रेगिस्तान और शाही महलों का शहर है जैसलमेर

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5:25 pm 22 Dec, 2015

जैसलमेर का नाम लेते ही हमारे जेहन में आता है रेतीला रेगिस्तान। गोल्डेन सिटी के नाम से विख्यात जैसलमेर अपने शाही महलों और रेगिस्तान के लिए जाना जाता है।

थार मरुस्थल के बीचोंबीच स्थित यह शहर पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ है और यह राजधानी जयपुर से करीब साढ़े पांच सौ किलोमीटर दूर है। इस जिसे की सीमाएं बीकानेर, बाड़मेर और जोधपुर जैसे जिलों से सटी हुई हैं।

ऐतिहसिक महत्व

जैसलमेर का जिक्र प्राचीन हिन्दू महाकाव्य महाभारत में भी मिलता है। इस क्षेत्र को माडधरा या वल्लभमंडल के नाम से जानते थे। मान्यता है कि महाभारत के युद्ध के बाद कृष्ण के वंशज बड़ी संख्या में यहां आकर बसे।

ऐसे हुआ नामकरण


माना जाता है कि इस खूबसूरत शहर की स्थापना 12वीं सदी में राव जैसल ने की थी। उनके नाम पर भी इस शहर का नाम जैसलमेर पड़ गया। राव जैसल के वंश के शासकों ने यहां करीब 770 वर्ष तक लगातार शासन किया, जो भारत के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना है। सल्तनत काल से लेकर मुगल काल और फिर भारत में अंग्रेजी राज्य की स्थापने के बावजूद जैसलमेर के राजाओं ने अपने राज्य को यथावत रख पाने में अभूतपूर्व सफलता पाई थी। जैसलमेर के शासकों के पूर्वज खुद को भगवान कृष्ण का वंशज मानते थे।

भारतीय गणराज्य में विलय

वर्ष 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद जैसलमेर का विलय भारतीय गणराज्य में हो गया। करीब 16,062 वर्ग मील क्षेत्र में फैले इस भू-भाग की जनसंख्या 20वीं सदी के शुरू में मात्र 76,255 थी।

जैसलमेर का किला

80 मीटर ऊंची चित्रकूट पहाड़ी पर स्थित जैसलमेर का ऐतिहासिक किला देश की धरोहर है। इसका निर्माण शुरू किया गया था 12वीं शताब्दी में, जबकि समापन हुआ 17वीं शताब्दी में। करीब 30 फुट ऊंचाई वाले इस किले में 99 प्राचीर हैं। रेगिस्तान होने के बावजूद किले के अंदर मौजूद कुंए में निरन्तर पानी उपलब्ध होता है।

छोटे से क्षेत्र में फैले इस शहर में पर्यटक पैदल घूमते हुए मरुभूमि तक पहुंच सकते हैं।

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