।

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5. महाकवि सुमित्रानंदन पंत ने कहा था – ‘मधुशाला की मादकता अक्षय है।’ ‘मधुशाला’ में हाला, प्याला, मधुबाला और मधुशाला के चार प्रतीकों के माध्यम से कवि ने अनेक क्रांतिकारी, मर्मस्पर्शी, रागात्मक एवं रहस्यपूर्ण भावों को वाणी दी।

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6. दिन को होली रात दीवाली रोज मनाती मधुशाला।

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7. बच्चनजी के साथ ‘साहित्यिक त्रासदी’ यह हुई कि वे न तो प्रगतिशीलों को पसंद आए और न प्रयोगवादियों को, जबकि उनकी ‘मधुशाला’ शताब्दी की सर्वाधिक बिकने वाली काव्य कृति है।

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8. बच्चन की ‘मधुशाला’ ने न केवल काव्य प्रेमियों या जनसाधारण को प्रभावित किया अपितु उसने भारत के स्वाधीनता सेनानियों, बलिदानियों और देशभक्तों को भी प्रभावित किया।

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9. हरिवंशराय बच्चन ने मधुशाला से समाज को एकता का संदेश दिया था, जिनमें यह भी है कि मधुशाला एक ऐसी जगह है जहां पर जाकर हर जाति, वर्ण, वर्ग, भाषा, धर्म और क्षेत्र का आदमी हम प्याला बन जाता है।

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10. उस दौर में साम्प्रदायिक सौहार्द्र को मजबूती दिलाने का प्रयास बच्चनजी ने मधुशाला के माध्यम से किया।

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11. मधुशाला इतनी मशहूर हो गई कि जगह-जगह इसे नृत्य-नाटिका के रूप में प्रस्तुत किया गया। मशहूर नर्तकों ने इसे प्रस्तुत किया था। मधुशाला की चुनिंदा रुबाइयों को मन्ना डे ने एलबम के रूप में प्रस्तुत किया।

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12. लोगों ने आरोप लगाया था कि बच्चन पीने-पिलाने को बढ़ावा दे रहे है। यहां तक कि गांधीजी से भी उनकी शिकायत की गई। बाद में बापू से मिलकर उन्होंने बताया कि मधुशाला में मैखाने के माध्यम से जीवन का सार छिपा है और फिर बापू ने उन्हें आशीर्वाद दिया था।

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13. यदि आप मधुशाला के पृष्‍ठों से होकर मधुशाला के अंदर प्रवेश करेंगे और कविता के प्‍याले में भावों की हाला पिएंगे तो पाएंगे कि आप जीवन की एक उत्‍कृष्‍ट पाठशाला में आ गए हैं।

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14. इस मधुशाला में मद्यसेवी के लिए हाला की मादकता है, दार्शनिक के लिए जीवन-दर्शन है, राजनीतिज्ञ के लिए शुद्ध राजनीति का उपदेश है, समाज सुधारक के लिए समाज के विद्रूपों से उबरने का समाधान है, समाज के लिए भाईचारे का संदेश है और भग्न हृदय प्रेमी के लिए उसके घावों पर लगाने की एक व्रण-रोपक औषधि है।

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